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हल्द्वानी- किस तरह छुटकारा पा सकते हैं मानसिक रोग से, मनोचिकित्सक डा. नेहा ने दी बुजुर्गों के लिए ये अहम जानकारियां

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हल्द्वानी-न्यूज टुडे नेटवर्क- शहर में बढ़ रहे बुजुर्गो की आत्महत्याओं को लेकर मनोचिकित्सक डा. नेहा शर्मा ने कई अहम जानकारी बताई। उन्होंने बताया किया सबसे ज्यादा तनावग्रस्त वह बुजुर्ग हो जाते हैं जो अकेले रहते है। कई बुजुर्ग डिप्रेशन के शिकार हो जाते है। उन्होंने कहा कि काउंसलिंग के जरिये इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। बता दें कि विश्व प्रसिद्ध मनौवैज्ञानिकों द्वारा विकासित साइकोथैरेपी, सॉइक्लाजिकल काउन्सलिंग व सांइक्लोजिक्ल टेस्ट अब कुमाऊं मंडल के हल्द्वानी शहर में भी उपलब्ध है। मालती देवी कॉम्पलैक्स में स्थित मनास मानसिक स्वास्थ्य परामर्श क्लीनिक में साइकोथैरेपी एण्ड सॉइकोलौजिकल काउंसलिंग व साइकोलौजिकल टेस्ट द्वारा एक दवा रहित समाधान किया जाता है। जानकारी देते हुए डा. नेहा शर्मा ने बताया कि सॉइक्लाजिकल मरीजों को कुछ सॉइक्लोजिकल टेस्ट, साइकोथैरेपी (मन: चिकित्सा विधि) जैसे बिहेवियर थैरेपी, टॉक थैरेपी, कौगनेटिव थैरेपी, हिप्नोथैरेपी, फैमिली थैरेपी, राइटिंग थैरेपी, ग्रुप थैरेपी, म्यूजिक थैरेपी, रिलैक्शन थैरेपी व मनोवैज्ञानिक काउंसिलिंग द्वारा मानसिक रोगों को दूर व उनका उपचार किया जा सकता है।

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क्या है इस रोग के लक्षण

बच्चों एवं किशोरों में स्लो लर्निंग डिफिकल्टी, याददाश्त एवं एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, उदासी, तनाव, घबराहट, झूठ बोलना, अधिक चंचलता, मानसिक मंदता, स्पीच प्रॉब्लम, व्यवहार परिवर्तन, रिलेशनशिप प्रॉब्लम, फैमिली प्रॉब्लम, चाइल्ड-पैरेंट रिलेशनशिप प्रॉब्लम, इमोशनल प्रॉब्लम, कैरियर सिलेक्शन प्रॉब्लम इस रोग के लक्षण है। वही वयस्कों एवं परिवार में मानसिक तनाव, काम में मन न लगना, नींद नहीं आना, बैचेनी या घबराहट महसूस करना, अनावश्यक व्यवहार व विचार बार-बार आना, तालमेल में कमी, असतुष्टि, चिन्ता, आत्महत्या का विचार, डर लगना, उदासी, आत्मविश्वास में कमी, शारीरिक बीमारी के लक्षण या शंका, जॉब डिससैटिस्फैक्शन, मैरिज एंड रिलेशनशिप प्रॉब्लम, यौन समस्याएं, क्षमताओं में कमी महसूस करना, शंका, नशे की आदत व वहम इत्यादि की समस्या होना।

मनोवैज्ञानिक निदान एकमात्र उपचार- डा. नेहा

डा. नेहा शर्मा ने बताया कि इन सब समस्याओं का एक मात्र समाधान मनोवैज्ञानिक उपचार है। जिसके बाद से इन बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कुमाऊं मंडल में अब विश्व प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिकों द्वारा विकसित साइकोथैरेपी, सॉइक्लोजिकल काउंसलिंग व सॉइक्लोजिक्ल टेस्ट संभव है। जहां पहुंचकर लोग इस समस्या के समाधान से निदान पा सकते हैं। उन्होंने बताया कि ये सारे रोग मनोवैज्ञानिक (सॉइक्लोजिकल) समस्या है। इसलिए इन रोगियो को कोई भी पैथी नहीं कर पा रही है। क्योंकि इनका एकमात्र उपचार मनोवैज्ञानिक निदान है।