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देहरादून- आजादी की लड़ाई में जेल जाने वाली ये थीं उत्तराखंड की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी, इतना दर्दनाक था अंत

बिशनी देवी शाह आजादी की लड़ाई में शामिल होने वाली उत्तराखंड की महिला स्वतंत्रता सेनानी थी। वह आजादी के लिए जेल जाना वाली उत्तराखंड की पहली महिला थीं। उनका जन्म अक्टूबर 1902 को बागेश्वर में हुआ। बिशनी देवी के जन्म के वक्त देश के साथ साथ कुमाऊं में भी आजादी के आंदोलन की अलख जग चुकी थी। 13 साल की उम्र में उनकी शादी हुई। शादी के तीन साल बाद ही उनके पति का निधन हो गया। उस वक्त अंग्रेजों के अत्याचार को खत्म करने के लिए अल्मोड़ा में भी बैठकों का दौर जारी था।

आजादी की लड़ाई में लगाई सारी जमा पूंजी

1919 में बिशनी देवी आजादी की लड़ाई में कूद पड़ी। महात्मा गांधी की प्रेरणा से उन्होंने स्वदेशी का प्रचार-प्रसार शुरू किया। आजादी की इस लड़ाई में उन्हें दिसबंर 1930 और 1933 में दो बार जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने कुमाऊं में स्वदेशी आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए दो नाली जमीन और अपनी सारी जमा पूंजी लगा दी।

Bishni Devi Sah Uttarakhand Freedom fighter

15 अगस्त, 1947 को जब लाल किले पर तिरंगा फहराया गया, तो वह अल्मोड़ा में एक शोभा यात्रा की अगुवानी कर रही थीं। देश के लिए अपना सब कुछ दान करने वाली बिशनी देवी अंत के दिनों में बिलकुल अकेली थी। 1974 में 73 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

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