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VIDEO, देहरादून- फिल्म 72 आवर्स के ट्रेलर ने मचाया धमाका, इस वीर की शौर्य गाथा देख आप भी गर्व से कहेंगे हम छी उत्तराखंडी

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देहरादून-न्यूज टुडे नेटवर्क-मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को एक स्थानीय होटल में शहीद जसवन्त सिंह रावत पर बनी फिल्म 72 आवर्स के टे्रलर लॉन्च में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि महावीर चक्र विजेता जसवन्त सिंह रावत ने 1962 में चीन के साथ युद्ध के दौरान अदम्य साहस व वीरता का परिचय दिया व अकेले ही 300 चीनी सैनिकों को मार गिराया। जसवन्त सिंह जैसे वीरों के कारण उत्तराखण्ड को वीरभूमि कहा जाता है। वीर सैनिक सदैव अमर होते है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड में फिल्मों के निर्माण व शूटिंग को प्रोत्साहित करने हेतु मिशन मोड पर कार्य कर रही है। महेश भट्ट, राजकुमार सन्तोषी, राजा मौली, जैसे बड़े निर्माता निर्देशक अपनी फिल्मों को शूंटिग उत्तराखण्ड में करने की योजना बना रहे है।

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फिल्म का ट्रेलर देखने के लिए क्लिक करें-

18 जनवरी को रिलीज होगी फिल्म

गौरतलब है कि वर्ष 1962 में हुए भारत-चीन के ऐतिहासिक युद्ध में दुश्मनों से लोहा लेने वाले देवभूमि उत्तराखंड के शहीद जसवंत रावत पर बनी फिल्म 72 ऑवर्स-मार्टियर हू नेवर डाइड 18 जनवरी को रिलीज हो रही है।

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फिल्म का ट्रेलर 24 दिसंबर को दून में रिलीज हो चुका है। करीब 22 घंटे में 12 लाख से ऊपर लोगों ने इस फिल्म को ट्रेलर को देखा है। फिल्म में देहरादून के अविनाश ध्यानी ने शहीद जसवंत रावत का किरदार निभाया है। फिल्म की कहानी लिखने के साथ ही उन्होंने इसका निर्देशन भी किया है। बतौर निर्देशक वह इस फिल्म से डेब्यू कर रहे हैं। इससे पहले वह फिल्म फ्रेड्रिक में अभिनय कर चुके हैं। फिल्म के प्रोड्यूसर दून के ही जेएस रावत हैं। बताया जा रहा है कि इसमें ज्यादातर कलाकार उत्तराखंड के हैं। इस फिल्म की शूंटिंग उत्तराखंड के चकराता के वैराट खाई, हर्षिल, दून आदि इलाकों में शूट की गई है।

आज भी करता है सीमा पर ड्यूटी

फिल्म में राइफल मैन जसवंत रावत कैसे अकेले 300 से ज्यादा चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार देते हैं, दिखाया गया है। सुखविंदर सिंह ने देशभक्ति गीत अब तो चल पड़े हैं डगर डगर, शान ने दूर मैं खुद से हुआ दूर और श्रेया घोषाल ने ओर चंदा गीत गाया है। जसवंत सिंह रावत के मारे जाने के बाद भी उनके नाम के आगे न तो शहीद लगता है और ना ही स्वर्गीय। ऐसा इसलिए क्योंकि सेना का यह जाबांज जवान आज भी ड्यूटी करता है। ऐसा कहा जाता है कि अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले के जिस इलाके में जसवंत ने जंग लड़ी थी उस जगह वो आज भी ड्यूटी करते हैं और भूत-प्रेत में यकीन न रखने वाली सेना और सरकार भी उनकी मौजूदगी को चुनौती देने का दम नहीं रखते। जसवंत सिंह का ये रुतबा सिर्फ भारत में नहीं बल्कि सीमा के उस पार चीन में भी है। हर दिन उनका जूता पॅालिश होता है लेकिन जब रात में जूते को देखा जाता है तो ऐसा लगता है जैसे जूता पहनकर कोई कहीं गया था।