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केदारनाथ में लापरवाह अधिकारियों को डीएम ने ऐसे सिखाया सबक, इस हाल में पहुंचकर की ताबातोड़ कार्यवाई

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Uttarakhand Tourism, केदारनाथ धाम में लगातार मिल रही यात्रियों की शिकायतों को देखते हुए यात्रा व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल आधी रात को आम यात्री की तरह केदारनाथ धाम के प्रमुख पड़ाव गौरीकुंड पहुंचे। यहां जब वह अव्यवस्थाओं से रूबरू हुए तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया। जिसके बाद कई कार्मिकों पर गाज भी गिरी। डीएम जब आम यात्री बन कर आधी रात के बाद केदारनाथ धाम के प्रमुख पड़ाव गौरीकुंड पहुंचे तो हकीकत आंखे खोलने वाली थी। पड़ावों पर गंदगी से पटे शौचालय, पानी की सूखी टोटियां, पुलिस कर्मियों की लापरवाही देख जिलाधिकारी का पारा चढ़ गया। यात्रा व्यवस्थाओं में लापरवाही की इंतेहा देख उन्होंने गौरीकुंड के सेक्टर मजिस्ट्रेट का तबादला केदारनाथ कर दिया। इसके बाद तत्काल जलसंस्थान के सहायक अभियंता और अवर अभियंता के निलंबन की संस्तुति कर डाली।

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शौचालय की हालत देख ठोका जुर्माना

गौरीकुंड में सुलभ शौचालय का हाल देख उन्होंने सुलभ इंटरनेशनल पर पांच लाख का जुर्माना ठोका। डीएम ने पुलिस अधीक्षक को कहा कि गौरीकुंड के चौकी प्रभारी को भी तत्काल हटाया जाए। पूरी रात उन्होंने गौरीकुंड के घोड़ा पड़ाव पर यात्रियों के बीच गुजारी। दोपहर 12 बजे वह मुख्यालय लौटे। जिलाधिकारी मंगेश ने घिल्डियाल ने इस कार्यवाही के बाद जानकारी दी कि इन दिनों केदारनाथ में हर रोज 30 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए प्रशासन ने इंतजाम किए हैं। बावजूद इसके उन्हें शिकायत मिल रही थी कि कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपने दायित्वों के निर्वहन में हीलाहवाली कर रहे हैं। इसीलिए वह रविवार की रात करीब 11 बजे बाद गुप्तकाशी से निजी वाहन से निरीक्षण पर निकले।

यात्रियों से की बातचीत

केदारनाथ में निरीक्षण के दौरान उन्होंने सीतापुर, सोनप्रयाग और गौरीकुंड में यात्रियों से बातचीत की। डेढ़ से अधिक यात्रियों ने बातचीत में जिलाधिकारी से पानी की सूखी टंकियों, गंदगी से पटे शौचालय और सोनप्रयाग से केदारनाथ तक चल रही शटल सेवा में अनियमितता की शिकायत की। यात्रियों ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। जब जिलाधिकारी ने खुद निरीक्षण किया तो पाया कि शिकायतें सही थी। डीएम ने बताया कि अव्यवस्थाओं के लिए जिम्मेदार जल संस्थान के अवर अभियंता व सहायक अभियंता के निलंबन की संस्तुति की गई है। इसके अलावा उन्होंने जल संस्थान के अधिशासी अभियंता पर दस हजार का अर्थदंड भी लगाया।