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हल्द्वानी-बड़े-बड़े दिग्गजों को धूल चटा गई नैनीताल लोक सभा सीट, जानिये क्या है इस सीट का इतिहास

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हल्द्वानी-न्यूज टुडे नेटवर्क-लोकसभा चुनाव की तैयारी पूरे देश में हो चुकी है। राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में है। ऐसे में इस बार उत्तराखंड में सबसे हॉट सीट नैनीताल सीट मानी जा रही है। ये से कई बड़े नेता चुनावी मैदान में कूदे है। राजनीतिक पार्टियों की जीत-हार के साथ इस सीट ने कई रिकॉर्ड भी बनाये है। वही कई दिग्गजों को इस सीट से मुंह की खानी पड़ी है। ऐसे में इस बार का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। लगभग तीन दशक तक सीट भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत के परिवार को झोली में रही। कभी इस सीट में रानीखेत और बहेड़ी भी शामिल था लेकिन इसके बाद इन्हें हटा दिया गया। अब ऊधमसिंह नगर और नैनीताल इस सीट के अंदर आते है।

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तीन बार एनडी तो तीन बार पंत जीते

वर्ष 1951 सीडी पांडे कांग्रेस से विजयी रहे। इसके बाद 1957 में भी सीडी पांडे को ही इस सीट पर विजयी मिली। वर्ष 1962 में कांग्रेस के केसी पंत पहली सफलता मिली इसके बाद 1967-71 के चुनाव में भी केसी पंत ने जीत हासिल की। वर्ष 1977 भारत भूषण (भालोद) विजयी रहे। वर्ष 1980 एनडी तिवारी कांग्रेस से विजयी हुए। वर्ष 1984 सत्येंद्र गुडिय़ा कांग्रेस से जीते, 1989 डा. महेंद्र पाल जनता दल से जीते, 1991 बलराज पासी भाजपा से जीते, इसके बाद एक बार फिर 1996 एडी तिवारी कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में विजयी हुए। 1998 इला पंत भाजपा से जीते, फिर 1999 एनडी तिवारी को सफलता मिली, उप चुनाव 2002 डा. महेंद्र पाल कांग्रेस से जीते, 2004 केसी बाबा कांग्रेस, 2009 केसी बाबा जीते, वर्ष 2014 में भाजपा के भगत सिंंह कोश्यारी को जीत मिली।

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पीएम पद के उम्मीदवार होते हुए हारे थे एनडी

वर्ष 1962 से 67 – 71 में पंत के पुत्र केसी पंत ने इस सीट को हैट्रिक बनाते हुए कांग्रेस की झोली में डाला था। लेकिन 1977 में लोकसभा चुनाव में भारतीय लोक दल के भारत भूषण ने जीत दर्ज कर पंत परिवार के अरमानों पर पानी फेर दिया। फिर इस सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी सवार हुए। उन्होंने 1980 में भालोद के भारत भूषण को पराजित किया था। वही वर्ष 1991 में कांग्रेस में पीएम पद के दावेदार रहे पंडित तिवारी को इस सीट से हार का मुंह देखना पड़ा था। राम लहर के चलते उन्हें भाजपा के बलराज पासी ने शिकस्त दी थी। इसके बाद वर्ष 1998 में भाजपा की इला पंत ने भी एनडी तिवारी को हरा दिया।