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हल्द्वानी-इसलिए रमेश पोखरियाल का नाम पड़ा था निशंक, जानिये केन्द्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल की पूरी जीवनी

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हल्द्वानी-लोकसभा चुनाव 2019 में हरिद्वार सीट से भाजपा के पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक ने मैदान मार लिया। इसके बाद रमेश पोखरियाल निशंक को केन्द्रीय मंत्री बनाया गया जिन्हें शिक्षा जैसा अहम विभाग दिया है। निशंक अपने कई खासियतों के कारण लोगों के दिलों में राज करते है। साहित्य में उनकी अधिक रूचि है। इसी कारण शिक्षण के साथ निशंक साहित्यिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। बात तब कि है जब डा. शंकर दयाल शर्मा उप राष्ट्रपति थे। उस समय उन्होंने निशंक की पहली पुस्तक समर्पण का लोकार्पण किया। कोटद्वार की साहित्यांचल संस्था ने वर्ष 1990 के आसपास निशंक उपनाम दिया।

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एक नजर  निशंक के राजनीति करियर पर-

नाम – डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’
पिता का नाम – स्वर्गीय श्री परमानन्द पोखरियाल
माता का नाम – स्वर्गीय श्रीमती बिश्वेस्वरी देवी
उम्र – 54 वर्ष
जन्मस्थान – ग्राम-पिनानी, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड।
राष्ट्रीयता – भारतीय
पता – 37/1 विजय कॉलोनी
रवीन्द्र नाथ टैगोर मार्ग
देहरादून। (उत्तराखण्ड) 248 001
दूरभाष – 0135 – 2530113, 2539899
धर्म – हिन्दू (ब्राह्मण)
सम्प्रति – विधानसभा सदस्य, डोईवाला क्षेत्र
कार्य क्षेत्र – साहित्य, सामाजिक कार्य, पत्रकारिता,
राजनीति और अन्य रचनात्मक कार्य

डॉ. ‘निशंक’ का राजनीतिक सफर:-

वर्ष उपलब्धि
1991, 1993 एवं 1996 कर्णप्रयाग विधानसभा सीट से लगातार तीन बार
विधायक निर्वाचित।
1997 उत्तर प्रदेश सरकार में पर्वतीय विकास विभाग के
कैबिनेट मंत्री रहे।
1998 उत्तर प्रदेश सरकार में संस्कृति, धर्मस्व और पूर्त
विभाग के कैबिनेट मंत्री रहे।
2000 नवगठित उत्तरांचल राज्य के प्रथम वित्त मंत्री के रूप
में पदभार संभाला। साथ ही ग्राम्य विकास, चिकित्सा
शिक्षा, पेयजल तथा राजस्व समेत 12 अन्य विभागों
पदभार ग्रहण किया।
2007 उत्तराखण्ड सरकार में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार
कल्याण, आयुष, विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग के
कैबिनेट मंत्री रहे।
जून 2009 से सितंबर 2011 उत्तराखण्ड के पाँचवें मुख्यमंत्री रहे
अक्टूबर 2011 भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त
मार्च 2012 उत्तराखण्ड की डोईवाला विधानसभा सीट से
विधायक निर्वाचित

