हल्द्वानी- उत्तराखंड के लोक गायक रमेश बाबू को मिला संगीत एवं गायन अवार्ड, हो रही वाहवाही

Uttarakhand News- उत्तराखंड के सुपरस्टार लोकगायक रमेश बाबू गोस्वामी (Folk singer Ramesh Babu Goswami) को लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी के 144 वें जन्मोत्सव समारोह पर भारत के गौरव संगीत एवं गायन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। रमेश बाबू उत्तराख्ंाड की गायकी में एक अपने सुंदर गीतों के जाने जाते है। गायकी को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ले जाना उन्हें विरासत में मिला है। उनके पिता उत्तराखंड के सुर सम्राट स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी ने उत्तराखंड में कई दशकों तक अपनी सुरीली आवाज से राज किया। आज के युवा उनके गाये गीतों को गाकर आगे बढ़ रहे है। उनके सुरों में कुमाऊं-गढ़वाल को एक धागे में पिरोले की गजब की कला थी।

Ramesh babu

हिन्दुस्तान जन कल्याण संघ परिवार ने किया सम्मानित

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लखनऊ में आयोजित हुए कार्यक्रम में लोकगायक रमेश बाबू गोस्वामी Folk singer Ramesh Babu Goswami) सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अध्यक्षता की। उन्हें हिन्दुस्तान जन कल्याण संघ परिवार द्वारा सम्मानित किया गया। रमेश बाबू ने जल, जंगल, भूमि, नारी वेदना व पलायन पर आधारित व उत्तराखंडी लोकगीत से संस्कृति का संवारने का प्रयास किया है। अभी तक रमेश बाबू गोस्वामी कई गीत गा चुके है। उन्होंने गोपुली गाने से उत्तराखंड में एक अलग पहचान बनाई। यू-ट्यूब पर इस गीत को अभी तक करीब 81 लाख से ऊपर व्यूज मिल चुके है।

पिता की विरासत संभाल रहा बेटा

रमेश बाबू Folk singer Ramesh Babu Goswami) ने जिस तरह से काफी कम समय में रमेश बाबू ने यह मुकाम हासिल किया है। यह कही न कही उनकी विरासत कर हिस्सा भी है। रमेश बाबू आज अपने पिता की विरासत संभाल रहे है।। ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि एक बेटा पिता की विरासत को संभालते हुए देश-दुनियां में अपना नाम कमाये, लेकिन रमेश बाबू ने ये सब किया। अपने पिता के गीतों को नई पीढ़ी के आगे नये रूप में पेश कर अपना नाम ही नहींए, अपने पिता और परिवार का नाम भी नई पीढ़ी की जुबान पर ला दिया।

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