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हल्द्वानी-पहाड़ों में हाथ छोडक़र बाइक दौड़ाता है देवभूमि का ये शख्स, ऐसे बना रहा है रिकॉर्ड

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हल्द्वानी-न्यूज टुडे नेटवर्क-(जीवन राज)-नाम बनते है रिस्क से, जी हां माउंटेन ड्यू के इस इस विज्ञापन को आपने टीवी पर देखा होगा। इसी विज्ञापन में एक शख्स दिखाई देता है जो हाथ छोडक़र बाइक चला रहा है। यह शख्य है चंपावत के नवीन कार्की। वैसे आपने भी बाइक खूब चलाई होगी कभी-कभी कही पर हाथ छोड़े होंगे लेकिन क्या कभी पूरे सफर में हाथ छोडक़र बाइक चलाई हैं कभी नहीं। लेकिन ऐसी बाइकिंग कर चुके है और अभी भी कर रहे, वो भी मैदानी क्षेत्र मेें बल्कि पहाड़ की टेडी-मेडी सडक़ों पर, जिनपर अच्छे-अच्छे ड्राइवर हार मान जाते है। ऐसे में हाथ छोडक़र बाइक चलाने की बात तो सपने में भी नहीं सोच सकते। लेकिन इसकों संभव कर दिखाया है देवभूमि के चंपावत जिले के रहने वाले नवीन कार्की ने। इसी बाइकिंग के दम पर वह कई अवार्ड अपनी झोली में डाल चुके है।

2007 से चढ़ा फ्री हैंड बाइकिंग का शौक

न्यूज टुडे से खास बातचीत में नवीन कार्की ने बताया कि जो काम कोई नहीं करता वो काम में करने की सोचना हूं, जो मैंने सोचा वह कर दिखाया। वर्ष 2007 से फ्री हैंड बाइकिंग का शौक रखने वाले नवीन कार्की आज पूरे देश में छाये हुए है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003-2008 तक वह मात्र 21 वर्ष की उम्र में अपने गांव के ग्राम प्रधान बने, उनके पास अनोखे रिकॉर्ड है। वह सिर्फ पहाड़ों पर फ्री हैंड बाइकिंग करते है। वह खड़े होकर और बैठकर दोनों तरह से हाथ छोडक़र बाइक चलाते है। कार्की ने कहा कि मेरा जूनून, मेरा लक्ष्य और मेरी मंजिल सिर्फ पहाड़ों पर हाथ छोडक़र बाइक चलाना है।

इंडिया, लिम्का समेत कई अवार्ड जीते

फ्री हैंड बाइकिंग के शौक ने उन्हें सफलता की मंजिल पर पहुंचा दिया। वर्ष 2012 में उनकी झोली में तीन अवार्ड आये। इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड और एसिसेट वल्र्ड रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज हुआ। हाल ही में इंडिया आईकॉन 2019 का खिताब समेत कई खिताब वह अपने नाम कर चुके है। इसके अलावा विश्व रिकॉर्ड यूर्निवसिटी वियतनाम ने उन्हें फ्री हैंड बाइङ्क्षकग में पीएचडी कराने के लिए नॉमिनेट किया है। उन्होंने चंपाावत से पिथौरागढ़ तक 75 किलोमीटर हाथ छोडक़र बाइक चलाने का अनोखा रिकॉर्ड बना डाला। जहां लोग कुछ पल के लिए हाथ छोडक़र बाइक नहीं चला सकते वहीं नवीन कार्की ने 75 किलोमीटर हाथ छोडक़र बाइक चलाई और अपने करतब से लोगों को दांतों तले अंगूली दबाने में मजबूर कर दिया। कार्की ने बताया कि इस काम के लिए उनका भरपूर साथ उनकी पत्नी ने दिया। वह अपनी पत्नी को पीछे बैठाकर फ्री हैंड बाइकिंग भी करते है। क्योंकि उनकी पत्नी ने कहा कि अगर कभी दो सवारी लेकर फ्री हैंड बाइकिंग की बात आयी तो आप कैसे चलाओंगे। इसलिए मैं आपके साथ बैठती हूं आप हाथ छोडक़र बाइक चलाओ। उन्होंने बताया कि हर कदम पर उनकी पत्नी ने उनका साथ दिया।

गिनीज बुक पर नजर

न्यूूज टुडे के एक सवाल के जवाब में कार्की ने बताया कि फ्री हैंड बाइकिंग वह बॉडी और माइंड को कंट्रोल में रखकर करते है। कब कहां कैसे करना है कहंा कैसी रोड में किस तरह बैलेस बनाना है। कहां बॉडी और कहा दिमाग से बाइक को कंट्रोल करना है। ये सारी बातें याद रखनी पड़ती है। साथ ही योगा का साथ और हरकत भी करनी पड़ती है। देवभूमि के इस शख्य को कॉल्ड ड्रिक माउंटेन डयू ने अपने विज्ञापन में दिखाया है। जो डर के आगे जीत है की पंच लाइन को सही साबित करता है। कार्की ने बताया कि उनका लक्ष्य गिनीज बुक में अपना रिकॉर्ड दर्ज कराना है। जिससे वह देवभूमि उत्तराखंड का नाम रोशन कर सकें। गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड में लेह टू लद्दाख के लिए वह फ्री हैंड बाइकिंग की तैयारी में जुटे है।

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