COVID-19: SRMS मेडिकल कालेज में हुआ कोरोना पर डिस्कशन, बताया कैसे बचें इस महामारी से

बरेलीः कोरोना वायरस (Corona Virus) से प्रभावितों की बढ़ती संख्या से सभी चिंतित हैं लेकिन इस बीमारी से बचाव का एक ही उपाय है। वह है सावधानी। वह चाहें लॉकडाउन (Lockdown) के रूप में बाहर घूमने से खुद को रोकना हो या बाहर से आने पर परिवार को बचाने के लिए खुद को क्वारंटीन (Quarantine) करना। यह सब सावधानियां ही हैं। इन्हीं को अपना कर हम खुद के साथ अपने परिवार को कोरोना संक्रमण (Corona Infection) से बचा सकते हैं साथ ही अपने मुहल्ले और शहर को भी। यह बात एसआरएमएस मेडिकल कालेज (SRMS Medical College) में कोविड 19 पर पैनल डिस्कशन (Panel Discussion) के दौरान डा.ललित सिंह ने कही। पैनल में बताया गया कि कोविड प्रभावित से 15 क्लोज कांटेक्ट (Close Contact) व्यक्तियों के पहले संक्रमित होने की संभावना ज्यादा होती है।
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एसआरएमएस मेडिकल कालेज के आडिटोरियम (Auditorium) में आज सामाजिक दूरियों (Social Distancing) को बनाए रखते हुए कोविड 19 से बचाव पर पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया। इसमें मेडिकल कालेज के विशेषज्ञ डाक्टरों ने हिस्सा लिया। पैनल का संचालक क्रिटिकल केयर और पल्मोनरी विभाग (Critical Care & Pulmonary Department) के एचओडी डा.ललित सिंह ने किया। उन्होंने कोरोना 19 की बेसिक जानकारी दी और पैनल डिस्कसन की जरूरत बताई।
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माइक्रोबायोलाजी विभाग (Microbiology Department) के एचओडी डा.राहुल गोयल ने कोरोना वायरस के बारे में सभी को जानकारी दी। बताया कि इससे संक्रमितों का सैंपल कैसे और कहां से लेना चाहिए। जिससे खुद का भी बचाव हो सके। गायनेकोलोजिस्ट डा.जेके गोयल ने कहा कि लोगों में भ्रांति है कि अगर कोई गर्भवती कोविड-19 से संक्रमित है तो उसके बच्चे पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि कोरोना प्रभावित महिला से गर्भ में पल रहे उसके बच्चे में संक्रमण फैला हो। ऐसे में यह बात निराधार है और घबराने की जरूरत नहीं। डा.पीएल प्रसाद ने बच्चों में इससे प्रभावित होने की आशंकाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हालांकि बच्चों को यह संक्रमण काफी कम प्रभावित करता है फिर भी इससे बच्चों का बचाव करना जरूरी है।
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डा.राजीव टंडन ने कोविड-19 के फैलने की वजहों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसके फैलने की मुख्य वजह खांसी है। संक्रमित की खांसी से एयरोसाल (Aerosol) स्वस्थ इंसान को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित मनुष्य में खांसी और जुकाम के साथ बुखार व सांस लेने में दिक्कत होना अनिवार्य लक्षण है। बुखार होने और सांस उखड़ना ही इसे सामान्य फ्लू (Common Flu) से अलग करता है। डा.एमपी रावत ने कोविड-19 की इंवेस्टिगेशन (Investigation) की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसकी जांच में ल्यूकोसाइट्स काउंट (Leucocytes Counts) कम हो जाता है। ऐसे में डी डायमर टेस्ट जरूरी हो जाता है। यह टेस्ट भी पाजिटिव आता है। उन्होंने कोरोना पीड़ितों की देखभाल, उनके इलाज पर भी चर्चा की। साथ ही कहा कि संक्रमित लोगों को ठीक करने के लिए हाइड्रोक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) ठीक है लेकिन स्वस्थ मनुष्य द्वारा हाइड्रोक्लोरोक्वीन लेने पर नुकसान की आशंका ज्यादा है।
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डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा.आरपी सिहं ने कोविड-19 पीड़ितों के इलाज में बरती जाने वाली सावधानियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इनके इलाज और तीमारदारी के समय पर्सनल प्रोटेक्शन (Personal Protection) बेहद जरूरी है। उन्होंने पहले खुद को प्रोटेक्ट करने की सलाह दी। डा.नीरज प्रजापति ने कोरोना प्रभावितों की एक्सरे रिपोर्ट (X-ray Report) में फेफड़ों के बाहर की ओर हल्के सफेद धब्बे होने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हालांकि यह अनिवार्य लक्षण नहीं है। कई बार एक्सरे में सफेद धब्बे नहीं आते। जो बाद में सीटी रिपोर्ट (CT report) में आ जाते हैं। डा.निपुन अग्रवाल ने कहा कि कोविड 19 से पीड़ित व्यक्ति में लक्षण दो से 14 दिनों में दिखते हैं। कुछ में यह दो दिन में ही दिखने लगेंगे तो कुछ में 14 दिन में। ऐसे में सावधानी बरतनी जरूरी है और 14 दिन क्वारंटीन में रहना बेहद जरूरी भी। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित व्यक्ति औसतन 2.3 से लेकर 3.4 लोगों को संक्रमित कर सकता है। 15 क्लोज कांटेक्ट लोग उससे संक्रमित हो सकते हैं। मरीज के साथ घर में रहने वाले, दो मीटर से कम दूरी से 15 मिनट तक आमने- सामने बात करने वाले लोगों को क्लोज कांटेक्ट कहते हैं। डा.किशन सिंह ने आईसीयू में मरीजों की तीमारदारी के संबंध में बरती जाने वाली सावधानियों का जिक्र किया।
पैनल डिस्कशन के मौके पर एसआरएमएस ट्रस्ट (SRMS Trust) के चेयररमैन देव मूर्ति, डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन आदित्य मूर्ति, मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल डा.एसबी गुप्ता, अन्य चिकित्सक, नर्सिंग इंचार्ज, विद्यार्थी, कोविड 19 मरीजों की देखभाल के लिए बनाई गई टीमों के सदस्य मौजूद रहे।
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