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इन चीजों पर नहीं लगती जीएसटी, कहीं दुकनदार या कारोबारीआपको लूट तो नही रहा ?

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नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : एक ग्राहक के रूप में आपको यह पता होना चाहिए कि कहीं दुकानदार या कारोबारी आपको लूट तो नहीं रहा। भारत में आजादी के बाद जीएसटी या वस्तु और सेवा कर को सबसे बड़ा कर सुधार करार दिया गया। यह प्रक्रिया अभी भी चल रही है। जीएसटी को लागू हुए लगभग डेढ़ साल हो गए, एक बात निश्चित तौर पर कही जा सकती है कि जीएसटी का एक प्रमुख लक्ष्य, सभी उत्पादों को इस दायरे में लाने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। जीएसटी युग की एक और उपलब्धि पूरे भारत में अप्रत्यक्ष कराधान का सरलीकरण और एकरूपता रही है, यह राज्य नियंत्रित वैट शासन के तहत संभव नहीं था।

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डेढ़ साल निश्चित रूप से इस प्रमुख कर सुधार के पूर्ण प्रभाव का आकलन करने के लिए पर्याप्त लंबा समय नहीं है और जीएसटी दरों (GST Rates)के युक्तिकरण को निश्चित रूप से भविष्य के लिए जारी रखा जाएगा। आम आदमी और व्यवसाइयों के लिए चिंता का विषय एकाधिक जीएसटी ब्रेकेट्स हैं। इनमें से कुछ अनावश्यक है और इसने पहले से जटिल अप्रत्यक्ष कराधान तथा कर घोषणा प्रकिया को और कठिन बना दिया है। आइए जानते हैं जीएसटी के तरह आम आदमी को दैनिक उपयोग के लिए माल/ सेवाओं का लाभ उठाने के लिए कितना भुगतान करना होगा?

खाद्य वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी

जीएसटी लागू होने के बाद आम आदमी का किराना बिल बढ़ा है या घटा है। बहुत सारे आइटम जीरो जीएसटी स्लैब में डाल दिए गए हैं। अधिकतम 28 फीसदी जीएसटी स्लैब में एक भी किराना सामान नहीं है।

इन खाद्य पदार्थों के लिए आपको कोई जीएसटी नहीं देना होता…

  • ताजी/ठंडी सब्जियाँ और फल
  • ताजा/ठंडा मांस और मछली
  • ताजा, पके हुए या संरक्षित शेल में रखे पक्षी के अंडे (मुर्गी के अंडे सहित)
  • ताजा (असंसाधित) अदरक और हल्दी
  • ताजा और पास्चुरीकृत दूध, अलग किया हुआ दूध, दूध और क्रीम (चीनी जैसे स्वीटनर नहीं), आदि
  • ब्रेड (ब्रांडेड/अनब्रांडेड)
  • चावल (ब्रांडेड कंटेनरों में नहीं)
  • ब्रांडेड कंटेनरों में रखी सब्जियां, जिनमें ब्राइन का उपयोग संरक्षण के लिए किया जाता है, तत्काल खपत के लिए अनुपयुक्त हैं। (पहले 5% जीएसटी स्लैब में थी 31 जनवरी को हुई जीएसटी कॉन्सिल की बैठक में उन्हें 0 जीएसटी स्लैब में लाया गया।)

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हालांकि, ये समान वस्तुएं यदि भाग में या पूरी तरह से संसाधित होती हैं और एक ब्रांड नाम/लोगो में पैक की जाती हैं,
जो कानून की अदालत में लागू होते हैं, तो उस पर जीएसटी लग सकता है। इन खाद्य सामग्रियों पर 5 फीसदी जीएसटी लगता है…

