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देहरादून- श्रीदेव सुमन को इसलिए कहा जाता है गढ़वाल का भगत सिंह, आजादी के लिए दिए कई बलिदान

श्रीदेव सुमन टिहरी रियासत की राजशाही के विरुद्ध विद्रोह कर बलिदान देने वाले भारत के अमर स्वतंत्रता सेनानी थे। उनको गढ़वाल के “भगत सिंह” के नाम से भी जाना जाता है। श्रीदेव का जन्म 25 मई 1916 में उत्तराखंड के टिहरी जिले में हुआ। अपनी शुरुआती पढाई उन्होंने टिहरी से की, और उच्च शिक्षा के लिए देहरादून चले गये। अपने छात्र जीवन से ही गाँधीवादी विचारधारा से प्रेरित श्रीदेव ने नमक सत्याग्रह आन्दोलन में भी अपना योगदान दिया, जिस कारण उन्हें 14 दिन की जेल भी हुई।

जेल में शुरू किया आमरण अनशन

वे हिंदी साहित्य से जुड़े हुए व्यक्ति थे। उन्होंने हिमालय सेवा संघ, गढ़वाल सेवा संघ, राज्य प्रजा परिषद जैसी कई समाज सेवी संस्थाओ की स्थापना भी की। 1939 में श्रीदेव को “टिहरी राज्य प्रजा मंडल” का अध्यक्ष बनाया गया। ये संस्था लोगों पर होने वाले अत्याचारों के विरुद्ध कार्य करती थी। अपने प्रभावी कार्य और कुशल नेतृत्व के कारण वह लोगो के बीच काफी लोकप्रिय हुए।

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1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन में हिस्सा लेकर उन्होंने टिहरी के अंदर कूच किया, जहाँ एक बार फिर उनकी गिरफ़्तारी हुई। जेल के अंदर उनके साथ बहुत ही अमानवीय व्यवहार किया गया। बार-बार कहने पर भी उनकी टिहरी के राजा के साथ सुनवाई न होने के कारण उन्होंने जेल में ही आमरण अनशन शुरू कर दिया। 84 दिन के कठिन उपवास के बाद 25 जुलाई 1944 को श्रीदेव सुमन ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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