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हल्द्वानी- परीक्षा को लेकर बच्चों पर न बनाये दबाव, मनोचिकित्सक डा.नेहा शर्मा को दी अभिभावकों ने ये राय

हल्द्वानी-न्यूज टुडे नेटवर्क- आगामी मार्च की पहली तारीख से ही बोर्ड की परीक्षाएं शुरु हो रही है। कई परीक्षार्थियों को परीक्षा के बारे में सोचकर ही बेचैनी महसूस होने लगती है। जब परीक्षाएं सिर पर हों तो दबाव बनना स्वाभाविक हैं, विद्यार्थियों के मन में परीक्षा की चिंता हमेशा रहती है, वे और गंभीर हो जाते हैं। इससे कई बार बच्चे मानसिक रोग के शिकार हो जाते है। यह बात मनसा क्लीनिक की विशेषज्ञ डा. नेहा शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि परीक्षा के चलते बच्चे टेंशन में आ जाते है। इसलिए अभिभावक बच्चों पर विशेष ध्यान दे कि बच्चा कब और कैसे पढ़ाई कर रहा है। उस पर पढ़ाई के लेकर प्रेशर न बनाये इससे बच्चे टेंशन में आ जाते है। जो धीरे-धीरे मानसिक रोग का कारण भी बन सकता है। आप मनसा क्लीनिक में इस बीमारी का इलाज करा सकते है। मनसा में साइकाथैरेपी व काउंसलिंग करा सकते है। डा. नेहा शर्मा ने बताया कि इस तरह के केस व ओपीडी में साइकालॉजिकल टे्रटमेंट से ठीक कर रही है।

केस नंबर एक- बोर्ड परीक्षा चिंता

राहुल बिष्ट उम्र 17 वर्ष 12वीं की परीक्षाजनित चिंता से ग्रसित था, वो 10वीं उत्तराखंड बोर्ड में 90 प्रतिशत अंक प्राप्त कर चुके है अब वह 12वीं बोर्ड के परीक्षा देने वाला है। पर उसको अपने अंकों की चिंता है व उसे इस बात की भी चिंता है कि कही मेरे अंक 12वीं में 10वीं के अपेक्षा कम न आये। अच्छे अंकों का दबाव उसकी चिंता का करण है। बोर्ड परीक्षा की चिंता के कारण राहुल की घबराहट, बेचैनी, धडक़न बढऩा, नींद न आना, पढ़ाई में मन लगन, पसीना आना,उदास, अंकों को लेकर सोचना आदि तनाव लक्षणों की समस्या को लेकर राहुल कांउसलिंग के लिए आया। राहुल रामनगर के रहने वाले है।

केस नंबर दो- अंकों को लेकर माता-पिता का दबाव

आभा वर्मा उम्र 15वर्ष सीबीएसई कक्षा10 की काशीपुर की छात्रा है। जो कि मेरे पास गुमसुम, अकेले बैठना, हीनता की भावना, सिर में दर्द, नींद कम आना, पढऩे का सुर लगना, ज्यादा सोचना आदि समस्याओं से ग्रसित है। आभा ने बताया कि उसके माता-पिता हर वक्त उसे अच्छे नम्बरों के लिए कहते है कि टीवी देखना बंद, कही भी बाहर जाना बंद कर दिया है। इसलिए वह चुपचाप रहती है। उसका मन पढ़ाई में नहीं लगता व मल उदास होता जा रहा है कि बोर्ड में अच्छे अंक लाने है। जिससे वह तनाव में ही पढ़ाई कर रही है।

अभिभावकों के लिए-

डॉ नेहा शर्मा (क्लिनिकल सांइक्लोजिस्ट मनसा क्लीनिक) का कहना है कि माता-पिता को परीक्षा के दौरान बच्चों पर पढ़ाई को लेकर ज्यादा दबाव नहीं देना चाहिए। किसी भी तरह का दबाव बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। बच्चों को परीक्षा के समय तनाव से दूर करने के लिए उनका ध्यान सकारात्मक व सृजानात्मक कार्यों पर लगाये। बच्चों पर अनुशासन बनाने पर किसी भी तरह का दबाव न डाले व बच्चों से खुलकर बात करें। बच्चों को प्रोत्साहित करे। माता-पिता बच्चों पर भरोसा जताये। बच्चे में परीक्षा का डर व आत्मविश्वास की कमी दिखने पर मनोवैज्ञानिक कांउसलिंग कराये।

शिक्षकों पर भी है जिम्मेदारी- डा. नेहा शर्मा ने बताया कि छात्र-छात्राओं को तनावमुक्त करने की जिम्मेदारी शिक्षकों की भी बनती है। शिक्षक माता-पिता से लगातार संपर्क बनाये रखें। यह ध्यान रखें कि केवल बच्चा ही परीक्षा देने नहीं जा रहा है बल्कि उसके साथ ही माता-पिता तथा शिक्षकों की भी परीक्षा है। इस दौरान बच्चों में आत्मविश्वास को बढ़ाना शिक्षकों की जिम्मेदारी है।

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