सरकारी कर्मचारियों पर मेहरबान मोदी सरकार, 26 साल पुराने नियम को बदलकर दिया ये बड़ा तोहफा

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नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : केंद्र की मोदी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। मोदी सरकार की ओर से कर्मचारियों के शेयरों और म्यूचुअल फंडों में निवेश के खुलासे की लिमिट बढ़ा दी गई है। मोदी सरकार ने यह लिमिट बढक़र कर्मचारियों के छह माह के मूल वेतन के बराबर कर दी है।

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सभी विभागों को मंत्रालय की ओर से आदेश जारी

बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों को इसका 26 साल से इंतजार था। इसकी जानकारी कार्मिक मंत्रालय की ओर से दी गई है। इस बारे में केंद्र सरकार के सभी विभागों को मंत्रालय की ओर से आदेश जारी किया गया है। मोदी सरकार के इस फैसले के बाद करीब 26 साल पहले की मौद्रिक सीमा नियम में बदलाव होगा।

गौरतलब है कि पहले समूह-ए और समूह-बी के अधिकारियों को शेयरों, प्रतिभूतियों, डिबेंचरों या म्यूचुअल फंड योजनाओं में कैलेंडर साल में 50,000 हजार रुपये से अधिक का लेन-देन करने पर उसका ब्यौरा देना पड़ता था। जबकि समूह-सी और समूह- डी के कर्मचारियों के लिए यह लिमिट मात्र 25,000 रुपये थी।

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कर्मचारियों को देनी होगी निवेश की सूचना

लेकिन अब मोदी सरकार के नए नियम के तहत कर्मचारियों को अपने निवेश की सूचना तभी देनी होगी जब एक कैलेंडर साल में यह निवेश उनके छह माह के मूल वेतन से ज्यादा हो जाएगा। दरअसल, सातवां वेतन लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों के वेतन में इजाफा हुआ है। इस कारण लिमिट की सीमा बढ़ाने का फैसला किया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ट्रांजेक्शन पर निगाह रखने के लिए सरकार ने कर्मचारियों को ब्यौरा साझा करने का प्रारूप जारी किया है।

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प्रशासनिक अधिकारी लेन-देन पर रखें निगाह

सरकार ने अब फैसला किया है कि अब सभी कर्मचारियों को शेयरों, प्रतिभूतियों, डिबेंचर और म्यूचुअल फंड योजनाओं में अपने निवेश की सूचना तभी देनी होगी जबकि एक कैलेंडर साल में यह निवेश उनके छह माह के मूल वेतन को पार कर जाए। मंत्रालय ने इस बारे में केंद्र सरकार के सभी विभागों को आदेश जारी किया है। प्रशासनिक अधिकारी इस तरह के लेन-देन पर निगाह रख सकें इसके मद्देनजर सरकार ने कर्मचारियों को इस ब्योरे को साझा करने के बारे में प्रारूप भी जारी किया है।

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