iimt haldwani

छत्तीसगढ- यहां गर्म सलाखों से किया जाता है बीमारी का इलाज ! वह भी नि:शुल्क

81

बडगांव (कांकेर)- छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग लोहे की गर्म सलाखों से दगवाकर कई बीमारियों का उपचार करा रहे हैं। छत्तीसगढिया बोलचाल की भाषा में इसे ‘आंकना’ कहते हैं। इस तरीके से इलाज करने वाले इसे पूरी तरह कारगर होने का दावा करते हैं, जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। हालांकि पीडि़त इससे आराम मिलने की बात कहते हैं। जबकि डॉक्टर इलाज के इस तरीके को काफी खतरनाक व जानलेवा मानते हैं। हालांकि, सरकार की ओर से समय-समय पर इस तरह के इलाज से बचने की सलाह दी जाती है।

drishti haldwani

kan2

नि:शुल्क होता है इलाज

शरीर के किसी अंग में नसों की जकडऩ से व्यक्ति दर्द से बेहाल हो, उस स्थिति में कोई डॉक्टर अल्ट्रावॉयलेट रेज से इलाज की सलाह देता है। लेकिन छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में ऐसे किसी पीडि़त की नसों को गर्म सलाखों से दाग कर इलाज किया जा रहा है। सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि झारखंड, ओडिशा के आदिवासी इलाकों में भी गर्म सलाखों से शरीर दागकर कई बीमारियों के इलाज का दावा किया जाता है। लोगों का कहना है कि ये कई बीमारियों में दर्द से मुक्ति की अचूक दवा है। इलाज की इस पद्धति पर लोगों का काफी भरोसा है। जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी दूर नक्सल प्रभावित कांकेर जिले के हर पांच-दस गांव में एक ऐसा वैद्य मिल जाएगा, जो कथित रूप से आंक कर ही कई रोगों का इलाज करता है। इनमें से ज्यादातर नि:शुल्क सेवा देते हैं।

मांसपेशियों व नसों की जकडऩ की बीमारी का इलाज

मांसपेशियों में खिंचाव या नसों की जकडऩ एक आम बीमारी है। छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में इसके इलाज के लिए शरीर के जिस हिस्से में दर्द होता है, उससे जुड़ी नसों को गर्म सलाखों से दागते हैं। नसों को दागने से पहले लोहे की पतली सलाखों को आग पर काफी देर गर्म किया जाता है।

kn

लकवा जैसी बीमारी के इलाज का भी दावा

यहां के ग्रामीण इलाज के इस तरीके पर काफी भरोसा करते हैं। उनकी मानें तो यदि नसों की सही पहचान कर आंकने (दागने) वाला हो, तो लकवा जैसी गंभीर बीमारी में भी राहत संभव है। इलाज की यह पद्धति काफी पुरानी है। इसका इस्तेमाल पेट और गले सहित कई दूसरी बीमारियों के लिए भी होता है।

कैसे होता है गर्म सलाख से इलाज

सलाखों से दागकर इलाज करने वाले एक व्यक्ति के मुताबिक, नसों को दागने से पहले पतली-पतली सलाखों को गोबर के कंडों पर काफी देर गर्म किया जाता है। फिर शरीर पर दर्द और बीमारी से जुड़ी नसों की पहचान की जाती है। इसके बाद लोहे की सलाखों को नसों पर जगह-जगह दागकर सिकाई की जाती है। मरीज को फौरन राहत हो जाती है।