डॉ. ‘निशंक’ का साहित्य सृजन

डा. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ मौलिक रूप से साहित्यिक विधा के व्यक्ति हैं। अब तक हिन्दी
साहित्य की तमाम विधाओं (कविता, उपन्यास, खण्ड काव्य, लघु कहानी, यात्रा साहित्य आदि) में प्रकाशित
उनकी कृतियों ने उन्हें हिन्दी साहित्य में सम्मानजनक स्थान दिलाया है। राष्ट्रवाद की भावना उनमें कूट-कूट
कर भरी हुई है। यही कारण है कि उनका नाम राष्ट्रकवियों की श्रेणी में शामिल है। यह डा. ‘निशंक’ के
साहित्य की प्रासंगिकता और मौलिकता है कि अब तक उनके साहित्य को विश्व की कई भाषाओं (जर्मन,
अंग्रेजी, फ्रैंच, तेलुगु, मलयालम, मराठी, स्पेनिश आदि) में अनूदित किया जा चुका है।
इसके अलावा उनके साहित्य को मद्रास, चेन्नई तथा हैंबर्ग विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल
किया गया है।
उनके साहित्य पर अब तक कई शिक्षाविद् (डा. श्यामधर तिवारी, डा. विनय डबराल, डा. नगेन्द्र,
डा. सविता मोहन, डा. नन्द किशोर और डॉ. सुधाकर तिवारी) शोध कार्य तथा पी.एचडी. रिपोर्ट लिख
चुके हैं। अब भी डा. ‘निशंक’ के साहित्य पर कई राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों (गढ़वाल
विश्वविद्यालय, कुमाऊं विश्वविद्यालय, सागर विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश, रोहेलखण्ड विश्वविद्यालय, मद्रास
विश्वविद्यालय, हैंबर्ग विश्वविद्यालय जर्मनी, लखनऊ विश्वविद्यालय तथा मेरठ विश्वविद्यालय) में शोध कार्य
जारी है। डा. ‘निशंक’ की प्रथम रचना कविता संग्रह समर्पण का प्रकाशन 1983 में हुआ था। तब से
अब तक उन्होंने पीछे मुडक़र नहीं देखा और आज भी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद उनका लेखन जारी
है।

अब तक डा. ‘निशंक’ की प्रकाशित कृतियां निम्न है:-

प्रकाशित कृतियां-
1- समर्पण (कविता संग्रह) 1983
2-नवांकुर (कविता संग्रह) 1984
3- मुझे विधाता बनना है (कविता संग्रह) 1985
4- तुम भी मेरे साथ चलो (कविता संग्रह) 1986
5- रोशनी की एक किरण (कहानी संग्रह) 1986
6- देश हम जलने न देंगे (कविता संग्रह) 1988
7- जीवन पथ में (कविता संग्रह) 1989
8- बस एक ही इच्छा (कहानी संग्रह) 1989
9- मातृभूमि के लिए (कविता संग्रह) 1992
10- क्या नहीं हो सकता (कहानी संग्रह) 1993
11- भीड़ साक्षी है (कहानी संग्रह) 1993
12- मेरे पत्र मेरी कथा
(शहीदों के पत्रों का संकलन) 1996
13- मेजर निराला (उपन्यास) 1997
14-पहाड़ से ऊंचा (उपन्यास) 2000
15-एक और कहानी (कहानी संग्रह) 2002
16- कोई मुश्किल नहीं (कविता संग्रह) 2003-4
17- मेरे संकल्प (कहानी संग्रह) 2005
18- प्रतीक्षा (लम्बी कविता) 2006
19- ए वतन तेरे लिए (कविता संग्रह) 2006
20- खड़े हुए प्रश्न (कहानी संग्रह) 2007
21- विपदा जीवित है (कहानी संग्रह) 2007
22- बीरा (उपन्यास) 2008
23- निशान्त (उपन्यास) 2008
24-संघर्ष जारी है (कविता संग्रह) 2009
25- धरती का स्वर्ग: उत्तराखण्ड (एक), 2009
हिमालय का महाकुम्भ: नन्दा देवी राजजात (पावन पारम्परिक यात्रा)
26- छूट गया पड़ाव (उपन्यास) 2010
27-टूटते दायरे (कहानी संग्रह) 2010
28- मील के पत्थर (कहानी संग्रह) 2010
29- अपना पराया (उपन्यास) 2010
30-धरती का स्वर्ग: उत्तराखण्ड (दो), 2010
स्पर्श गंगा: उत्तराखण्ड की पवित्र नदियां
31- पल्लवी (उपन्यास) 2010
32-आओ सीखें कहानियों से (बाल कहानियां- हिन्दी एवं अंग्रेजी) 2010
33- सफलता के मूल मंत्र (व्यक्तित्व विकास- हिन्दी एवं अंग्रेजी) 2010
34- प्रतिज्ञा (उपन्यास) 2011
35- परिश्रम पर विश्वास करें, भाग्य पर नहीं (व्यक्तित्व विकास) 2011
36- संसार कायरों के लिए नहीं (स्वामी विवेकानन्द का जीवन प्रबंधन) 2012