  • ब्रांडेड कंटेनरों में चावल
  • विभिन्न प्रकार के खाद्य तेल (सूरजमुखी, मूंगफली, सोयाबीन, सरसों, आदि)
  • सूखे मेवे जैसे सूखे अंगूर (किशमिश), कटे हुए आम, सूखी इमली आदि।
  • फल और सूखे मेवे जिन्हें ब्राईन, सल्फर डाइऑक्साइड आदि का उपयोग करके संरक्षित किया जाता है, लेकिन तत्काल खपत के लिए अनुपयुक्त हैं।
  • पक्षियों के अंडे / अंडे की जर्दी जिन्हें शैल से निकाला गया है। चाहे वे ताजा, उबले, सूखे, जमे हुए या फिर संरक्षित रूप से बेचे गए हों।
  • पंजीकृत ब्रांड के नाम वाले कंटेनरों में पैक की हुई सुपाच्य सब्जियों का पाउडर और भोजन।
  • अदरक (ताजा अदरक को छोडक़र), केसर, हल्दी (ताजा हल्दी को छोडक़र), बे पत्ती, अजवायन के फूल, करी और अन्य मसाले।
  • क्रीम, दही और अन्य किण्वित/अम्लीकृत दूध उत्पादों के साथ या बिना चीनी / मीठी सामग्री, फल, नट या कोको।
  • अल्ट्रा हाई टेम्प्रेचर (HT) दूध, दूध और क्रीम जिसे गाढ़ा किया गया हो या जिसमें चीनी / स्वीटनर हो जैसे कि बच्चों के लिए दूध और स्किम्ड मिल्क पाउडर।
  • ब्रेड, पेस्ट्री, पिज्जा ब्रेड, टोस्ट जैसे उत्पादों के लिए मीठा, मिक्स / आटा।
    12 प्रतिशत जीएसटी कुछ ही खाद्य पदार्थों पर लगता है। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं…
  •  गाढ़ा किया हुआ दूध
  • मक्खन / घी / डेयरी पदार्थ, सोया दूध, दूध पेय पदार्थ
  • संरक्षित मांस
  • डायबिटीक फूड
  • मांस/ रक्त /मांस के उपयोग से तैयार किए गए सॉसेज और समान खाद्य उत्पाद।

खाद्य पदार्थों पर लगने वाली जीएसटी की सर्वाधिक दर 18 प्रतिशत है। यह दर बहुत ही कम खाद्य वस्तुएं इस दायरे में है…

  • बैकरी उत्पाद जैसे केक और पेस्टी।
  • चॉकलेट और अन्य कोक युक्त खाद्य पदार्थ, माल्ट अर्क
  • कॉर्न फ्लेक्स और बल्गर गेहूं

उपर्युक्त सूचियां केवल सांकेतिक उद्देश्यों के लिए हैं और संपूर्ण नहीं हैं। दर इससे अलग भी हो सकती है।

यह स्पष्ट है कि ताजा उत्पादों/उत्पादन की तुलना में संसाधित या संरक्षित खाद्य पदार्थों के लिए जीएसटी अधिक है।
बाहर के खाने यानी खाद्य सेवाओं के संदर्भ में, रेस्तरां के बिलों पर लागू जीएसटी 5% है, भले ही परिसर वातानुकूलित हो या न हो। 18% की उच्च जीएसटी दर हालांकि एक होटल के परिसर के भीतर स्थित रेस्तरां पर लागू होती है जो कमरे के टैरिफ प्रति रात 7500 रुपए से अधिक शुल्क लेती है। कैटरिंग सेवाओं पर भी जीएसटी 18% की दर से लगेगा। जबकि कार्यालयों/शिक्षण संस्थानों में कैफेटेरिया सेवाओं में जीएसटी दर 5% है।
परिवहन पर जीएसटी : आम आदमी को परिवहन पर जीरो से 12 प्रतिशत के बीच जीएसटी देना होता है। इन परिवहन सेवाओं पर जीरो प्रतिशत जीएसटी लगता है।

