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हल्द्वानी-शासन तक पहुंचा स्कूल की खाम भूमि करोड़ों में बेचने का मामला, हल्द्वानी के इन धन्नासेठों ने खरीदी है भूमि

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हल्द्वानी-न्यूज टुडे नेटवर्क- रोडवेज बस स्टेशन के सामने मिशन स्कूल की भूमि बेचने का मामला शासन तक पहुंच गया। बताया जा रहा है कि खाम भूमि की रजिस्ट्री रद्द की जायेगी। इस जमीन की रजिस्ट्री खारिज कराने के लिए तहसीलदार ने डीएम को पत्र भेजा है। कहा है कि खाम भूमि की रजिस्ट्री कराने वाले तीनों खरीदारों का दाखिल खारिज नहीं होगा। मिशन स्कूल की यह जमनी करीब सवा करोड़ में बेची गई। जिसके बाद जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन ने मिशन स्कूल की खाम जमीन बेचने पर स्पेशल जांच बिठा दी है। मिशन स्कूल की खाम भूमि से संबंधित प्रकरण शासन के समक्ष भी विचाराधीन है। सूत्रों की माने तो तीनों रसूखदार लोग खाम भूमि को नजूल भूमि में परिवर्तित कराने की जुगत में लगे हैं। मगर राजस्व अधिनियमों के मुताबिक सरकार खाम की जमीन सरकारी कार्यों के लिए ही दे सकती है।

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तहसीलदार ने डीएम को भेजा पत्र

गौरतलब है कि मिशन स्कूल के प्रबंधक डीसी हैरिस ने बीती अक्टूबर 2018 में हल्द्वानी के तीन बड़े धन्नसेठोंं को स्कूल की करीब एक बीघा जमीन बेच दी थी। मामले में राजस्व न्यायालय ने 27 फरवरी को संबंधित पक्षों को अभिलेख समेत पेशी पर बुलाया था। लेकिन राजस्व न्यायालय में कोई पेश नही हुआ तो तहसीलदार प्रहलाद राम ने डीएम को पत्र भेजकर सिविल न्यायालय के जरिए जमीन की रजिस्ट्री खारिज करने की अपील की है। कहा कि तीनों खरीदारों की जमीन का दाखिल-खारिज राजस्व न्यायालय में किसी सूरत में नहीं होगा। वह 5 मार्च को सिविल जज को स्कूल भूमि की रजिस्ट्री खारिज करने के लिए जिलाधिकारी के जरिए सिविल जज को पत्र भेजेंगे। इस संबंध में सिविल न्यायालय में वाद चलेगा। सरकार की ओर से सिविल न्यायालय में वाद सुनवाई को भेजा जाएगा। सिविल न्यायालय के निर्णय के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जमीन अभिलेखों में खाम लैंड के तौर पर है दर्ज

बता दें कि रोडवेज स्टेशन के सामने स्थित मिशन स्कूल की जमीन अभिलेखों में खाम लैंड के तौर पर दर्ज है। राजस्व अधिनियमों के तहत राज्य सरकार की अनुमति बिना खाम भूमि की खरीद-बिक्री नहीं हो सकती। हालांकि सरकार चाहे तो इसे सरकारी संस्थान के रूप में इस्तेमाल की इजाजत दे सकती है। लेकिन स्कूल प्रबंधक सखावत गंज मल्ला गोरखपुर निवासी डीसी हैरिस ने खाम लैंड बिक्री या लैंड यूज चेंज नहीं हो सकने के बावजूद स्मिता सिंघल व प्रवीण कुमार सिंघल और राकेश कुमार अग्रवाल को बेच दी। ललित मोहन सिंह नेगी द्वारा आरटीआई लगाने के बाद इस मामले खुलासा हुआ । हालांकि इस मामले में हमने भूमि से जुड़े लोगों से उनका पक्ष जानने के लिए बात करनी चाही लेकिन उनका फोन नहीं लगा।