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हल्द्वानी-काली खांसी से कैसे पाये छुटकारा, जानिये चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. एनएसी पाण्डेय से

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हल्द्वानी-साहस होम्योपैथिक के चिकित्सक डॉ. एनएसी पाण्डेय हर बार एक नई बीमारी को लेकर अपने यू-ट्यूब चैनल के माध्यम से लोगों को उपचार के बारे में जानकारी देते है। इस क्रम में डॉ. एनएसी पाण्डेय ने बताया कि कुकुरी या कुक्कुर या काली खांसी अंग्रेजी में व्हूपिंग कफ, एक जीवाणु के संक्रमण द्वारा होता है।

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वैसे यह किसी भी उम्र के व्यक्तिको हो सकता है परंतु अधिकतर यहां 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों की स्वास प्रणाली को प्रभावित करता है। जब भी इस रोग से पीडि़त रोगी खांसते हैं, तो उस समय भौंकने जैसी आवाज आती है। इसलिए इसका नाम कुकुर खांसी पड़ा। यह परटूसिस नामक जीवाणु के कारण होता है और जब भी किसी संक्रमण व्यक्ति द्वारा खांसा या छींका जाता है तो स्वस्थ व्यक्ति पर इन जीवाणुओं का संक्रमण फैल जाता है।

जानिये क्या है इसके लक्षण-

साधारणत: शुरुआत सर्दी जुखाम गले में दर्द के साथ होती है, बुखार आना, खांसी के साथ म्यूकस निकलना। अधिकतर रात के समय इसका प्रकोप बढ़ता है, खांसी का दौरा जैसा पडऩा, खासते-खासते रोगी को उल्टी तक हो जाना। थकान महसूस होना। सास बंद हो जाना, गले की नसें फूल जाना, आंख से पानी बहना आदि लक्षण प्रकट हो प्रकट होते हैं। साथ ही कुकुरी खासी परटूसिस के संक्रमण से होती है, अधिक सर्दी लगने पर, पानी में अधिक भीगने के कारण, कुछ केस में मूंगफली, अखरोट, मेवा घी आदि चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थ खाते है, जिस कारण खांसी होने का खतरा बढ़ जाता है।

आप योग्य चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवा लेते हैं। तब होम्यौपैथिक दवाएं निश्चित मात्रा में लेने पर शरीर पर बिना विपरीत प्रभाव, प्रकर्ति से साथ मिलकर रोगों से उपचार की प्राचीन, विश्वसनीय और प्रभावी चिकित्सा प्रणाली हैं। विपरीत प्रभाव वायु, जल और भोजन आदि का होता हैं, अगर आप सही मात्रा में, सही समय पर, शरीर के अनुकूल, बिना आवश्यक गुणवत्ता के ग्रहण कर करते हैं। इसलिए दवा लेने में भी सावधानी रखें।