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चौखुटियां-पढिय़े आखिर क्यों राज्य सरकार से नाराज हुआ उत्तराखंड के सुर सम्राट स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी जी का परिवार, ऐसे बयां किया अपना दर्द

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चौखुटियां-हाल ही में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी को संगीत नाटक अकादमी सम्मान मिलने के बाद उत्तराखंड के संगीत जगत में हलचल मची है। उत्तराखंड को संगीत से रूबरू कराने वाले उत्तराखंड में संगीत के सुर सम्राट स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी जी को राष्ट्रीय पुरस्कार की मांग उनके चाहने वालों से लेकर परिजनों और कई गायक कलाकारों ने की है। आज उत्तराखंड की संस्कृति जिस मुकाम पर पहुंची है। इसमें सबसे बड़ा योगदान स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी जी का है।

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कुमाऊं-गढ़वाल को एक सूत्र में पिरोने का काम गोपाल बाबू ने अपने गीतों के माध्यम से किया। आज उनके गीतों को लोग मंचों पर गाते है कई लोग उनके गीतों को अपनी आवाज दे चुके हैं। लोगों ने सोशल मीडिया पर सुर सम्राट स्व. गोपाल बाबू को राष्ट्रीय अवार्ड दिये जाने की मांग उठाई है जिस पर हजारों लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी है। उनके पुत्र रमेश बाबू गोस्वामी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपने पिता के लिए आवाज उठाई है।

Meera Goswami

पति ने जिंदगीभर उत्तराखंड की संस्कृति को संवारा- मीरा गोस्वामी

सुर सम्राट स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी जी की धर्मपत्नी मीरा गोस्वामी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके पति गोपाल बाबू गोस्वामी जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन उत्तराखंड की संस्कृति, परम्परा व सभ्यता को जिन्दा रखने पर लगा दिया। उन्होंने अपनी गायकी और लेखनी से पूरे उत्तराखंड का नाम रोशन किया। जिनका नाम और गाने आज हर उत्तराखंडी को याद है। मीरा गोस्वामी ने कहा कि उन्होंने कभी कुमाऊं-गढ़वाल के मदभेद की बात नहीं की, आज राज्य सरकार ने उनकी ओर आंखे बंद कर लिये है। उन्होंने कहा कि पहाड़ में नशमुक्ति से लेकर दहेज प्रथा तक बंद करने को गोपाल बाबू ने अपने गीतों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया। उनका गीत हिवांला को ऊंचा डाना प्यारों मेरो गांव, छबिलो गढ़वाल मेरो रंगीलों कुमाँऊ, बेडू पाको बारामासा, कैले बजै मरूली, हाई तेरी रूमाला, रामी बौराणी, राजूला मालू शाही, हरूहीत जैसे गीतों से पूरे उत्तराखंड ही नहीं यूपी में भी अपना नाम कमाया। लेकिन आज राज्य सरकार ने उनकी तरफ मुंह फेर लिया है।

Ramesh Babu Goswami

सरकार ने की सुर सम्राट की अनदेखी-रमेश बाबू

उत्तराखंड के सुपरस्टार लोकगायक व सुर सम्राट स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी के सुपुत्र रमेश बाबू गोस्वामी ने कहा कि राज्य सरकार ने जिस तरह उत्तराखंड की संस्कृति को लेकर मतभेद पैदा किया है उससे वह काफी आहत है। रमेश बाबू ने कहा कि उनके पिता ने दिन-रात एक कर उत्तराखंड की संस्कृति को संवारने के लिए अपना घर परिवार तक त्याग दिया। लेकिन सरकार ने आज उनकी कोई कद्र नहीं की। वह अपने दम पर हर साल अपने पिता जी का जन्मोत्सव चौखुटिया में मनाते है जिसमें कलाकारों को मंच देकर उन्हें प्रोत्साहन राशि भी देते है। लेकिन सरकार ने कभी भी उनकी कोई मदद नहीं की। उन्होंने अपने पिता को राष्ट्रीय पुरस्कार, एक राजमार्ग का नाम गोस्वामी जी के नाम पर और प्रदेश में गोपाल बाबू के नाम से अवार्ड जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोगों को तीलू रौतेली पुरस्कार दिया जाता है वैसे ही संगीत जगत में लोगों को सुर सम्राट गोपाल बाबू गोस्वामी जी के नाम का अवार्ड दिया जाय। उन्होंने राज्य सरकार से अपने पिता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार दिये जाने की मांग की।

Gopal Babu Songs

पिता की विरासत संभल रहे पुत्र रमेश बाबू

बता दें कि 2 फरवरी 1942 में चौखुटियां के चांदीखेत में जन्मे सुर सम्राट गोपाल बाबू गोस्वामी ने उत्ताराखंड के संगीत जगत में कई दशकों तक एक तरफ राज किया। वर्तमान में उनका परिवार चांदीखेत चौखुटियां में निवास करता है। उनकी सारी संपत्ति उनकी पत्नी मीरा गोस्वामी के नाम पर है। उनके छोटे बेटे रमेश बाबू गोस्वामी अपने पिता की विरासत को संभाल रहे है। रमेश पिता के नक्शेकदमों पर चल रहे है। गोपाल बाबू और उनके बेटे रमेश बाबू की आवाज काफी मिलती-जुलती है। इसकी का नतीजा है कि जब रमेश बाबू ने अपने पिता जी के गीत गोपूली को एक नये अंदाज में गाया तो लोग झूम उठे। यू-ट्यूब पर इस गीत को अभी तक 72 लाख से ऊपर लोग देख चुके हैं। आज हर शादी-विवाह में इस गाने ने अपना कब्जा जमाया है। रमेश बाबू उत्तराखंड को कई सुपरहिट गीत दे चुके हैं।

गोपाल बाबू की गीतों से प्रभावित हुई थी स्व. इंदिरा गांधी

स्व. गोपाल बाबू की गायकी से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी इतनी प्रभावित हुई कि उन्होंने गोपाल बाबू को पत्र भेजकर बधाई दी जो आज भी उनके परिजनों के पास मौजूद है। इसके अलावा गोपाल के गीतों की धुन बॉलीवुड तक सुनाई दिये। तब राजश्री प्रोडक्शन ने उन्हें बॉलीवुड में गाने के लिए आमंत्रण भेजा लेकिन गोपाल बाबू ने जवाब दिया कि वह सिर्फ अपनी संस्कृति को संवारने के लिए उत्तराखंड के लिए गायेंगे। गोपाल बाबू द्वारा गाये गये गीतों को आज भी लोग देश-विदेशों में सुनते है और गाते है। इनता सबकुछ करने के बाद उन्हें नजरअंदाज करना परिजनों की नाराजगी जायज है। फिलहाल देखने वाली बात यह है कि राज्य सरकार गोपाल बाबू गोस्वामी जी के लिए क्या करती है।