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हल्द्वानी- प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार है भगत, पढिय़े कैसे बने राजनीति के सिक्सर किंग

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Haldwani News- एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष और मंत्रिमंडल के विस्तार की हलचल बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि 16 तक भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल जायेगा। साथ ही तीन मंत्रियों की ताजपोशी भी हो सकती है। मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर देहरादून से दिल्ली तक फोन घनघनाने लगे है। हैरानी की बात यह है कि भाजपा के तीन रिक्त पदों पर 40 से ज्यादा उम्मीदवार है। अब पार्टी के सामने बड़ा सवाल है कि वह तीन मंत्री कौन से चुने जाय जिन्हें मंत्रीमंडल में शामिल किया जा सकें। यह भी माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही मुख्यमंत्री कुछ मंत्रियों के महकमों में बदलाव भी कर सकते हैं।

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तीन साल पूरे होने से ठीक पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सार्वजनिक रूप से जल्द मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत दिए हैं। इसके बाद मंत्री पद के दावेदारों की उम्मीदों को एक बार फिर एक नई उम्मीद जगा दी है। मंत्री पद के दावेदारों में स्वाभाविक रूप से वे विधायक भी शामिल हैं, जो पूर्व में मंत्री रह चुके हैं। कुमाऊं से पूर्व कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत, बलंवत सिंह भौर्याल जबकि गढ़वाल से हरबंस कपूर, खजानदास का नाम शामिल है। लेकिन इन सब में मजबूत दावेदार कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत है। वह 6 बार विधायक बन चुके है।

बंशीधर भगत को मंत्री या फिर प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। ऐसे में कालाढूंगी में सियासी पारा चरम पर है। बंशीधर भगत 6 बार विधायक बन चुके है। विधायक बंशीधर भगत मानते है कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई से प्रेरित होकर राजनीति में कदम रखा। वर्ष 1975 में जनसंघ पार्टी से जुड़े। इसके बाद उन्होंने किसान संघर्ष समिति बनाकर राजनीति में प्रवेश किया। राम जन्म भूमि आंदोलन में वह 23 दिन अल्मोड़ा जेल में रहे। वर्ष 1989 में उन्होंने नैनीताल-ऊधमसिंह नगर के जिला अध्यक्ष का पद संभाला। वर्ष 1991 में वह पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा में नैनीताल से विधायक बने। फिर 1993 व 1996 में तीसरी बार नैनीताल के विधायक बने। इस दौरान उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में खाद्य एंव रसद राज्यमंत्री, पर्वतीय विकास मंत्री, वन राज्य मंत्री का कार्यभार संभाला। वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद वह उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री रहे। वर्ष 2007 में हल्द्वानी विधानसभा वह चौथी बार विधायक बने। उत्तराखंड सरकार में उन्हें वन और परिवहन मंत्री बनाया गया। इसके बाद 2012 में नवसर्जित कालाढूंगी विधानसभा से उन्होंने फिर विजय प्राप्त की। फिर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में छठीं जीत दर्ज की। वर्तमान मेें वह विधानसभा की प्रतिनिहित विधायन समिति के अध्यक्ष पर पर कार्य कर रहे है।

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