हल्द्वानी-(रीति-रिवाज) पहाड़ों में आज हर घर की देहली फूलों से सज गई, शहरों में रहकर कही भूले तो नहीं आप

हल्द्वानी-न्यूज टुडे नेटवर्क-(जीवन राज)-अक्सर शहर में लोग एक-दूसरे के खाली प्लॉटों या फिर घरों के बाहर कूड़ा फेंक देते है। लेकिन ठीक इसके उलट उत्तराखंड में मनाया जाना वाले त्योहार में होता है। जहंा बच्चें हर घर में जाकर देहली पर फूल डालते है। इसके बदले में उस घर के लोग बच्चों को गुड़, पैसे या फिर चावल देते है। ये परम्परा वर्षों से पहाड़ में चली आ रही है। ऐसा ही आज भी हुआ। हर साल की तरह बच्चे आये और घरों की देहली पर फूल डालने लगे, लोगों ने उन्हें गुड़, चावल और पैसे दिये साथ ही आशीर्वाद भी दिया। बच्चे खुशी-खुशी दूसरे घर की ओर बढ़ है। यें पल बचपन की यादों को ताजा कर देता है। याद है ना आज उत्तराखंड का प्रसिद्ध त्योहार फूलदेही है। आज भी गांव में बच्चे फूलदेही का त्योहार खेलते है। हालांकि पलायन के चलते कई गांव खाली हो चुके है फिर भी शहर में बसे कई लोगों ने पहाड़ की संस्कृति से अपने बच्चों को जोड़ा है। हल्द्वानी में भी कई जगहों पर बच्चों ने फूलदेही खेली।

प्रेरणा देता है फूलदेही का त्योहार

चैत्र माह में उत्तराखंड के गांव-कस्बों में मनाया जाने वाले फूलदेही त्योहार अपने आप एक अलग संदेश देता है। जो अपने घर सजाने के साथ-साथ दूसरे के घरों को सजाने की प्रेरणा भी देता है। यह काम गांव के छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में होता है जो एक थाली या टोकरी में बुरांश के फूल, सरसों, टेसू, और बासिंहग के सफेद-लाल, पीले रंग के फूलों को मिलाकर घर-घर पहुंचते है। इस दौरान एक गाना भी गाया जाता है जिसके बोल है-

फूूलदेई, छम्मा देई जतुकै देला
उतुकै सही दैणी द्वार,
देणी द्वार, भर भकार,
ये देली स बारम्बार नमस्कार,
फूले द्वार फूल देई-छम्मा देई
जिसका अर्थ है देहली फूलों से भरपूर और मंगलकारी हो। देहली, क्षमाशील अर्थात सबकी रक्षा करे। देहली, घर व समय सबके लिए दांया अर्थात सफल हो और सबके घरों में अन्न का पूर्ण भंडार हो । इसके अलावा फूलदेही पर आधारित गीत सलमान खान की फिल्म ट्यूबलाइट में भी गाया गया है।