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हल्द्वानी-नैनीताल से पाल का टिकट लगभग तथ्य!, इन सीटों पर फंसा कांग्रेस का पेंच

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हल्द्वानी-न्यूज टुडे नेटवर्क-लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद अब राजनीति पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों का नाम तय करने में लगी हुई। आज से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में अभी तक उत्तराखंड में भाजपा-कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। टिकट को लेकर सबसे ज्यादा कशमकश कांग्रेस पार्टी में दिखाई दे रही है। इस बार सबसे ज्यादा नैनीताल सीट पर लोगों की नजर है। नैनीताल सीट से नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश, पूर्व सीएम हरीश रावत और पूर्व सांसद महेन्द्र पाल सिंह के नाम चर्चाओं में है। लेकिन इसके बाद नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने बयान दिया कि वह टिकट की इच्छुक नही है। पार्टी जिसे टिकट दे सभी कार्यकर्ता उसके साथ खड़े है। लेकिन आज भी टिकट को लेकर लोगों में उत्सुकता देखने को मिली। फिलहाल अभी तक कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी तय नहीं किये है।

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अनुभव का मिल सकता है फायदा

सूत्रों की माने तो कांग्रेस ने अपने पांचों सीटों पर प्रत्याशी तय कर दिये है। अब सिर्फ घोषणा होने बाकि है। सूत्रों की माने तो नैनीताल सीट पर कांग्रेस ने महेन्द्र पाल का नाम तय किया है। जबकि अल्मोड़ा से प्रदीप टम्टा, हरिद्वार से पूर्व सीएम हरीश रावत, पौड़ी से मनीष खंडूरी को टिकट दिया है। वहीं टिहरी सीट से प्रीतम सिंह के चुनाव न लडऩे के फैसले से यहां किसी पुराने चेहरे को मैदान में उतारा जा सकता है। ये लिस्ट सोशल मीडिया पर भी छायी हुई है। सूत्रों की माने तो पूर्व सीएम हरीश रावत का नाम भ्ी नैनीताल सीट से चल रहा है। जिसके बाद सारे समीकरण बदल सकते है।

एक नजर पाल के राजनीति करियर पर

पूर्व सांसद केसी बाबा ने भी महेन्द्र पाल का नाम आगे बढ़ाया है। सूत्रों की माने तो नैनीताल सीट से महेन्द्र पाल का टिकट तय है। सूत्रों की माने तो प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष समेत पूर्व सीएम रहे एनडी तिवारी के समर्थक नेता इस सीट पर पूर्व सांसद डॉ. पाल की दावेदारी के समर्थन में तेजी से लामबंद हो रहे हैं, जबकि प्रदेश नेतृत्व की राय है कि पूर्व सीएम रावत हरिद्वार से लड़े, ताकि उस सीट पर भाजपा को पराजित किया जा सके। गौरतलब है कि महेन्द्र पाल वर्ष1989 से 1991 तक तथा फिर 2002-03 में नैनीताल संसदीय सीट पर पूर्व सीएम एनडी तिवारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद हुए उपचुनाव में जीते और सवा लाख से अधिक मतों से जीते। इसके बाद वर्ष 2004 में उनका टिकट काट दिया।राज्य सभा के लिए भी नाम चलाए लेकिन अंतिम क्षणों में नाम हटा दिया गया। महेन्द्र पाल को उम्मीद जताई है कि इस बार हाईकमान उन्हें जरूर टिकट देगा।