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हल्द्वानी-लोकल-वोकल पर बीटैक दंपती ने लगाये पंख, देश भर में छाये चकलुवा के इलेक्ट्रॉनिक झालर

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हल्द्वानी-प्रधानमंत्री के लोकल-वोकल पर दिये गये बयान के बाद देशभर में कई नये अविष्कार हुए है। लोगोंं ने लोकल-वोकल को लेकर अपनी बंजर जमीनों पर खेतीबाड़ी शुरू कर दी। आत्मनिर्भर बनने के लिए युवाओं ने पहाड़ से लेकर मैदान तक स्वरोजगार अपना लिया। ऐसे ही एक दंपती की सफल कहानी से हम आपको आज अवगत कराने जा रहे है। जिन्होंने 10 वर्ष पहले हस्तनिर्मित बिजली की झालरों का निर्माण शुरू किया था फिर धीरे-धीरे उन्हें पहचान मिली। आज देशभर से उनकी मालाओं की मांग आ रही है। साथ ही उन्होंने दर्जनों स्थानीय युवक-युवतियों को रोजगार भी दिया। इनकी सफलता की कहानी पढक़र आप भी कहेंगे ये हुआ था असली लोकल-वोकल।

लोगों को ऐसे भाये बिजली की माला

चीन से जिस तरह भारतीय सैनिकों पर हमला के बाद देशभर में चीन का विरोध हो रहा है। अब दिवाली का पर्व नजदीक है ऐसे में लोग चाइना के बिजली की मालाओं को विरोध कर रहे हंै। ऊपर से चाइना का माल भी बंद है। दुकानदारों लगातार लोकल-वोकल की मांग कर रहे। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मालाओं की मांग बढ़ रही है। कालाढूंगी के चकलुवा विदरामपुर में गणपति इलेक्ट्रो एंड पॉवर कंपनी द्वारा हस्तनिर्मित बिजली के मालाओं को निर्माण किया जा रहा है। जो लोगों को खूब भा रहे है। खास बात यह है कि इन मालाओं पर पूरे एक साल की वारंटी भी है। ऐसे में लोग अपने घर को रोशन करने के लिए इन्हें खरीद रहे है।

बीटैक है पंत दंपती

मूलरूप से पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट के रहने वाले चकलुवां निवासी युगल किशोर पंत ने बताया कि उन्होंने बीटैक किया है। उनकी पत्नी बीना पंत भी बीटेक है। पत्नी का सपना था कि वह कुछ ऐसा कार्य करें, जिससे गांव के बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिल सकें। काफी संघर्ष के बाद उन्होंने बिजली की माला बनाने की योजना बनाई। एक साधारण परिवार से होने के नाते यहां आर्थिक संकट उनके सामने आया। वर्ष 2015 में बीना पंत ने अपने गहने बेचकर बिजली की माला बनाने का काम शुरू किया। जिसमें उन्होंने कुछ युवाओं को अपने साथ जोड़ा। लेकिन कुशल कारीगर न होने के चलते उनके कारोबार को बड़ा झटका लगा।

lite mala

लोगों ने काम का उड़ाया मजाक

युगल किशोर पंत ने बताया कि कई लोगों ने उनके काम का मजाक तक बना डाला कि आज चाइनिज का जमाना है। कौन आपकी माला खरीदेगा। लेकिन पंत दंपति ने हार नहीं मानी। एक बार फिर अपने सपने पूरे करने की योजना बनाई। साथ ही जो कार्य उन्होंने शुरू में किया था उसमें सुधार भी किया। इस बार लोन के लिए बैंकों के चक्कर काटे। कालाढूंगी क्षेत्र से उन्हें किसी भी बैंक ने लोन नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने हल्द्वानी में स्थित इलाहाबाद बैंक के मैनेजर से बात की तो उन्होंने लोन देने के लिए हामी भर दी तो उनके चेहरे पर मुस्कान लौट आयी।

एक दर्जन युवाओं को मिला रोजगार

इसके बाद उन्होंने गणपति इलेक्ट्रो एंड पॉवर नाम से अपनी एक कंपनी तैयार की। जिसमें पहली बार उन्होंने 1500 बिजली की स्वदेशी मालाएं तैयार की। इन्हें बाजार में उतारा तो मांग और बढ़ गई। वर्ष 2018 में उन्होंने ग्राहकों की डिमांड पूरी करने की योजना बनाई लेकिन फिर भी एक दिन में 500 मालाएं ही तैयार कर सकें। उन्होंने क्षेत्री युवाओं को अपने वहां रोजगार दिया जिससे उन्हें बाहर न भटकना पड़े। कालाढूंगी, गुलजारपुर, रामपुर, विदरामपुर, चकलुआ क्षेत्र के कई युवक-युवतियों को रोजगार मिला है। पंत दंपति ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वदेशी अपनाने पर जोर देना और गांव के लोगों को रोजगार देना है। उन्होंने बताया कि वह भविष्य में माला बनाने की एक बड़ी फैक्ट्री लगाना चाहते है जिससे क्षेत्र के अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार मिल सकें। पूरे उत्तराखंड से उनके पास मालाओं की डिमांड आ रही है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा बहुत जल्द वार्षिक इलेक्ट्रॉनिक कैलेंडर भी बनाने की योजना है।

 

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