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हल्द्वानी-सात साल से 181 शवों के वारिस नहीं ढूढ़ पायी नैनीताल पुलिस, हवा-हवाई साबित हुआ हर कप्तान का दावा

हल्द्वानी-न्यूज टुडे नेटवर्क-पिछले पांच से सात सालों में नैनीताल जैसे शांत जिले में अपराधों की बाढ़ आयी है। एक के बाद एक वारदातों का पहाड़ की शांत वादियों में अंजाम दिया गया। भीमताम, सलड़ी, कालाढूंगी समेत कई जगह अपराधियों के कारण अशांत हो गये। अपराधियों ने शवों को ठिकाना लगाने का पहाड़ों को अपना अड्डा बना लिया है। जिन हत्याओं के खुलासे हुए उनमें से कई यूपी से हत्याकर शवों को नैनीताल जैसे शांत वादियों में फेंकने का मामला सामने आये। अब इस सप्ताह लगातार तीन शवों का मिलना एक बार फिर नैनीताल जैसे सुंदर पर्यटक स्थल पर धब्बा लगाने का काम कर रहा है। कालाढूंगी में महिला का शव, भीमताल के पास युवती का शव फिर उसके अगले दिन सलड़ी के पास हत्याकर का युवक को जिंदा कार में जलाना अपराधों में इजाफा कर रहा है। हर कप्तान ने घटनाओं के खुलासे की बात कही लेकिन वह सिर्फ हवा-हवाई साबित हुई।

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सात सालों में बढ़ गया अपराधों का ग्राफ

आंकड़ों की माने तो 2012 से 2018 के बीच नैनीताल जिले में कुल 281 शव बरामद हुए है। जिनमें से पुलिस सिर्फ 100 लोगों की शिनाख्त कर सकी। जिले में कई कप्तान आये कई गये लेकिन आज तक 181 लोगों की पहचान नहीं हो पायी। यह सिर्फ अज्ञात रहे। न ही अन्य जिलों और राज्यों में इनकी कोई पहचान हो पायी ऐसे में क्या ये सभी शव बाहरी राज्यों से लाकर यहां फेंके गये है या फिर लोग इन्हें पहचाने के लिए सामने नहीं आना चाहते। ये अपने आप में एक बड़ा सवाल है। हैरानी की बात यह है कि समय-समय पर जिले के कई कप्तान बदले एक के बाद एक कप्तानों ने जिले की कमान संभाली। लेकिन 181 शवों को कोई भी कप्तान पहचान नहीं दिला पाया। यहां तक की हल्द्वानी में हुए बड़े-बड़े हत्याकांडों का खुलासा करने में पुलिस नाकाम साबित हुई जो धीरे-धीरे फाइलों में बंद हो गई।

देशभर के थानों में भेजी जाती है रिपोर्ट- एसएसपी

इस मामले में एसएसपी सुनील कुमार मीणा का कहना है कि पुलिस ने देशभर के थानों में डीएसआरबी सॉफ्टवेयर के तहत मेल भेजी जाती है। जिसमें शव की फोटा और डिटेज होती है। साथ ही शवों की डीएनए रिपोर्ट भी रखी जाती है। अगर कोई शवों के परिचित या वारिस होने का दावा करता है तो उनका डीएनए मैच कर शव की शिनाख्त करायी जाताी है। इसके बाद पुलिस आगे की कार्यवाही करती है।

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