iimt haldwani

हनुमान जी आज भी हैं जीवित मिला ये बड़ा सबूत, हर 41 साल बाद इस समुदाय से मिलने आते हैं हनुमान जी…

162

नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : हनुमानजी के जीवित होने के प्रमाण समय-समय पर प्राप्त होते रहे हैं, जो इस बात को प्रमाणित करते हैं कि हनुमानजी आज भी जीवित हैं। 16वीं सदी के महान संत कवि तुलसीदासजी को हनुमानजी की कृपा से ही रामजी के दर्शन प्राप्त हुए। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर पवनपुत्र हनुमान भगवान की जाति को लेकर काफी कुछ चल रहा है। नेता अपनी-अपनी मर्जी से कुछ भी बता रहे हैं।

amarpali haldwani

hanuman4

‘मातंग’ जनजाति से मिलते हैं हनुमान

कलियुग में बजरंगबली के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वे अमर हैं। लेकिन आज हम आपको सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हनुमान जी से जुड़ी इस कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं कि क्या सच में आज भी हनुमान जी हमारे आस-पास हैं। कुछ साल पहले एक खबर सुर्खियों में आई थी कि हनुमान जी अब भी अपने भक्तों की पुकार सुन उनके पास आते हैं। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, श्रीलंका के जंगलों में ‘मातंग’ नाम की एक जनजाति निवास करती है। इन कबीलाई लोगों का कहना है कि आज भी उनसे मिलने हनुमान जी आते हैं।

hanuman1

2014 में हनुमान से मिलने थे समुदय के लोग

एक अंग्रेजी अखबार ने इन जनजातियों पर अध्ययन करने वाले आध्यात्मिक संगठन ‘सेतु’ के हवाले से इस सनसनीखेज खोज का खुलासा किया है। कहा गया है कि हनुमान जी इस जनजाति के लोगों से साल 2014 में मिलने आए थे, अब दोबारा 41 साल बाद वो फिर से आएंगे। यानि साल 2055 में बजरंगी अपने भक्तों से मिलने फिर से यहां आएंगे।

हनुमान जी का मिला था वरादान

आपको बता दें कि ‘मातंग’ एक ऐसी जनजाति है जो श्रीलंका के अन्य कबीलों से बिल्कुल अलग है। इनकी संख्या भी बेहद कम है। सेतु नामक संगठन के मुताबिक, ‘मातंग’ समुदाय का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि हनुमान जी को वरदान मिला था कि उनकी मृत्यु कभी भी नहीं होगी।

hanuman-i

हनुमान जी ने कबीले के लोगों को ब्रह्मज्ञान कराया

हालांकि पुराणों में बताया गया है कि भगवान राम के स्वर्ग गमन के बाद हनुमान जी अयोध्या से दक्षिण भारत के जंगलों में चले गए थे। इसके बाद समंदर को दोबारा लांघकर वो श्रीलंका पहुंचे। उस दौरान हनुमान जी जब तक वहां ठहरे, ‘मातंग’ कबीले के लोगों ने उनकी खूब सेवा की। इस सेवा के बदले हनुमान जी ने इस कबीले के लोगों को ब्रह्मज्ञान का बोध कराया। इसके साथ ही उन्होंने यह भी वादा किया कि वे हर 41 साल बाद उनसे मिलने जरूर आएंगे।