हल्द्वानी-एमबीए नेहा ने सिर पर पराद रख मॉडल जमाने को दिखाया ठेंगा, पहाड़ी रीति-रिवाजों की तस्वीरें हुई सोशल मीडिया पर वायरल

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हल्द्वानी-(जीवन राज)-पहाड़ों से पलायन कर दिल्ली, मुंबई, हल्द्वानी और बंगलुरू जैसे बड़े महानगरों में बसे पहाड़ के युवा अपनी संस्कृति और रीति-रिवाजों को जिंदा रखे हुए है। अपने सुरों से उत्तराखंड की संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने वाले लोकगायक सुनील कुमार दिल्ली में रहकर अपने रीति-रिवाजों को भी बचाने में जुटे है। पिछले साल उन्होंने दिल्ली में पिठयां रस्म निभाकर सबका दिल जीत लिया है। ऐसा पहली बार हुआ जब दिल्ली जैसे बड़े महानगर में आज का युवा पहाड़ के रीति-रिवाज निभाते हुए दिखा हो। अब विगत दिवस उनकी सगाई हुई तो उनकी जीवनसंगिनी बनने जा रही नेहा आर्या ने सिर पर पराद रख युवाओं के लिए रीति-रिवाज और संस्कृति से जुड़ी बड़ी मिशाल पेश की है।

Sunil kumar and Neha arya

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दो मार्च को सुनील और नेहा की सगाई धूमधाम से दिल्ली में मनाई गई। ऐसे में पहाड़ के रीति-रिवाज में देखने को मिले। अक्सर शादी से पहले पीतल की पराद का रिवाज आज भी पहाड़ के कई क्षेत्रों में जिंदा है लेकिन शहरों में बसे अधिकांश युवाओं ने आधुनिक रीति-रिवाजों से शादी का प्रचलन शुरू कर दिया है। पर सुनील और नेहा की जोड़ी ने पहाड़ी रीति-रिवाजों के साथ सगाई की रस्में निभाई है। एमबीए कर चुकी नेहा आर्या ने मॉडल युग में अपने सिर पर पराद रखने में कोई लज्जा नहीं दिखाई। बड़ी खुशी से पहाड़ की रीति-रिवाजों का पालन किया। दिल्ली से पहाड़ तक इस नई जोड़ी की खूब सराहना हो रही है।

Neha arya

सुनील एक कंपनी में स्टोर मैनेजर के पद पर कार्यरत है। जबकि नेहा एक कंपनी में कार्य कर रही है। सगाई रस्म के बाद लोकगायक सुनील कुमार ने अपने फेसबुक वाल में अपनी मंगेतर नेहा के साथ फोटो शेयर करते हुए पहाड़ी में एक शायरी लिखी।माछी पाणी जस हलौ हमर दगड़,कभै नि टूटौल त्यर म्यर ज्वड़ ! द्वि हिया एक होला द्वि आँखी चार सुवा,कभै दूर नि हूलौ सुवा ! जिसे लोगों ने लाइक किया और उन्हें सगाई की बधाई भी दी। एब कार फिर पिठयां रस्म के बाद सगाई की तस्वीरें वायरल होने से सुनील और नेहा जोड़ी सोशल मीडिया पर छा गई है।

neha and sunil mother

नेहा का परिवार अल्मोड़ा तो सुनील का परिवार रानीखेत का रहने वाला है। अपने बच्चों की शादी की रस्में पहाड़ी रीति-रिवाज से करने वाले परिजनों का कहना है कि हम खाना भूल सकते है पर अपने पहाड़ के रीति-रिवाज और संस्कृति नहीं भूल सकते। सुनील कुमार दिल्ली में रहने के बावजूद उत्तराखंड से बेहद प्यार करते है। अपनी गायकी से उन्होंने उत्तराखंड का दर्द बंया किया। लोकसभा चुनाव-2019 के दौरान आया गीत मतदाताओं को काफी भाया। लोगों ने उनके गीतों की जमकर तारीफ की। लोकगायक सुनील ने बताया कि बेशक हम रोजगार के लिए अन्य राज्यों में निवास कर रहे लेकिन अपनी संस्कृति और रीति-रिवाजों को कभी नहीं भूल सकते है जो सकून उत्तराखंड में है वो मजा दिल्ली में कहा। लेकिन रोजगार के लिए पहाड़ का युवा मजबूर है।

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