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हल्द्वानी-कल बाबा नीम किरौली के दर उमड़ेगा भक्तों का जनसैलाब, ऐसे सडक़ के रास्ते पहुंचे कैंचीधाम तक

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हल्द्वानी-शनिवार को कैंचीधाम में मेले का आयोजन होने जा रहा है। हर बार की तरह इस बार भी यहां लाखों भक्तों के पहुंचने की उम्मीद है। लोग बाबा नीम करौली महाराज के दर्शन को देश-विदेश से यहां पहुंचते है। कैची धाम का मेला हर साल 15 जून को लगता है। मानव सेवा व धर्म के पुजारी हनुमान भक्त बाबा नीम करौली महाराज ने 1962 में यहां मंदिर स्थापित किया था। जो सर्वधर्म समभाव की मिसाल है। यहां सभी वर्ग व धर्मो के लोग बाबा के दर्शन को पहुंचते हैं। इसके बाद 15 जून 1964 को मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति की प्रतिष्ठा की गई और तभी से 15 जून को प्रतिष्ठा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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जुकरबर्ग और स्टीव जॉब्स बाबा से प्रभावित

इसके अलावा फेसबुक तथा एप्पल के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग, स्टीव जॉब्स को राह दिखाने वाले नीम करौली बाबा पश्चिमी देशों में भारत की विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं । कैंची धाम मेले में देश भर के भक्त शामिल होते है और बाबा का आर्शीवाद प्राप्त करते है । मंदिर चारों ओर से ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से घिरा हुआ है और मंदिर में हनुमान जी के अलावा भगवान राम एवं सीता माता तथा देवी दुर्गा जी के भी छोट-.छोटे मंदिर बने हुए हैं। किन्तु कैंची धाम मुख्य रूप से बाबा नीम करौली और हनुमान जी की महिमा के लिए प्रसिद्ध है। यहां आने पर व्यक्ति अपनी सभी समस्याओं के हल प्राप्त कर सकता है । हर किसी ने बाबा के चमत्कारों के आगे शीश नवाजा है।

हल्द्वानी से मिलते है वाहन

दिल्ली से हल्द्वानी तक रेल, सडक़ और वायुमार्ग से पहुंच सकते है। यहां से केबू बसों, टैक्सियों द्वारा कैंचीधाम मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। दिल्ली से कैंचीधाम की दूरी करीब 310 किमी है। इसके अलावा आप बरेली के रास्ते भी हल्द्वानी होते हुए कैंचीधाम आसानी से पहुंच सकते है। हल्द्वानी से हर समय भवाली कैंचीधाम तक जाने के लिए वाहन उपलब्ध रहते है। लोग भवाली तक वाहनों से पहुंचते है वहां से पैदल भी बाबा के दर्शन करने चले जाते है। हर वर्ष लगने वाले मेले में अक्सर भवाली से लोग पैदल जाते है। मेले में शाासन-प्रशासन द्वारा पूरी सुरक्षा की व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा पहाड़ से आने और हल्द्वानी से जाने वाले वाहनों का रूट चेंज किया जाता है जिससे यातायात सुचारूरूप से चल सकें।