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हल्द्वानी- (अलविदा -2018) ऐजा रे चैत बैशाखा मेरो मुनस्यारा और सदा के लिए अमर हो गया यह लोकगायक

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हल्द्वानी- न्यूज टुडे नेटवर्क- (जीवन राज)- यह साल उत्तराखंड के इतिहास में कई खट्टे-मीठे पल छोड़ गया। वही कई लोगों को सफलता की सीढिय़ों पर भी चढ़ा गया। लेकिन इन सब के बीच जो एक नाम था लोकगायक पप्पू कार्की का। पप्पू कार्की मरकर भी अमर हो गये। उनके गीत सदा लोगों के कांनों में गूंजते रहेंगे। उत्तराखंडी संगीत जगत में अमर लोकगायक पप्पू कार्की एक बना नाम थे। जिन्होंने अपनी गायकी के दम पर प्रदेश ही नहीं देश के कई राज्यों और विदेशों में धूम मचा दी। लेकिन भगवान के आगे किसी की नहीं चलती यही हुआ अमर लोकगायक पप्पू कार्की के साथ। 9 जून 2018 को एक सडक़ हादसे में उनकी मौत हो गई। उनके जाने से उत्तराखंड की गायकी को एक बड़ा झटका लगा। लेकिन उनकी वो मधुर आवाज आज भी लोगों के दिलों दिमाग में है और सदा रहेंगी।

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दो लाख से ऊपर हुए चैनल के सब्सक्राइबर

अमर लोकगायक पप्पू कार्की का ऐजा रे चैत बैशाखा मेरो मुनस्यारा गीत उनके पहाड़ के प्रति दर्द को बयां करता है। पहाड़ के बढ़ते पलायन को लेकर लिखा गया यह गीत हमारी संस्कृति, रीति-रिवाजों की याद दिलाता है। पप्पू कार्की ने उत्तराखंडी संगीत को एक नये मुकाम पर पहुंचाया। उनकी इच्छा थी कि पहाड़ के गायकों को गाने रिकॉर्ड करने दिल्ली जाना पड़ता है इसकी को देखते हुए उन्होंने हल्द्वानी में अपना स्टूडियों खोला। आज वह कई युवा गायकों के अदर्श बन चुके है। उनके लाली ओ लाली हौसिया, पारा भीड़े की बंसती छोड़ी, ओ हीरा समदणी, सुन रे दगडिय़ा, ऐजा मुनस्यारी लैना, चंपावत की रजनी बाना, मधुली, छम-छमा बाजली हो, उतरैणी कौतिक लागी रौ समेत कई गीतों ने उत्तराखंड ही नहीं विदेशों में भी धूम मचाई। कार्की के निधन के बाद उनके पुत्र दक्ष ने उनकी याद में सुन दगडिय़ा गीत गाकर उनकी यादें ताजा कर दी। दक्ष की गाने ने पीके स्टूडियो को सिल्वर बटन भी दिला दिया। वही अब पीके स्टूडियों चैनल के दो लाख से ऊपर सब्सक्राइबर हो चुके है।

कल रिलीज होगा कार्की का अधूरा गीत सुन की थाली

अमर लोकगायक पप्पू कार्की का अधूरा गीत सुन की थाली नये साल यानी कल पहली जनवरी को रिलीज होगा। पप्पू कार्की इस गाने को तैयार कर रहे थे लेकिन यह गाना आधे में छूट गया। कार्की ने इस गाने को आज के युवाओं के हिसाब से तैयार किया था। यह गाना पहले लोकगायक प्रकाश रावत जी ने गाया है। लेकिन इसके बाद इस गाने के मुखड़े पप्पू कार्की ने उठाकर एक नये रूप में तैयार करने को सोचा था लेकिन वह इस गाने को आधा ही लिख पाये बाकि का आधा गीत उनके दोस्त और करीबी रहे संदीप सोनू ने लिखा। इसके बाद सभी की सहमति पर सोनू ने यह गाना रिकॉर्ड किया जो नये साल में रिलीज होगा। शुरू से ही चैनल को देखने का काम भूपेन्द्र सिंह मनोला कर रहे है। साथ ही स्टूडियों को आगे बढ़ाने का काम उनकी धर्मपत्नी कविता कार्की, देबू पांगती, नितेश बिष्ट, सोनू कुमार, मोहित सिंह रौतेला रहे है।