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देहरादून- आयकर अधिकारी की मां को ठगों ने बनाया अपना शिकार, ऐसे बुना ठगी का जाल

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देहरादून- न्यूज टुडे नेटवर्क: राजधानी में बीमारी ठीक करने के नाम पर ठगों ने आयकर अधिकारी की मां को अपनी ठगी का शिकार बना लिया। बाबा चेले के भेस में आये ठग सोने-चांदी के आभूषण मौके से लूट फरार हो गए थे। मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों को कानपुर से दबोच लिया है। जिसके बाद पुलिस टीम दोनों ठगो को लेकर देहरादून पहुंची। दोनो रिश्ते में मामा-भांजा हैं। दोनों शातिरों पर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ठगी के मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से दोनों जिला कारागार सुद्धोवाला भेज दिए गए। बता दें कि देवेश्वरी देवी निवासी शास्त्रीनगर, जोगीवाला बीते 15 मार्च को पति बख्तावर सिंह की फिजियोथैरेपी कराने नेहरू कॉलोनी के एक अस्पताल पहुंचीं। यहां एक व्यक्ति उनसे मिला और बोला वह एक बाबा को जानता है, जो चुटकी बजाते पति को ठीक कर सकते हैं। दोनों ने देवेश्वरी को सम्मोहित कर शरीर पर पहने सभी गहने उतरवा लिए। गहनों को एक पैकेट में बंद कर उन्हें दे दिया और कहा कि घर जाकर लिफाफा खोलना और गहनों पर गंगाजल छिड़ककर पहन लेना। लेकिन जब घर जाकर उन्होंने लिफाफा खोला तो वह खाली था।

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सीसीटीवी से हुआ खुलासा

पुलिस जानकारी मुताबिक नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र में बीते 15 मार्च को ठगी की वारदात के बाद पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। एक फुटेज में बुजुर्ग महिला को ठगने वाले दो युवक एक कार में बैठकर हरिद्वार की ओर जाते दिखे। कार पर लिखा नंबर लखनऊ का था। पुलिस ने उत्तराखंड से लखनऊ की ओर जाने वाले हाईवे पर लगे कैमरों की फुटेज को भी खंगाला। इस बीच लखनऊ आरटीओ ऑफिस से संपर्क किया तो पता चला यह कार इन दिनों रायबरेली के एक युवक के नाम पर दर्ज है। यहां दोनों की पहचान रहमत अली उर्फ मन्नान वारसी (मामा) पुत्र स्व. लल्लन वारसी व असगर (भांजा) पुत्र सुभानी निवासी कुंदनगंज थाना बछरावां रायबरेली के रूप में हुई। पुलिस जब रायबरेली पहुंची तो दोनों वहां से गायब मिले। इसके बाद मुखबिर तंत्र से आरोपितों की लोकेशन ट्रेस कराई गई तो दोनों के कानपुर में होने का पता चला। दोनों को कानपुर में गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने लखनऊ नंबर की कार को भी बरामद कर लिया है।

कई जिलों में कर चुके हैं वारदात

रहमत और असगर लखनऊ, रायबरेली, कानपुर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ठगी की वारदात को अंजाम दे चुके हैं। वहां पुलिस पीछे पड़ी तो दोनों ने उत्तराखंड का रुख किया। पूछताछ में दोनों ने बताया कि दोनों लखनऊ से 12 मार्च को देहरादून के लिए निकले और 13 को हरिद्वार के एक होटल में रुके। अगले दिन हरिद्वार में ठगी करने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हुए। इसके बाद 15 मार्च को देहरादून पहुंचे।