Holi 2020: 500 साल बाद होली पर बन रहा है बेहद खास संयोग, जानिए क्‍यों

Holi 2020: इस बार होली के खास मौके पर ग्रह-नक्षत्रों का बेहद खास संयोग बन रहा है। ऐसा संयोग 499 साल बाद बना है। भारतीय वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार फाल्गुन पूर्णिमा 9 मार्च को है। इस दौरान गुरु बृहस्पति और शनि अपनी-अपनी राशियों में रहेंगे। जिसे सुख-समृद्धि और धन-वैभव के लिहाज से अच्छा माना जा रहा है। देवगुरु धनु राशि में और शनि मकर राशि में रहेंगे। इससे पहले ग्रहों का यह संयोग 3 मार्च 1521 में बना था।
holi/newstodaynetworkदेव गुरु बृहस्पति ज्ञान, संतान, गुरु, धन-संपत्‍ति के दाता हैं तो वहीं शनि न्याय के देवता हैं। शनि का फल व्यक्ति के उसके कर्मों के अनुसार मिलता है। यदि व्यक्ति अच्छे कर्म करता है तो उसे अच्छे फल और बुरे कार्य करता है तो शनि उसे विभिन्न रूप में दंडित करते हैं। होली पर इन दोनों ग्रह की शुभ स्थिति किसी शुभ योग से कम नहीं है।

ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि दोनों ग्रहों की यह स्थिति बेहद शुभ है। होली को प्रेम-सद्भावना, भाईचारा और सुख समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस बार ग्रहों के खास संयोग के कारण रंगों का यह त्योहार सुख-समृद्धि और वैभव का आशीर्वाद देने वाला होगा। होली के रंग सभी के जीवन में खुशियां लाएंगे और होलिका दहन से आपके कष्ट दूर होंगे। इसलिए इस बार होली मिलजुकल मनाएं और एक दूसरे के जीवन में खुशियों के रंग भरें।

नौ मार्च को होगा होलिका दहन
9 मार्च, सोमवार को होलिका दहन किया जाएगा
संध्या काल में- 06 बजकर 22 मिनट से 8 बजकर 49 मिनट तक
भद्रा पुंछा – सुबह 09 बजकर 50 मिनट से 10 बजकर 51 मिनट तक
भद्रा मुखा : सुबह 10 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 32 मिनट तक
Holi Importanceहोलाष्‍टक के बारे में भी जानें
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक शुरू हो जाएगा। यह तिथि 03 मार्च को पड़ रही है यानि होलाष्टक 03 मार्च से शुरु और 09 मार्च को समाप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक के दौरान कोई भी मांगलिक कार्य (शादी, विवाह, वाहन खरीदना या घर खरीदना, अन्य मंगल कार्य) नहीं किए जाते हैं। हालांकि इस दौरान पूजा पाठ करने और भगवान का स्मरण और उनके भजन करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

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