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हल्द्वानी- यह है विजयदशमी के दिन शस्त्र पूजन का सही समय, इस विधि-विधान से करे पूजा-अर्चना

Dussehra Poojan, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है। सम्पूर्ण भारत में यह त्यौहार उत्साह और धार्मिक निष्ठा के साथ मनाया जाता है। विष्णु जी के अवतार के द्वारा अधर्मी रावण को मारे जाने की घटना को याद करते हुए हर साल यह त्यौहार मनाया जाता है। इस वर्ष दशहरा 8 अक्टूबर 2019 को मनाया जाएगा। इस विजयदशमी विजय मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 58 मिनट से लेकर 02 बजकर 43 मिनट तक का है। इस दौरान अपराजिता पूजा करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि विजय मुहूर्त के दौरान शुरु किए गए कार्य का फल सदैव शुभ होता है।

Dussehra poojan process

दशहरे पूजन का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि इस दिन श्री राम ने रावण को मारकर असत्य पर सत्य की जीत प्राप्त की थी, तभी से यह दिन विजयदशमी या दशहरे के रूप में प्रसिद्ध हो गया। दशहरे के दिन जगह-जगह रावण-कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले जलाए जाते हैं। देवी भागवत के अनुसार इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस को परास्त कर देवताओं को मुक्ति दिलाई थी इसलिए दशमी के दिन जगह-जगह देवी दुर्गा की मूर्तियों की विशेष पूजा की जाती है। पुराणों और शास्त्रों में दशहरे से जुड़ी कई अन्य कथाओं का वर्णन भी मिलता है। लेकिन सबका सार यही है कि यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। यह भी मान्यता है की नवरात्री के 9 दिनों को तीन गुणों से वर्गीकृत किया जाता है: तामस राजस और सत्त्व।

दशहरा पूजन विधि-विधान

दशहरे के दिन कई जगह अस्त्र पूजन किया जाता है। वैदिक हिन्दू रीति के अनुसार इस दिन श्रीराम के साथ ही लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का पूजन करना चाहिए। इस दिन सुबह घर के आंगन में गोबर के चार पिण्ड मण्डलाकर बनाएं। इन्हें श्री राम समेत उनके अनुजों की छवि मानना चाहिए। गोबर से बने हुए चार बर्तनों में भीगा हुआ धान और चांदी रखकर उसे वस्त्र से ढक दें। फिर उनकी गंध, पुष्प और द्रव्य आदि से पूजा करनी चाहिए। पूजा के पश्चात ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन करना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य वर्ष भर सुखी रहता है।

शस्त्र पूजन विधि

दशहरे के दिन शस्त्र पूजा के लिए सबसे पहले घर पर जितने भी शस्त्र हैं, उन पर पवित्र गंगाजल का छिड़काव करें। शस्त्रों को पवित्र करने के पश्चात् उन पर हल्दी या कुमकुम से टीका लगाएं और फल-फूल अर्पित करें। शस्त्र पूजा में शमी के पत्ते जरूर चढ़ाएं। दशहरे पर शमी के पेड़ की पूजा करने का विशेष महत्व होता है।

प्राचीनकाल से चली आ रही है परंपरा

सनातन परंपरा में शस्त्र और शास्त्र दोनों का बहुत महत्व है। शास्त्र की रक्षा और आत्मरक्षा के लिए धर्मसम्म्त तरीके से शस्त्र का प्रयोग होता रहा है। प्राचीनकाल में क्षत्रिय शत्रुओं पर विजय की कामना लिए इसी दिन का चुनाव युद्ध के लिए किया करते थे। पूर्व की भांति आज भी शस्त्र पूजन की परंपरा कायम है और देश की तमाम रियासतों और शासकीय शस्त्रागारों में आज भी शस्त्र पूजा बड़ी धूमधाम के साथ की जाती है।

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