इस मंदिर में प्रसाद नाम पर बंटती है मटन-बिरयानी, हर साल जमकर खाते हैं हजारों लोग

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नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : आमतौर पर प्रसाद में आपने लड्डू, हलवा, या फिर कुछ और बंटते हुए सुना और देखा होगा। लेकिन हम कहें कि प्रसाद में बिरयानी मिले तो फिर आप क्या कहेंगे। जी हां, हाल ही में 2 क्विंटल चावल, 100 बकरे और 600 मुर्गे। ये सब एक खास तरह का प्रसाद बनाने के लिए इक्कठा किया गया था। इस प्रसाद को आसपास के गांव से आए लोगों में बांटा गया। दरअसल, दक्षिण भारत के तमिलनाडु मदुरै स्थित वड़क्कमपट्टी गांव में हर साल प्रसाद के तौर पर बिरयानी खिलाई जा रही है। यहां हजारों की संख्या में लोग बिरयानी खाने आते हैं।

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1937 से खिलाई जा रही बिरयानी

तमिलनाडु के मदुरै स्थित वड़क्कमपट्टी गांव में साल 1937 से प्रसाद के तौर पर लोगों को बिरयानी खिलाई जा रही है। ये बिरयानी मुनियांदी होटल मंदिर में खिलाता है। दरअसल, इस गांव के स्थानिय देवता मुनियांदी के नाम पर गुरुसामी नायडू ने मुनियांदी होटल की शुरुआत की। फिर एक के बाद एक मुनियांदी नाम से बाकी लोगों ने भी होटल खोले। ये सभी होटल अपने ग्राहकों को स्वादिष्ट नॉन वेज खिलाने के लिए जाने जाते हैं।

होटलों का नाम कुलदेवता के नाम पर

पूरे दक्षिण भारत में फैले मुनियांदी होटलों के मालिक दो बातों का विशेष ध्यान रखते हैं, पहली यह कि ग्राहकों को स्वादिष्ट नॉन वेज भोज परोसा जाए और दूसरा कि अपने होटलों का नाम अपने कुलदेवता मुनियांदी के नाम पर रखा जाए।

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हाल ही में 80000 लोगों को खिलाई गई बिरयानी

पूरे दक्षिण भारत में अब करीब 1500 मुनियांदी होटल हैं। होटलों के मालिक दो दिवसीय मुनियांदी फेस्टिवल में हर साल जुटते हैं, जहां प्रसाद में मटन बिरयानी बांटी जाती है। इस तरह से ये सभी दुकानदार अपने कुल देवता मुनियांदी (रूह्वठ्ठद्ब4ड्डठ्ठस्रद्ब त्रशस्र) को अपने काम की सफलता के लिए धन्यवाद देते हैं। हाल ही में हुए इस फेस्टिवल में करीब 8 हजार लोगों को मटन बिरयानी खिलाई गई।