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हल्द्वानी-उत्तराखंड फिल्म नीति में किया गया बदलाव, ऐसे मिलेगा राज्य के युवाओं को रोजगार

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हल्द्वानी- उत्तराखंड में फिल्म निर्माण और क्षेत्रीय भाषा की फिल्मों को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने फिल्म नीति में आमूलचूल परिवर्तन कर दिया है। फिल्म निर्माण के लिए बेहतर माहौल बनाने के लिए सरकार ने सुविधाओं के दरवाजे खोल दिये है। बता दे कि तत्कालीन हरीश रावत सरकार ने उत्तराखंड में फिल्मों की शूटिंग को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तराखंड फिल्म नीति-2015 को लागू करने की घोषणा की थी। जिसका उद्देश्य स्थानीय और क्षेत्रीय कलाकारों के लिए रोजगार पैदा करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा फिल्म नीति में बंद पड़े सिनेमाघरों को फिर से खोलने और स्थानीय स्तर पर तैयार की गई फिल्मों और वृत्तचित्रों के व्यापक तौर पर प्रदर्शन के प्रावधान भी था। वर्तमान सरकार ने इस संशोधन के बाद फिल्म नीति में क्षेत्रीय फिल्म प्रमाणीकरण परिषद, फिल्म विकास निधि, फिल्मों के लिए वित्त पोषण, क्षेत्रीय फिल्मों का सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स में अनिवार्य प्रदर्शन जैसे कई खास कदमों को शामिल किया गया है। जल्द ही नियमावली तैयार की जा सकती है।

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बंद पड़े सिनेमाघर होंगे पुनर्जीवित

उत्तराखंड में पर्वतीय क्षेत्रों में बंद पड़े सिनेमाघरों को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार जीएसटी लागू होने की तिथि एक जुलाई 2017 से जमा किए गए एसजीएसटी की 30 फीसदी प्रतिपूर्ति करेगी।वही सिनेमा टिकटों पर एक रुपये प्रति टिकट की दर से फिल्म विकास निधि के रूप में सिनेमा मालिक दर्शकों से वसूलेंगे और इस राशि को कोषागार में जमा कराएंगे। फिल्म विकास निधि का उपयोग क्षेत्रीय फिल्मों, हिंदी भाषा और अन्य प्रदेशों की भाषा की फिल्मों को अनुदान उपलब्ध कराने में किया जाएगा। इसके अलावा फिल्म पुरस्कार, फिल्मों के लिए अवस्थापना सुविधाओं का विकास, फिल्मोत्सव, वजीफा आदि पर भी खर्च किया जाएगा। फिल्मों को प्रोत्साहन देने के लिए क्षेत्रीय फिल्म प्रमाणीकरण परिषद का गठन किया जाएगा। इसमें उत्तराखंड में निर्मित फिल्मों, खास तौर पर क्षेत्रीय भाषाओं में निर्मित फिल्मों के प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

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क्षेत्रीय फिल्म के एक सप्ताह तक दिखाना अनिवार्य

इसके अलावा उत्तराखंड की क्षेत्रीय फिल्मों का सेंसर सर्टिफिकेट मिलने के बाद प्रदेश के सभी सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स स्वामियों को क्षेत्रीय फिल्म को एक सप्ताह तक प्रतिदिन अनिवार्य रूप से व्यवसायिक शर्तों पर दिखाना होगा। फिल्म निर्माण से संबंधित कैमरा, क्रेन, जनरेटर, रिफलेक्टर आदि एसजीएसटी लागू होने की तिथि से पांच वर्ष तक जमा किए गए एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति संबंधित निर्माता को की जाएगी। वही जिन फिल्मों की 75 फीसदी शूटिंग या कुल आउटडोर शूटिंग दिवसों में आधे से अधिक शूटिंग उत्तराखंड में हुई हो, तो उन्हें गुण दोष के आधार पर एसजीएसटी लागू होने की तिथि से जमा किए गए एसजीएसटी के 30 फीसदी की प्रतिपूर्ति की जाएगी।

फिल्म की 75 फीसदी शूटिंग राज्य में किया जाना अनिवार्य

अलग-अलग स्थानों पर शूटिंग को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक अनुमति की औपचारिकताओं को सिंगल विंडो सिस्टम पर लाया जाएगा। इसमें ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था भी की जाएगी। सरकार पीपीपी मोड पर चयनित स्थलों पर आवासीय फिल्म कांप्लेक्स बनाएगी। इनमें उच्च आवासीय सुविधाओं के साथ ही तकनीकी स्टाफ के लिए भी आवासीय प्रबंध होंगे। फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट पूना और सत्यजीत राय फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट कोलकाता में प्रवेश लेने वाले राज्य के मूल निवासियों को प्रति वर्ष 25 हजार का अधिकतम वजीफी दिया जाएगा। फिल्म निर्माण के लिए अनुदान के संबंध में सरकार एक प्राथमिकता सूची तैयार करेगी। गुण-दोष के आधार पर अनुदान की व्यवस्था होगी। इसके लिए कुछ औपचारिकताएं निर्धारित की गई हैं। फिल्म की 75 फीसदी शूटिंग का राज्य में किया जाना अनिवार्य होगा।