देहरादून- उत्तराखंड में अब “होम स्टे” प्लस “वर्क फ्रॉम होम” का कांबिनेशन बढ़ाएगा हलचल, पर्यटन सेक्टर को ऐसे होगा लाभ

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उत्तराखंड में होम स्टे योजना को वेलनेस टूरिज्म से जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसके तहत होम स्टे में योग-ध्यान, स्पॉ, पंचकर्मा जैसी वेलनेस से जुड़ी गतिविधियां शुरू करने के साथ ही इन्हें कोविड-19 के चलते चल रही परिस्थितियों के दृष्टिगत कंपनियों, संस्थाओं समेत अन्य लोगों को वर्क फ्रॉम होम के लिए देने पर सरकार विचार कर रही है। वर्क फ्रॉम होम के दृष्टिगत होम स्टे में बेहतर वाई-फाई कनेक्टिविटी समेत अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

कोरोना महामारी के इलाज को वैक्सीन आने तक इसीके साथ ही रहते हुए आगे बढ़ना होगा। इसके लिए काम के ऐसे तौर-तरीके अपनाने होंगे, जिससे बीमारी से बचाव भी हो सके और आर्थिकी भी बाधित न हो। इसी को देखते हुए उत्तराखंड में ‘होम स्टे योजना’ को वेलनेस टूरिज्म से जोड़कर आने वाले दिनों की बड़ी संभावना के तौर पर देखा जा रहा है। इसके लिए सरकार तेजी के कार्य भी कर रही है।

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home stay yojna connects with wellness tourism

2016 में शुरु की गई होम स्टे योजना पहाड़ में रह रहे लोगो के लिए रोजगार एक बड़ा जरिया है। इसमें गांव में घरों को होम स्टे में तब्दील कर वहां पर्यटकों के रहने की व्यवस्था की जाती है। घर जैसा वातावरण देते हुए उन्हें पारंपरिक व्यंजन तो परोसे ही जाएंगे, यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी वे रूबरू हों। दिसंबर 2019 तक राज्य के तमाम जिलों में 1842 होम स्टे अस्तित्व में आ चुके थे। जिसके बाद ये आकड़ा और बड़ा है।

होम स्टे प्लस वर्क फ्रॉम होम

अब जबकि परिस्थितियां बदली हैं तो होम स्टे को वेलनेस टूरिज्म से जोड़ा जाएगा। सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर के मुताबिक वेलनेस टूरिज्म को प्रमोट करने में होम स्टे में अच्छी संभावना है। इसे कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है, इस बारे में मंथन चल रहा है। इसके तहत होम स्टे या इसके पास वेलनेस के लिए योग-ध्यान केंद्र, पंचकर्म, स्पा जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

Dilip Jawalkar uttarakhand tourism sachiv

जावलकर के अनुसार इस दृष्टिकोण से भी विचार किया जा रहा है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए होम स्टे को वर्क फ्रॉम होम के उपयोग के लिए भी दिया जाए। इसके लिए होम स्टे में बेहतर संचार कनेक्टिविटी समेत अन्य सुविधाएं विकसित करने पर फोकस किया जाएगा। उनकी माने वेलनेस के मद्देनजर होम स्टे के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार के इस कदम से पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार और पर्यटक दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

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