देहरादून- प्लास्टिक वेस्ट फैलाने वाली 10 बड़ी कम्पनियों को जारी होगा नोटिस, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लिया बड़ा फैसला

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पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील उत्तराखण्ड (Uttarakhand) में प्लास्टिक वेस्ट (Plastic Waste) को रोकने के लिए राज्य का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (State Pollution Control Board) अब बड़ा कदम उठाने जा रहा है। जिसके तहत बोर्ड ने 10 बड़ी कम्पनियों को चिन्हित किया है जिनके उत्पाद राज्य में प्रदूषण फैलाने के लिए सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार पाया गया हैं।

बोर्ड अब इन कंपनियों को नोटिस (Notice to Companies) जारी कर पूछने जा रहा है कि वह अपने उत्पादों से होने वाले प्लास्टिक प्रदूषण (Plastic Pollution) को रोकने के लिए क्या कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि एक रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में प्लास्टिक से होने वाला प्रदूषण चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है।

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action against plastic waste in uttarakhand

नोटिस की तैयारी

उत्तराखण्ड के लिए वेस्ट मैनेजमेंट सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। देहरादून से ही हर रोज़ 269 टन कूड़ा निकलता है तो हरिद्वार से 255 टन कूड़ा। इसमें प्लास्टिक वेस्ट में सबसे ज्यादा ब्रांडेड कम्पनियों के उत्पादों का होता है। उत्तराखंड सरकार ने पॉलिथीन की थैलियों पर तो प्रतिबंध लगाया दिया है लेकिन इन उत्पादों से पैदा होने वाले प्लास्टिक कूड़े का कोई हल नहीं है।

चिंताजनक है प्लास्टिक वेस्ट

जनवरी में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने राज्य सरकारों को पर्यावरणीय प्रदूषण से लड़ने की योजनाओं पर काम करने के निर्देश दिए थे। अप्रैल तक मांगी गई रिपोर्ट में प्लास्टिक के सिस्टमेटिक डिस्पोज़ल के लिए एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश थे लेकिन 25 राज्यों ने यह रिपोर्ट नहीं दी थी।

उत्तराखण्ड में प्लास्टिक वेस्ट डिस्पोज़ल को लेकर काम कर रही एनजीओ गति फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल कहते हैं कि सवा करोड़ से भी कम की आबादी वाले उत्तराखंड में हर साल 6-7 करोड़ पर्यटक आते हैं और वह उसी अनुपात में प्लास्टिक वेस्ट भी छोड़ जाते हैं। वह कहते हैं कि पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का यह कदम देर से ही उठाया जा रहा लेकिन ज़रूरी कदम है। उत्तराखंड को प्लास्टिक वेस्ट को मना करना ही होगा।

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