चंपावत- झांडिय़ों का कटान किया तो आंखे रह गई फटी की फटी, यहां मिली ऐतिहासिक चीजें

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चंपावत-न्यूज टुडे नेटवर्क- चंपावत जिले में प्राचीन काल के तीन बिरखम मिलने का मामला सामने आया। बताया जा रहा है कि छतकोट के चांदपुर गांव में तीन बिरखम मिले हैं। ये बिरखम कत्यूरी और चंद शासन काल के बताए जा रहे हैं। इन बिरखमों में अलग-अलग आकृति बनी हुई है। ग्रेनाइट और बलुवा पत्थर से बने ये बिरखम चतुष्फलक हैं। बिरखम वीरों की स्मृति, धार्मिक प्रयोजनों और राज्य सीमांकन के साथ ही मार्ग संकेतक के रूप में प्रयोग किए जाते थे। बताया जा रहा है कि उस जगह पर झाडिय़ों का कटान किया जा रहा था इस दौरान वहां बिरखम मिले। बिरखम संस्कृत शब्द वीर स्तम्भ का प्राकृत रूप है। चंदकाल में निर्मित बिरखम को कीर्ति स्तंभ कहा जाता है। वही गुप्त काल में शहीद सैनिकों की याद में बिरखम बनाए जाते थे।

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कत्यूरी और चंद राजवंश के मंदिरों में होते थे मार्ग संकेतक

बिरखम के शीर्ष में आमलक कलश है। अभिवादन करती उपासक और उपासिका की मूर्तियां बनी हुई हैं। एक बिरखम में खड्गधारी मानव आकृति बनी है। एक अन्य बिरखम में अश्वारोही की आकृति बनी हुई है। जो स्थानीय मान्यता के अनुसार गोरल, हरु, सैम, ब्यानधूरा ऐड़ी के प्रतीक के रूप में हो सकती है। वही इस अश्वारोही के एक हाथ में लगाम तो दूसरे में तलवार है। अलबत्ता ये बिरखम अभिलेख और अलंकरणविहीन हैं। बताया जा रहा है कि बिरखमों की ऊंचाई तकरीबन 1.35 मीटर और चौड़ाई 30 सेमी है। बिरखम में स्थानीय बलुआ पत्थर का प्रयोग किया गया है। वही सम्राट अशोक के शासनकाल में राज्य के सीमांकन के तौर पर इसका प्रयोग किया जाता था। कत्यूरी और चंद राजवंश के दौर में मंदिर के प्रवेश द्वार, नौलों, महल और पैदल रास्तों में मार्ग संकेतक के रूप में लगाए जाते थे।

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