विभिन्न भाषाओं में अनूदित कृतियाँ:-

1- खड़े हुए प्रश्न (कहानी संग्रह) म्द ज्ञमसअपाान म्ददंइंजीपस (तमिल)
2-ऐ वतन तेरे लिए (कविता संग्रह) ज्ंलंदंकम न्दंाांक (तमिल)
3- ऐ वतन तेरे लिए (कविता संग्रह) श्रंदउंइीववउप (तेलुगु)
4-भीड़ साक्षी है (कहानी संग्रह) ज्ीम ब्तवूक ठमंते ॅपजदमेे (अंग्रेजी)
5- बस एक ही इच्छा (कहानी संग्रह) छनत म्पद ॅनदेबी (जर्मन)
6-खड़े हुए प्रश्न (कहानी संग्रह) च्तेंीदंदापज (मराठी)
7- खड़े हुए प्रश्न (कहानी संग्रह) म्ेचमतंदबमे म्ज टमतपजमे (फ्रैंच)
8- क्या नहीं हो सकता (कहानी संग्रह) ैंदहसम ैींालं ।ंीम (मराठी)
9- बस एक ही इच्छा (कहानी संग्रह) बस एक ही इच्छा (गढ़वाली)
10- तुम और मैं (कहानी संग्रह) क्न न्दक प्बी (जर्मन)

पुरस्कार और सम्मान

. भारत सरकार द्वारा ‘‘हिमालय का महाकुम्भ- नंदा राज जात’’ पुस्तक पर वर्ष 2008-09
का राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार।
. अंतर्राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, कोलम्बो द्वारा साहित्य के क्षेत्र में डी.लिट. की मानद उपाधि।
. ग्राफिक इरा, डीम्ड विश्वविद्यालय, उत्तराखण्ड द्वारा साहित्य के क्षेत्र में डी.लिट. की मानद
उपाधि।
. उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार द्वारा डी.लिट. की मानद उपाधि।
. गोपियो (ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन ऑफ पीपल ऑफ इंडियन ऑरिजन) संगठन द्वारा मॉरीशस में
अंतर्राष्ट्रीय असाधारण उपलब्धि सम्मान से सम्मानित।
. मॉरीशस सरकार द्वारा मॉरीशस सम्मान से सम्मानित।
. पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा साहित्य गौरव सम्मान।
. पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा साहित्य भारती सम्मान।
. सुप्रसिद्ध फिल्म निर्माता पद्मश्री रामानन्द सागर एवं मुंबई की विभिन्न साहित्य संस्थाओं द्वारा
साहित्यचेता सम्मान।
. भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा एवं श्री ज्ञानी जैल सिंह द्वारा राष्ट्रप्रेम
की कविताओं के लिए राष्ट्रपति भवन में सम्मानित।
. साहित्यिक कृतियों के लिए हैंबर्ग विश्वविद्यालय जर्मनी द्वारा सम्मानित।
. मॉरिशस सरकार द्वारा ‘स्पर्श गंगा’ पुस्तक को देश के विद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल करने
की घोषणा।
. हिन्दी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद (उ.प्र.) द्वारा विद्या वाचस्पति की उपाधि।
. नालंदा विद्यापीठ, बिहार द्वारा साहित्य वाचस्पति की उपाधि।
. असाधारण एवं उत्कृष्ट साहित्य सृजन हेतु श्रीलंका, हॉलैंड, नौर्वे, जर्मनी और मॉस्को में
सम्मानित।
. भारत गौरव सम्मान।
. हिन्दी गौरव सम्मान।
. साहित्य भूषण सम्मान।
. साहित्य मनीषि सम्मान।
. साहित्य में उत्कृष्ट योगदान हेतु डॉ. निशंक को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगभग
300 से अधिक संस्थाओं एवं संगठनों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

