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हल्द्वानी- आखिर क्यों सुशीला तिवारी बनता जा रहा है मौतों का अस्पताल, हुआ ये चौकाने वाला खुलासा

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Haldwani STH, हल्द्वानी स्थित कुमाऊं का सबसे बड़ा सुशीला तिवारी अस्पताल अब मौत का अस्पताल जा बनता जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि बीतें 9 वर्षों में यानि 2010 से लेकर अब तक सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज के दौरान 13187 लोग दम तोड़ चुके है। इस पूरे मामले का खुलासा आरटीआई के जरिए हुआ। बता दें कि सरकार अरबों रुपए खर्च करने के बाद भी सुशीला तिवारी अस्पताल की व्यवस्थाओं को आज तक नहीं सुधार सकी है। आलम यह है कि सुशीला तिवारी अस्पताल महज रेफरल हॉस्पिटल बनकर रह गया है।

डॉक्टरों के कई पद खाली

वही बात अगर डॉक्टरों की करें तो अस्पताल के कई महत्वपूर्ण पद खाली है। इसके अलावा कई मशीनें खराब पड़ी है। ऐसे में पहाड़ के दूरदराज इलाकों से सुशीला तिवारी अस्पताल में उपचार कराने आने वाले मरीजों को केवल निराशा ही मिलती है। अगर गंभीर बीमारी में मरीज यहां आता है तो उसका इलाज त्वरित रूप से संभव नहीं हो पाता लिहाजा उपचार के अभाव में मरीज दम तोड़ देता है। यही वजह है कि 9 वर्षों में कुमाऊँ के सबसे बड़े अस्पताल कहे जाने वाले सुशीला तिवारी में उपचार के दौरान 13187 मौतें हो चुकी हैं। आंकड़ों की माने तो इस अस्पताल में रोजाना 4 मौत हो रही है। लिहाजा राज्य सरकार भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही।

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आरटीआई से खुली पोल

सुशीला तिवारी अस्पताल की ये पोल आरटीआई के जरिए खुली है। आरटीआई के जरिए सूचना मांगने वाले समाजसेवी हेमंत गोनिया का कहना है कि दिन-प्रतिदिन सुशीला तिवारी अस्पताल के हालात खराब होते जा रहे हैं, लोग अस्पताल की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण निजी अस्पतालों में महंगे दामों में इलाज कराने को मजबूर हैं। जबकि राज्य सरकार अब तक सुशीला तिवारी अस्पताल में अरबों रुपए खर्च कर चुकी है साथ ही इसे राजकीय मेडिकल कॉलेज का हिस्सा भी बना चुकी है। बावजूद यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है।

वही मामले में राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के प्राचार्य व डॉक्टर सीपी बैसोड़ा का कहना है कि सुशिला तिवारी चिकित्सालय में अधिक्तर गंभीर स्थिती के मरीजों को रैफर किया जाता है। जिसको सही उपचार देने का प्रयास यहां मौजूद डॉक्टरों द्वारा किया जाता है। लेकिन गंभीर स्थिती में यहां मरीजों का आना एक बड़ा कारण है इस तरह के आकड़े आने का।

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