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  • सार्वजनिक परिवहन
  • जनरल (अनारक्षित) रेलवे टिकट, स्लीपर क्लास रेल टिकट और मेट्रो रेल टोकन / टिकट
  • बिना एसी वाले ऑटो / टैक्सी
  • इन परिवहन सेवाओं के लिए आपको 5 प्रतिशत जीएसटी देना होगाज्
  • एग्रीगेटर एप्स (जैसे उबर/ ओला) के जरिए बुक की गई वातानुकूलित कैब, रेडियो टैक्सी और टैक्सी।
  • घरेलू हवाई यात्रा के टिकट
  • प्रथम श्रेणी / वातानुकूलित डिब्बों में यात्रा के लिए रेल टिकट

वर्तमान में यात्री परिवहन पर 12% GST की दर बिजनेस क्लास हवाई टिकटों पर लागू होती है।

रियल एस्टेट पर जीएसटी : अचल संपत्ति की खरीद पर 12% जीएसटी लगता है और यह केवल निर्माणाधीन संपत्तियों की खरीद पर लागू है। एक फ्लैट / घर की बिक्री पर जीएसटी नहीं लगता है क्योंकि इसमें सर्विस या माल की आपूर्ति नहीं होती। इसी तरह रियल एस्टेट के पुनर्विक्रय पर भी जीएसटी लागू नहीं होता। हालांकि जीएसटी की शुरुआत में पंजीकरण शुल्क और स्टांप शुल्क को नहीं जोड़ा गया अत: यह राज्य कराधान नियमों के तहत ही लगता है।

वित्तीय सेवाओं पर जीएसटी : जीएसटी के तहत बैंकिंग और विभिन्न वित्तीय सेवाओं पर वर्तमान में 18% की दर से कर देना होता है। हालांकि क्चस्क्चष्ठ्र के धारकों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं के लिए कोई कर नहीं देना होता।

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एपेरल और क्लाथिंग एसेसरिज पर जीएसटी : एपेरल और क्लाथिंग एसेसरिज पर 5 से 18 प्रतिशत तक जीएसटी लगती है, जो एपेरल की कीमतों समेत कई कारकों पर निर्भर करती है। अगर आप 1000 रुपए से कम के एपेरल या क्लाथिंग एसेसरिज खरीदते हैं तो आपको 5 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। जरी और एम्ब्रायडरी वाले कपड़े खरीदने पर भी इसी दर से कर लगेगा। हालांकि 1000 से ज्यादा के कपड़े खरीदने पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। 18% की उच्चतम जीएसटी दर कपड़े के सामान / परिधान पर लागू होती है जो कि इनपुट के रूप में वल्केनाइज्ड रबर, चमड़े और फर का उपयोग करते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिक आयटमों पर जीएसटी : भारत स्मार्टफोन और अन्य संचार उपकरणों के लिए सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। भारत में सेलफोन पर 12 फीसदी जीएसटी लगती है वहीं सेट टॉप बॉक्स पर 18 फीसदी कर देना होता है। लैपटॉप और अन्य कंप्यूटिंग डिवाइस भी 18% का जीएसटी वहन करते हैं।

डीजिटल कैमरे और अन्य वीडियो डिवाइसों को अभी 31 जनवरी को हुई जीएसटी कॉन्सिल की बैठक में 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया। 32 इंच से कम के टीवी और कंप्यूटर स्क्रीन पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा जबकि इससे ज्यादा के टीवी स्क्रीन पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।

उपसंहार : जीएसटी लागू होने के समय इससे राजस्व तटस्थ कर होने की उम्मीद की गई थी यानी इसके शुरू होने से राजस्व संग्रह के साथ-साथ वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर कम से कम प्रभाव पडऩे की उम्मीद थी। राज्य स्तर पर अप्रत्यक्ष कर राजस्व को पूर्व-जीएसटी शासन के समान स्तरों पर बनाए रखा गया है। आम आदमी के लिए कीमतें अपेक्षाकृत अपरिवर्तित बनी हुई हैं। भारत में जीएसटी अभी भी विकसित हो रहा है और विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के लिए वर्तमान दरों के युक्तिकरण को निकट भविष्य में जारी रखने की उम्मीद है।