International Women’s Day: डेजी ने ममता की दी वह मिशाल, जिसे देश कर रहा सलाम

बरेली: महिलाएं समाज की जटिलताओं से लड़कर आधी आबादी में अपनी एक पहचान बना रही हैं। अंतराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) के मौके पर आज ऐसी ही एक महिला की बात कर रहे हैं जो लोगों के लिये मिशाल बन गई हैं। इनका नाम डेजी ई लाल है और जिला अस्पताल (District Hospital) के बच्चा वार्ड की इंचार्ज (Incharge) हैं। इन्होंने वार्ड में भर्ती होने वाले कई लावारिस बच्चों को एक मां की ममता से उनकी जान बचाई। उन्होंने नारी निकेतन (Naari Niketan) के बच्चों को अपना समझा और उनकी सेवा कर जान बचाई। यही नहीं बल्‍कि उन्होंने उस बच्चे की भी जान बचाई जिसे उसके अपनों ने मरने के लिए रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया था।
daisyडेजी ने बताया कि वह वकील (Advocate) बनना चाहती थीं लेकिन उनकी मां सुशीला बैंज मनलाल नर्स थी। वह हमेशा देखती थीं कि उनकी मां मरीजों का दुख दर्द कितने प्यार से अपना लेती थीं। उन्‍होंने इंटर के बाद ही सोच लिया था कि उन्हें भी नर्स बनना है। इसके लिये उन्होंने लखनऊ के बलरामपुर नर्सिंग कॉलेज (Nursing College) में एडमिशन (admission) लिया और 3 साल बाद उनकी ज्‍वानिंग स्टाफ नर्स के तौर पर आयुर्वेद कॉलेज (Ayurvedic College) टूरियागंज में हो गई।

उनकी जिंदगी तब बदली जब उनकी पोस्टिंग (Posting) 2015 में बरेली के जिला अस्पताल में हुई। उन दिनों वहां फीमेल मेडिकल वार्ड में नारी निकेतन की कुपोषित बच्चियां बहुत आती थीं। उस समय वहां एक बच्ची पूजा एडमिट (Admit) हुई थी जिसे सीजर डिसऑर्डर (मानसिक समस्या) था। उसके साथ ही अन्य कई लड़कियां भी थीं जो किसी न किसी समस्या से जूझ रहीं थीं। डेजी उनके लिए रोज पराठे लेकर आती थीं और उनकी साफ सफाई पर बहुत ध्यान देती थीं। धीरे-धीरे वह बच्चियां ठीक हो गईं और नारी निकेतन भेज दी गई।
daisyडेजी ने बताया कि 2016 अक्टूबर में प्रेम नगर थाना से एक बच्चा एनआईसीयू लाया गया। पुलिस को वह बच्चा दो पॉलिथीन में बंद मिला था। वह नवजात बच्चा मात्र एक दिन का था। डेजी ने उस बच्चे को एक माह तक अपने बच्चे की तरह पाला और उसका नाम झुमरू रख दिया। उन्‍होंने बताया कि सर में चोट होने की वजह से जिला अस्पताल में ही उसका एक ऑपरेशन भी कराया गया। ठीक होने के बाद में वह बच्चा चाइल्ड केयर में भेज दिया गया। ऐसे ही जून 2017 में ट्रेन की पटरियों पर फेंके हुए एक बच्चे की जान बचाई।

डेजी ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं सौरभ और अक्षय जो कि अब अपने पैरों पर खड़े हैं पति रिटायर्ड इंस्पेक्टर (Retired Inspector) सुरेंद्र कुमार की रजामंदी से अब उनका पूरा जीवन समाज और बच्चों के लिए ही समर्पित है। डेजी खुद डायबिटीज मरीज (Diabetes Patient) हैं इसलिए अगर उनके किसी मरीज को खून की आवश्यकता होती है तो वह अपने पति या अन्य माध्यमों से खून दिलाने से भी नहीं हिचकती हैं। डेजी की इस मिशाल के लिये उन्‍हें सलाम है।

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