हल्द्वानी-दिव्यांगों के सपनों को हकीकत में बदल रहा नैनी-वैली स्कूल, ऐसे दे रहा निशुल्क शिक्षा

हल्द्वानी-न्यूज टुडे नेटवर्क-नैनीताल रोड स्थित नैनी-वैली दिव्यांगों के सपनों को पंख लगाने में जुटा है जिससे वह अपने को सामान्य बच्चों से अलग न समझे। नैनी-वैली स्कूल दिव्यांगों और आरटीई के तहत पढऩे वाले बच्चों के सपनों में शिक्षा के माध्यम से रोशनी भर रहा है। इस कार्य के लिए स्कूल की हर कोई वाहवाही कर रहा है। आज हर किसी की जुबां पर नैनी-वैली का नाम है। वही स्कूल के इस कदम ने दिव्यांगों और आरटीई के तहत पढऩे वाले बच्चों में एक नया जोश भरा है। जिससे उनके अंदर की दबी आवाज और सपने सच होते नजर आ रहे है। सातवीं कक्षा के छात्र हिमांशु गुप्ता ने इस बार प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है। 94 प्रतिशत अंक पाकर हिमांशु ने नैनी-वैली ही नहीं अपने माता-पिता का नाम भी रोशन कर दिया। हिमांशु गुप्ता नैनी-वैली का आरटीई के तहत पढऩे वाले छात्र है लेकिन पढ़ाई से उन्होंने अपना लोहा मनवाया है। पिता चिंतामणि गुप्ता पुत्र की इस सफलता से गदगद है।

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दिव्यांगों में छिपी है प्रतिभा-प्रधानाचार्य

स्कूल की प्रधानाचार्य संगीता गोयल ने बताया कि नैनी-वैली आरटीई के तहत पढऩे वाले बच्चों के अलावा दिव्यांगों को शिक्षा निशुल्क दे रहा है। स्कूल यह कार्य आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत कर रहा है। सातवीं क्लास के छात्र हिमांशु ने जिंदगी में कभी हार नहीं मानी, पढ़ाई में ईमानदारी से मेहनत की और अपने अंदर छिपे कौशल को निखारा। नैनी-वैली में नौ दिव्यांग छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वही दसवीं में पढऩे वाली ज्योति में पढ़ाई के साथ सिङ्क्षगग का बेहतरीन हुनर है। ब्रेल लिपि के माध्यम से स्कूल दिव्यांगों को शिक्षा दे रहा है। ब्रेल सिस्टम एक तरह की लिपि है, जिसको दुनिया भर में नेत्रहीनों को पढऩे और लिखने में छूकर व्यवहार में लाया जाता है। यह अलग-अलग अक्षरों, संख्याओं और विराम चिन्हों को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों में एक से बढक़र एक प्रतिभाएं छिपी है बस उन्हें राह दिखाने की जरूरत है।

स्क्राइब द्वारा बच्चों को आगे बढऩे का मौका

स्क्राइब द्वारा बच्चों को आगे बढऩे का मौका
नैनी-वैली में दिव्यांगों और आरटीई के तहत पढऩे वाले बच्चों के सपनों को हर तरह से साकार करने का प्रयास किया जा रहा है। स्कूल स्क्राइब विधि के माध्यम से दिव्यांग बच्चों को आगे बढ़ाने में जुटा है। यह विधि 10 वीं कक्षा से शुरू की गई है। इस पर जानकारी देते हुए प्रिसिपल संगीता गोयल ने बताया कि दिव्यांग बच्चे के एक साथी परीक्षा के समय उपलब्ध कराया जाता है। वह 9वीं कक्षा का छात्र होता है दिव्यांग बोलकर उसे बतायेगा और वह छात्र लिखने का कार्य करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को 10 वीं से ऊपर की शिक्षा ग्रहण कराना है। जिसे नैनी-वैली स्कूल बखूबी निभा रहा है। उन्होंने बताया कि अधिकांश दिव्यांग बच्चे 8वीं या 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते है ऐसे बच्चों को 12वीं तक की शिक्षा दिलाना उनका लक्ष्य है। जिससे उनका भविष्य संवर सकें और वह अपनी आजीविका के लिए रोजगार कर सके।

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