निशंक’ के साहित्य पर विद्वतजनों के अभिमत

‘‘डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, साहित्यिक विधाओं का बेजोड़ संगम हैं। उनकी कविताएं जहां एक ओर आमजन को
राष्ट्रीयता की भावना से जोड़ती हैं, वहीं उनकी कहानियां पाठकों को आम आदमी के दु:ख-दर्द व यथार्थता से परिचित कराती हैं।
मैं गर्व से कह सकता हूँ कि मैं भारत के एक ऐसे व्यक्ति से मिला हूँ, जो विलक्षण, उदार हृदय, विनम्र, राष्ट्रभक्त, प्रखर एवंसंवेदनशील साहित्यकार है।’’ सर अनिरुद्ध जगन्नाथ, महामहिम राष्ट्रपति, मॉरिशस गणराज्य
‘‘डॉ. ‘निशंक’ जैसे रचनात्मक एवं संवेदनशील साहित्यकार को सम्मानित करते हुए मैं गर्व का अनुभव कर रहा हूँ। डॉ.
निशंक द्वारा लिखी गई कहानियों को मैंने गंभीरता से पढ़ा। उनकी कहानियों में हिमालयी जीवन के दु:ख-दर्द एवं जीवट
परिस्थितियों का साक्षात प्रतिविम्ब देखा जा सकता है। -डा. नवीन रामगुलाम, मा. प्रधानमंत्री, मॉरिशस गणराज्य
‘‘राजनीति में अत्यंत व्यस्त होने के बावजूद निरंतर लेखन डॉ. निशंक की साहित्य प्रतिभा को दर्शाता है। उनका लेखन राष्ट्र और लोगों को आपस में जोड़ता है।’’ -पद्मश्री रस्किन बॉण्ड,विख्यात साहित्यकार‘‘डॉ. निशंक की रचनाओं में भारतीय संस्कृति के साक्षात दर्शन होते हैं। उनके साहित्य में एक आम आदमी के सुख-दु:खके साथ संस्कारों और भावनाओं का अच्छा मिश्रण है।’’ -प्रो. तात्यानिया ओरेंसकाया, विभागाध्यक्ष, एफरो एशियन इंस्टीट्यूट, जर्मनी।
‘‘डॉ. निशंक की रचनाएं पिछड़े और गरीब तबके की पीड़ा को सामने लाता है। जो समस्त विश्व के पिछड़े समाज के संघर्ष को प्रदर्शित करता है।’’ -डेविड फ्राउले, सुप्रसिद्ध अमेरिकी लेखक।
‘‘युवा साहित्यकार निशंक ने कम उम्र में राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत तमाम गीत और कविताएं रचकर राष्ट्र का सम्मान बढ़ाया है। मुझे इस बात की बेहद प्रसन्नता है कि ‘निशंक’ का हिंदी सेअथाह स्नेह है। एक पिछड़े क्षेत्र से होने के बावजूद मातृभूमि के लिए कुछ कर गुजरने की उनकी छटपटाहट पर मुझे गर्व है।’’
-श्री ज्ञानी जैल सिंह, भारत के तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति। (1984)
