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देहरादून- असमय मौतों पर विराम लगाएगी सीएम त्रिवेंद्र की ‘घस्यारी योजना’ , ऐसे पहुंचेगा महिलाओं को लाभ

राज्य को अस्तित्व में आए दो दषक से अधिक समय हो गया है। यहां आठ मुख्यमंत्रियों की कार्यषैली प्रदेष के आम जनमानस ने भली प्रकार से देख ली है। इस दौरान कई उतार चढ़ाव भी आए। लेकिन हाल में प्रदेष की महिलाओं के जीवन से जुड़े उस संघर्ष को मिटाने का प्रयास किया है जिसमें हारने वाले को मौत ही नसीब होती है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की घस्यारी योजना से पहाड़ में महिलाओं की असमय मौतों पर विराम लग जायेगा।

जी हां, यहां बात हो रही है महिलाओं के सिर से घास और लकड़ी का बोझ हटाने की। जिसमें अभी तक सैकड़ों की तादाद में लोग अपनी जान तक गंवा चुके हैं। सरकारी रिकार्ड में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक गत वर्षों में घास लकड़ी जुुटाते हुए 562 लोग वन्य जीवों से संघर्ष या फिर चट्टान से गिरने आदि दुर्घटनाओं में अपनी जान गवां चुके हैं। जिनमें से अधिकांष महिलाएं ही हैं।

जिम्मेदारियां निभाने के साथ रहता है जान का जोखिम

गौरतलब है कि ग्रामीण अंचलों में मातृषक्ति परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा स्वयं ही उठाती हैं। चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी जुटाने से लेकर खेतीबाड़ी, पषुपालन तक। इन कामों का ज्यादातर भार महिलाओं पर होता है। बात चाहे रसोई बनाने के लिए लकड़ी का इंतजाम हो या फिर पषुपालन के लिए घास का इंतजाम। दोनोें जिम्मेदारियों के लिए जंगल जाना पड़ता है। जहां जिम्मेदारियों के निर्वहन के साथ ही जान का जोखिम भी कम नहीं होता।

सीएम त्रिवेन्द्र ने समझी महिलाओं की पीड़ा

सरकार कागजों में दर्ज 562 का आंकड़ा भले ही डरावना है। लेकिन हकीकत इससे भी कई डरावनी इसलिए है क्योंकि इस तरह के कई मामले पूर्व में दर्ज ही नहीं होते रहे। हाल के वर्षों में तो सरकार और प्रषासन की सक्रियता के साथ ही जन जागरण से गुलदार व अन्य हमलों में हुई मौतों के रिकार्ड दर्ज होते रहे हैं। लेकिन चट्टान से गिरने, तेज बहाव में बहने या अन्य दुर्घटनाएं पूर्व से ही सामान्य मौतों की ही श्रेणी में रहती रही हैं। जाहिर तौर पर इस पीड़ा को हर कोई नहीं समझ सकता। लेकिन मौजूदा सीएम ने इस अनकहे दर्द को बखूबी समझा। और उस दिशा में सकारात्मक और प्रभावी प्रयास भी किए।

Uttarakhand CM trivendra singh rawat news

प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जब से प्रदेश की बागडोर संभाली। तो पहले गांव गांव तक रसोई गैस पहुंची और ग्रामीण महिलाओं के सिर से लकड़ी का बोझ कम हो गया। लकड़ी के लिए जंगलों का जोखिम भी कम हो गया है। अब प्रदेष सरकार महिलाओं के सिर से घास की गठरी का बोझ कम करने की घस्यारी योजना बना रही है। पीड़ा मिटाने में गंभीरता दिखाते हुए त्रिवेंद्र सरकार इस दिषा में तेज से काम कर रही है। ताकि मातृषक्ति के जान के जोखिम को कम नहीं बल्कि पूरी तर से खत्म किया जा सके।

निसंदेह ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने महिलाओं के उस जोखिम को कम करने का प्रयास किया है जिसमें कई महिलाएं अपनी जान तक गंवा चुकी हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि त्रिवेंद्र सरकार की योजना जल्द धरातल पर उतरे और वन जीवों के हमलों या चट्टान से गिरने या पानी में बहने से मौतों पर विराम लगे।

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