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अब पढ़े लिखे ही बनेंगे ग्राम प्रधान, 2019 में इस नये कानून के साथ लड़ा जाएगा पंचायती चुनाव

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उत्तराखंड में जुलाई-अगस्त में हरिद्वार को छोड़कर बाकी 12 ज़िलों में पंचायतों का कार्यकाल ख़त्म हो रहा है। इस बार पंचायत चुनाव नए कानून के अनुसार होंगे लड़े जाएंगे। जिसका विधेयक बुधवार को विधानसभा ने पारित किया है। पंचायती राज संशोधन विधेयक के पास होने के बाद चुनाव की तस्वीर अब पूरी तरह से बदल जाएगी। जिसके बाद से कई तरह के बदलाव पहले से होते आ रहे पंचायती चुनाव में देखने को मिलेंगे।

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दो बच्चों की पाबंदी

पंचायती राज संशोधन बिल पास करके उत्तराखण्ड ऐसा छठा राज्य बन गया है जहां दो से ज़्यादा बच्चों वाले पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते। इससे पहले हरियाणा, राजस्थान, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश और उड़ीसा में ऐसा प्रावधान था। विधेयक के प्रावधान के अनुसार अब प्रदेश में भी दो से ज्यादा बच्चों वाले पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। संशोधन विधेयक में 300 दिन के ग्रेस पीरियड की उस व्यवस्था को भी खत्म कर दिया है जिसका प्रावधान विधेयक के ड्राफ़्ट में था।

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शैक्षिक योग्यता

राज्य में अब तक हुए पंचायत चुनाव में शिक्षा संबंधी भी कोई पाबंदी नहीं थी लेकिन अब पंचायत चुनाव लड़ने के लिए न्यूनमत शैक्षिक योग्यता Education अनिवार्य हो गई है। अब किसी भी पद के लिए सामान्य वर्ग के प्रत्याशी का हाईस्कूल पास होना ज़रुरी है जबकि सामान्य महिला और अनुसूचित जाति जनजाति के प्रत्याशियों के लिए 8वीं पास होना अनिवार्य किया गया है।

दोगुना हुई खर्च की सीमा

इसके अलावा पंचायत चुनाव से जुड़ी एक और जानकारी है। सितम्बर में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटे राज्य निर्वाचन आयोग ने खर्च की सीमा को दोगुना कर दिया है। नामांकन पत्रों के शुल्क के साथ जमानत राशि तक में बढ़ोत्तरी कर दी गई है।