‘‘आज समाज व राष्ट्र के प्रति अर्पण भाव को जागृत करने वाली रचनाओं के सृजन की आवश्यकता है। ऐसे समय में गढ़वाल हिमालय के कवि रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ द्वारा मातृभूमि के लिए जैसी देशभक्ति से ओत-प्रोत रचनाओं से युक्त सुंदर पुस्तक की रचना प्रशंसनीय है। देशभक्ति से ओत-प्रोत गीत लिखकर डॉ0 निशंक ने जो बीड़ा उठाया है, वह राष्ट्र के लिए शुभ संकेत है।’’ -डॉ. शंकर दयाल शर्मा, भारत के तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति। (1992)
‘‘मैंने डॉ. निशंक की महान कृति ‘ए वतन तेरे लिए’ को पढ़ा, समझा और उनका मनन किया। मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि हिमालय से निकली ‘निशंक’ की गंगामयी काव्यधारा राष्ट्र के निर्माण में नींव का पत्थर बनेगी। डॉ. निशंक ने कवि के रूप में दैदीप्यमान सूर्य की तरह सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। उनकी अबाध साहित्यिक यात्रा हिन्दी की समृद्धि एवं श्रीवृद्धि में बड़ी भूमिका निभाएगी।’’ -डॉ0 एपीजे अब्दुल कलाम, भारत के तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति। (जून 2007)
‘‘डॉ. ‘निशंक’ साहित्य के क्षेत्र में लगातार संघर्षरत हैं, वह आम आदमी के बस की बात नहीं है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि वे अपनी लेखनी के जरिए देश के नीति नियंताओं के समक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर अनेक प्रश्न खड़े करते रहेंगे।’’-श्री अटल बिहारी वाजपेयी, भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री। (मई 2007) ‘‘डॉ. ‘निशंक’ राष्ट्रीयता के उदयीमान नक्षत्र हैं, जिन्होंने देशभक्ति से ओतप्रोत कई पुस्तकें लिखी हैं। इस धारा की निरंतरता एवं पवित्रता को बनाए रखने, राष्ट्रधर्म को बढ़ाने व उसके संवद्र्धन तथा संरक्षण की अत्यंत आवश्यकता है, जिसे डॉ. निशंक बखूबी कर रहे हैं।’’ -स्व0 भैरों सिंह शेखावत, भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति। (मई 2007) ‘‘निशंक की काव्यरचना की विशेषता यह है कि वे चरित्र, संघर्ष एवं परिश्रम को महत्व देते हैं। समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं अंधविश्वासों को साहित्य के माध्यम से दूर किया जा सकता है। ‘निशंक’ का साहित्य समाज को नई दिशा देता है।’’श्री सुदर्शन अग्रवाल, तत्कालीन महामहिम राज्यपाल, उत्तराखण्ड। (2007) ‘‘निशंक की रचनाओं में केवल शब्द छंद अथवा स्थापित प्रतिमानों की परवाह न करते हुए अपने मन की बात कहने की सामथ्र्य है। इन रचनाओं में राष्ट्रप्रेम कूट-कूट कर भरा है।’’ -पद्मश्री श्याम सिंह ‘शशि’

