हल्द्वानी- दिल्ली से पहाड़ तक गूंज रहे इस हास्य कवि के ठहाके, इनकी कॉमेडी सुन नहीं रूकेगी आपकी हंसी

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हल्द्वानी-न्यूज टुडे नेटवर्क-(जीवन राज)- कॉमेडी तो आप बहुत सुनते होंगे। पूरा यू-ट्यूब कॉमेडी से भरा है लेकिन अगर आपकों बड़े-बड़े शहरों में कुमाऊंनी भाषा में कॉमेडी सुनने को मिल जाय तो कार्यक्रम का मजा ही कुछ और हो जाता है। आजकल दिल्ली से लेकर पहाड़ तक अपनी कॉमेडी से लोगों को गुदगुदाने का काम उत्तराखंड के शिबू रावत ने किया हैं। समूचे दिल्ली से हरियाणा, मुंबई तक लोग शिबू रावत की कॉमेडी के दीवाने हैं। जिस कार्यक्रम में शिबू रावत न हो अब तो वह भी अधूरा लगता है। उनके पहाड़ी बोलने के निराले अंदाज से लोग उनकी ओर खींचे चले आते है। दिल्ली में शनिवार से शुरू होने वाले उत्तराखंडी संगीत कार्यक्रम में शिबू रावत प्रदेश में रहने वाले लोगों को गुदगुदाने का काम करेंगे। साथ ही विलुप्त होती चीजों को संवारने का प्रयास करेंगे।

25 को बड़ दिन कौतिक में करेंगे प्रतिभाग

शिबू रावत कुमाऊंनी कॉमेडी की दुनियां में एक उभरते हुए कलाकार है। काफी संघर्षों के बाद उन्होंने यह सफलता प्राप्त की। बचपन से सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने वाले शिबू रावत बड़े होकर एक कुमाऊंनी हास्य कवि बन गये। न्यूज टुडे नेटवर्क से खास बातचीत में शिबू रावत ने बताया कि इस बार 25 दिसम्बर को (पहाड़ों में जिसे लोग बड़ दिन कहते है) बड़ दिन कौतिक के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वह पहली बार अपने गांव में कॉमेडी का प्रोग्राम करेंगे। उनके वर्षों से देखा हुआ ख्वाब अब 25 दिसम्बर को पूरा होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि दिल में एक तमन्ना थी कि जब मैं एक कलाकार बनू तो अपने गांव में कार्यक्रम करूं। इस कार्यक्रम में बुलावे से वह अपने का खुशनसीब मान रहे हैं। वह पहली बार अपने जन्मस्थली के लोगों को गुदगुदाने का काम करेंगे। शिबू रावत ने बताया कि इस महीने उनके पास कार्यकर्मों की भरमार है। उन्हें दिल्ली में कई कुमाऊंनी कार्यक्रमों में प्रतिभाग करना है। इसके बाद उन्हें पंजाब में जालंधर कार्यक्रम में जाना है। वह पहली बार एक बड़े कार्यक्रम में पंजाब जायेंगे।

 संस्कृति बचाना मेरी पहली प्राथमिकता- शिबू रावत

बता दें कि शिबू रावत मूलरूप से द्वाराहाट तहसील खनारी खजानपुर (जालली) गांव के रहने वाले है। इन दिनों दिल्ली में नौकरी के साथ अपनी कुमाऊंनी कॉमेडी से लोगों को गुदगुदाने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा शिबू रावत सोशल मीडिया के माध्यम से पहाड़ के लोगों को उनकी बोली भाषा से एक साथ जोडऩे की कोशिश में लगे हुए हैं। कुमाऊंनी कॉमेडी के अलावा शिबू मंच संचालन में माहिर है। साथ ही उन्होंने कई गाने भी लिखे है जिन्हें कई कुमाऊंनी गायकों ने अपने सुर दिये है। जिन्हें कई मंचों पर सम्मानित भी किया जा चुका हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कोशिश हास्य कला के माध्यम से पहाड़ की संस्कृति को बचायेे रखना है। लोग शहरों में रहकर अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे है। वह हास्य कला के माध्यम से लोगों को संस्कृति के प्रति जागरूक करने का काम कर रहे है। वही 25 दिसम्बर को ईड़ाबाराखाम जालली में होने वाले कार्यक्रम में शिबू रावत के अलावा कुमाऊं के सुपर स्टार लोकगायक सुर सम्राट स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी के पुत्र रमेश बाबू गोस्वामी अपनी सुरों से कार्यक्रम में चार चांद लगाने का काम करेंगे। साथ ही लोकगायक बिशन हरियाला, प्रकाश काहला, जितेन्द्र तोमक्याल, नवीन रावत, सुनील कुमार व दीवान सिंह अपने सुरों से लोगों को नचाने का काम करेंगे।

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