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हिंदू नव वर्ष : 6 अप्रैल से कौन हैं इस वर्ष के राजा, क्या है इस संवत्सर का नाम, कैसा रहेगा यह वर्ष

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नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : 6 अप्रैल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2076 को नवसंवत्सर का प्रारंभ होगा। इस बार नवसंवत्सर का नाम परिधावि होगा। शनिवार के दिन नववर्ष प्रारंभ होने के कारण इस बार नवसंवत्सर के राजा शनिदेव होंगे। साथ ही उनके मंत्री मण्डल में शनि के पिता सूर्य रहेंगे। मंत्री मण्डल में सूर्य, मंगल, चंद्र को भी विशेष पद मिलेगा। पंचागीय गणना से वर्ष फल देखें तो हिन्दू नववर्ष मिश्रित फल देने वाला रहेगा। वर्षा व धान्य की दृष्टि से संवत्सर मध्यम फलदायी होगा।

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मिश्रित फल देने वाला वर्ष

हिंदू नव वर्ष मिश्रित फल देने वाला होगा। राजनीतिक परिवर्तन होंगे। भूमि, भवन संपत्ति के मान से सकारात्मक परिवर्तन दिखेंगे। सामाजिक दृष्टिकोण से मूल्यों के स्तर पर गिरावट दिखाई देगी। बारिश का प्रभाव मध्यम रहेगा। खेती अनुपातिक ही होगी। शत्रु राष्ट्रों से युद्ध की स्थिति तथा राजनीतिक परिवर्तन के योग भी बनेंगे। पशु धन में संक्रमण, समाज में अस्थिरता तथा हिंसात्मक घटनाएं भी सामने आएंगी।

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जानिए राजा और मंत्रीमंडल का शुभ-अशुभ असर

राजा शनि- जनमानस आध्यात्मिक अनुभूति करेगा। वर्षा की दृष्टि से प्राकृतिक प्रभाव परेशानी पैदा करेगा। महंगाई भी बढ़ेगी, जिसके कारण मुद्रास्फीति प्रभावित होगी। साथ ही कई जगह अघोषित युद्ध की स्थिति निर्मित होगी।

मंत्री सूर्य- फलों का अधिक उत्पादन होने से रस पदार्थों में मंदी रहेगी। पूर्वोत्तर में उत्तम कृषि तथा धान्य की स्थिति में सुधार होगा।

सद्येश मंगल- संक्रमण का प्रभाव बढ़ेगा। पशुधन पर संकट रहेगा। दक्षिण के कुछ प्रांतों में पेयजल संकट होगा। सामाजिक अस्थिरता, हिंसात्मक घटनाएं होंगी।

धान्येश चंद्र- पशुधन की सुरक्षा का लाभ मिलेगा। बारिश में आध्यात्मिक अनुष्ठान से स्थिति अच्छी होगी। विश्व में अनेक राष्ट्रों की अर्थव्यवस्था में उतार चढ़ाव दिखाई देगा।

रसेश गुरु- औषधियों का उत्पादन बढ़ेगा। श्रावण व भादौ में जल की स्थिति अच्छी रहेगी। जल स्रोत लबालब रहेंगे।

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रेवती नक्षत्र से प्रकृति का संतुलन

नए साल की शुरुआत रेवती नक्षत्र में होने से प्रकृति का संतुलन बना रहेगा। रेवती नक्षत्र पंचक का पांचवां नक्षत्र है, जिसके अधिपति पुषा हैं। ऋग्वेद की मान्यता के अनुसार यह प्रकृति के संतुलन के देवता हैं।