‘‘डॉ. निशंक अपनी राष्ट्रवंदनायुक्त कविताओं के माध्यम से जानमानस के दिलों में मातृभूमि के प्रति प्यार की ज्योति जला
रहे हैं।’’ -पद्मश्री विद्यानिवास मिश्र
‘‘निशंक की कहानी मुझे रेणु और लतिका जी के अंतिम दिनों की याद दिलाती हैं।’’
-श्री राजेन्द्र यादव, सम्पादक, हंस पत्रिका।
‘‘समर्पण एवं नवांकुर की कविताएं अत्यंत सुंदर हैं। सरल और सरस भाषा के माध्यम से कवि बहुत कुछ कह गया है।’’
श्री हरिवंशराय बच्चन, विख्यात साहित्यकार
‘‘निशंक के काव्य में राष्ट्रप्रेम का जो उल्लास है, वह प्राचीन भारतीय गौरव और आधुनिक भारतीय सांस्कृतिक-साहित्यिक
परिवेश के पारस से मिलकर कांचन हो उठता है।’’ -श्री त्रिलोचन शास्त्री, सुप्रसिद्ध साहित्यकार
‘‘डॉ. निशंक की रचनाएं आज के परिपेक्ष्य में प्रासंगिक हैं। अपनी देशप्रेम की रचनाओं से उन्हांने देश को गौरवान्वित किया
है।’’ -पद्मश्री श्री यशोधर मठपाल, प्रसिद्ध साहित्यकार
‘‘कवि निशंक की कविताओं में प्रकृतिवादी कवियों की तरह हर वस्तु के लिए भावातिरेक और भावावेग का प्रबल बाहुल्य
है।’’ -पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी
‘‘निशंक अपनी रचनाओं में हमेशा हिमालय की प्रशंसा करते हैं। हिमालय भारतवर्ष का हृदय है, जो सदैव ऊपर उठने की
प्रेरणा देता है।’’ -श्री गंगा प्रसाद विमल
‘‘निशंक राष्ट्रीय विचारधारा के कवि हैं, वे राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रनिर्माण के लिए कृतसंकल्प पीढ़ी तैयार करना चाहते हैं।’’
डॉ. विष्णु दत्त राकेश, प्रसिद्ध साहित्यकार एवं शिक्षाविद्
‘‘डॉ. निशंक की रचनाएं राष्ट्र की भावनात्मक एकता पर बल देती हैं।’’ -डॉ. नारायण दत्त पालीवाल
‘‘डॉ. निशंक ने सच ही कहा है कि आज का युवा भ्रमित हो रहा है और आवश्यकता इस बात की है कि उसमें देशप्रेम
की भावना जागृत की जाए। डॉ. निशंक की कविताएं सही दिशा में सही कदम हैं।’’
श्री रामकृष्ण त्रिवेदी, पूर्व महामहिम राज्यपाल, गुजरात।
‘‘मैं हमेशा से ही ‘निशंक’ की राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण कविताओं से प्रभावित रहा हूँ। मैंने उन्हें सदैव राष्ट्रकवि के रूप में
देखा है।’’ -पद्मश्री रामानन्द सागर, फिल्म निर्माता, निर्देशक।
‘‘ ‘निशंक’ की रचनाओं में बदलाव की इच्छाशक्ति है। उनके गीतों के हर शब्द में जीवन है। मेरी ऐसी रचनाओं को स्वर
और संगीत देने की प्रबल इच्छा है।’’ -पद्मश्री रवीन्द्र जैन, प्रख्यात संगीतकार।
‘‘शब्द कभी नहीं मरते। डॉ. निशंक के ये देशभक्तिपूर्ण गीत हमेशा के लिए लोगों की जुबां पर रहेंगे।’’
अमिताभ बच्चन, सदी के महानायक।
‘‘निशंक एक प्रतिभावान साहित्य चिंतक हैं। उनका साहित्य पाठकों को जीवन का लक्ष्य पाने तथा विपरीत परिस्थितियों से
बाहर निकलने को प्रेरित करता है।’’ -डॉ. एम. गोविंदराजन, सचिव भाषा संगम, चेन्नई।
‘‘डॉ. निशंक की कृतियां देशप्रेम से ओत-प्रोत हैं। इस प्रकार के साहित्य का देश के विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया
जाना चाहिए, ताकि सम्पूर्ण राष्ट्र में देशप्रेम की अविरल धारा बहती रहे।’’
डॉ. पी.जयरामन, अधिशासी निदेशक, भारतीय विद्याभवन, अमेरिका।
‘‘डॉ. निशंक के साहित्य का तमिल एवं तेलुगू भाषाओं में अनुवाद बेहरतरीन कार्य है। इससे एक ओर जहां दक्षिण में हिंदी
भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार को गति मिलेगी, वहीं जन-जन तक राष्ट्रप्रेम की भावना का भी प्रसार होगा।’’
डॉ. बाला शोअरी रेड्डी, तमिलनाडु हिन्दी अकादमी के अध्यक्ष।

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