छत्तीसगढ़-भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की रेस में डॉ.रमन सिंह, विजय बघेल व विष्णुदेव ….

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छत्तीसगढ़ में आपसी गुटबाजी के भंवर में फंसी भाजपा को उबारने की तैयारी शुरू हो चुकी है। भाजपा की कमान आदिवासी नेता के हाथ में ही रहने के संकेत हैं। भाजपा अध्यक्ष के लिए जो नाम आगे चल रहे है उसमें विष्णुदव साय को एक गुट अध्यक्ष बनाने को लिए तूला हुआ है, वहीं दूसरा गुट साय को धीमी गति वाला, निष्क्रिय साबित करने के लिए तूला हुआ है, तो एक और गुट पूर्व मुख्यमंत्री को फिर से भाजपा का मसीहा बनाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है।

बघेल को उतारने की चर्चा भी

रमनसिंह के साथ खड़े लोगों का कहना है कि रमनसिंह 15 साल तक मुख्यमंत्री रहे है, उससे पहले नव गठित छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष रहते हुए जोगी सरकार के खिलाफ हल्ला बोलकर 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को उम्मीद से ज्यादा सीटों पर जीत दिलाकर सरकार बनाकर 15 साल राज करने का इतिहास रचा है। वैसे राज्य में कांग्रेस सरकार के खिलाफ आक्रामक नेतृत्व के लिए दुर्ग सांसद विजय बघेल को उतारने की भी चर्चा है। 3 से 5 दिन में भाजपा को नया अध्यक्ष मिल जाएगा।

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आपसी गुटबाजी चरम पर

पिछले एक साल में भाजपा संक्र्रमण काल से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव की हार का सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। भाजपा को संक्रमण काल से मुक्त करने ऐसे अध्यक्ष बनाने चाहते है जो तेजी से जनता का विश्वास जीत सके। इसके लिए विष्णुदेव साय, सांसद संतोष पांडेय, रामविचार नेताम, राजेश मूणत के नाम सामने आते ही एक गुट ने रमनसिंह का नाम भी सामने आ चुका है। भाजपा 15 साल तक छत्तीसगढ़ में और वर्तमान में केंद्र में राज करने वाली अनुशासित पार्टी होते हुए भी आपसी गुटबाजी चरम पर है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद जेपी नड्डा की टीम छत्तीसगढ़ में ऐसे तेज तर्रार नेता की तलाश कर रही है जो भाजपा में नए प्राण फूंंक सके।

रमनसिंह पर भी आलाकमान की नजर

भाजपा आलाकमान ने रमनसिंह के नाम पर भी विचार करना शुरू कर दिया है ऐसी भी खबर आ रही है। अब सच क्या है यह तो भाजपाई ही जानें। लेकिन सूत्र बताते है कि डा. रमनसिंह उम्र दराज होने के कारण आलाकमान ने उन्हें वरिष्ठता के क्रम में रखा है, जिससे उनके चाहने के बाद पार्टी उन्हें अध्यक्ष नहीं बनाने का मन बना रखा है। शायद उन्हें केंद्र में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना चाहती हो।

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