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Bareilly: बरेली की बेटी का हुआ अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम में चयन

बरेली: समाज में बेटियां अपनी प्रतिभा दिखाकर यह साबित कर रहीं हैं कि वे बेटों से कम नहीं हैं। इसका जीता जागता उदाहरण बरेली के नवाबगंज (Nawabganj) में देखने को मिला है। यहां की बेटी इला खान का झारखंड अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम (Under-19 Women’s Cricket Team) में विकेट कीपर बल्लेबाज (Wicket Keeper Batsman) के रूप में चयन हो गया है।
ila khan selected in under 19 women cricketअपनी लगन और मेहनत से चयनित बेटी ने बताया कि वह बचपन से ही राष्ट्रीय टीम में खेलने का लक्ष्य लेकर चल रही हैं। अभी तो केवल शुरुआत है। बुलंद हौसले वाली इला मंगलवार को झारखंड रवाना भी हो गईं हैं। इला खान के पिता मोहम्मद आसिम प्रीटिंग प्रेस (Printing Press) चलाते हैं। आसिम की चार बेटियां और एक बेटा है। इला चौथे नंबर की बेटी है। इला खान जीजस कॉलेज से की इंटर तक की पढ़ाई की। उन्‍होंने यहीं से क्रिकेट कोच नसीर अहमद की देखरेख में क्रिकेट खेलना सीखा। हाईस्कूल में पहुंचने पर इला ने कॉलेज टीम से खेल शुरू किया।

इला अपनी प्रतिभा के बल पर धीरे-धीरे आगे बढ़ती गईं। इससे पहले वह दिल्ली, कानपुर, लखनऊ में महिला ट्रॉफी में खेल चुकी हैं। उनके दमदार खेल ने सभी को आकर्षित किया। अच्छी विकेट कीपिंग के साथ उन्होंने मैदान पर ताबड़तोड़ रन बनाए। यही कारण रहा कि उनके चयन को लेकर किसी को दुविधा नहीं रही। कुछ दिन पहले उन्हें झारखंड टीम के अंडर -19 टीम में खेलने की सूचना दी गई। इस पर घर के साथ कस्बे में भी खुशी का माहौल छा गया। इला टीम की ओर से खेलने के लिए झारखंड रवाना हो गईं हैं। कोच के साथ ब्रहमानंद, विपिन शर्मा, यशपाल शर्मा, सुनील मिश्रा, विक्रमवीर आदि ने इला को बधाई दी है।

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अब टीईटी और सी-टीईटी के लिए मिलेंगे केवल तीन मौके

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनना अब आसान होता नही दिख रहा। नई शिक्षा नीति के अनुसार बी.एड या डी.एल.एड प्रशिक्षण (D.El.Ed training) प्राप्त कर चुके प्रशिक्षुओं को अब शिक्षक के पद के लिए स्वयं को‌ योग्य साबित करने के सिर्फ तीन ही मौके मिलेंगे।
ctet and tet
परीक्षा नियामक प्राधिकारी प्रयागराज (Examination regulatory authority Prayagraj) अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि जो‌ प्रशिक्षु टीईटी या सी-टीईटी (TET and CTET) की परीक्षा में तीन बार भाग ले चुके होंगे वो चौथी बार टीईटी या सी-टीईटी की अर्हता परीक्षा में भाग नही ले पाएंगे। जिसमें टीईटी तीन बार  और सी-टीईटी दो बार शामिल है। जनरल व ओबीसी (General and OBC) छात्रों को दो बार और एससी व एसटी (SC and ST) छात्रों को‌ तीन बार मौके दिये जाएंगे।

इसलिए बेहतर है छात्र उचित तैयारी के साथ परीक्षा में सम्मिलित हो और तीन बार से पहले‌ ही टीईटी या सी-टीईटी पास कर लें। यह नियम 2020 की जनवरी में दी गयी टीईटी की परीक्षा से लागू हो चुका है अर्थात जो छात्र 2020 में परीक्षा दे चुके है परन्तु उत्तीर्ण नहीं हुए उनके पास अब महज दो मौके और बचे है।

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Corona Virus: होली के बाजार पर भी पड़ने लगा वायरस का असर

Corona Virus:चीन के कोरोना वायरस (Corona Virus) से संक्रमण (Infection) का असर होली के बाजार (Market) में भी दिखने को मिल रहा है। दिसंबर तक जितना भी चीनी प्रोडक्‍ट (Product) बाजार में आया उसे छोड़कर पूरे बाजार देशी आइटम (Item) देखने को मिल रहे हैं। होली पर आने वाले पिचकारी, मुखोटे व अन्‍य प्रोडक्‍ट तक खूब देसी आइटम बाजार में देखने को मिल रहा है। लोग संक्रमण के चलते चीनी सामान को खरीदने से भी बच रहे हैं।
corona virus
होली को लेकर बाजारों में पूरी तैयारी चल रही है। हर बार की तरह छोटी-बड़ी सभी तरह की पिचकारी, रंग, मुखौटा, स्प्रे आदि आइटम का बहुत बड़ा बाजार लगता है। जिसमें करीब 80 से 85 फीसदी सामान चाइना से आता था। इस बार कोरोना वायरस के चलते संक्रमण की दहशत पूरे बाजार में देखने को मिल रही है। जिसकी वजह से हर बार की तरह बाजार में चीनी प्रोडक्ट्स कम देखने को मिल रहे हैं। जिसका फायदा देसी प्रोडक्ट को मिल रहा है और यह सस्ता भी है। जिसकी वजह से बाजार में देसी प्रोडक्ट की मांग भी बढ़ी है।

वहीं बाजार में व्‍यापारियों (Merchants) की मानें तो हर साल चीन से चिप्स, कचरी, चॉकलेट, समेत अन्य कई प्रकार के आईटम जो बाजार में आते थे। वह आईटम सस्‍ते तो होते थे परंतु स्वादिष्ट नहीं। इस बार पिचकारी रंग स्प्रे इत्यादि सामान समेत खाने-पीने की वस्तुएं जैसे चिप्स, कचरी पापड़ी एवं अन्‍य प्रकार के स्वदेशी सामानों को बाजार में खूब पसंद किया जा रहा है।

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भाई ने दिया साथ तो बहन राष्‍ट्रीय स्‍तर पर झटक लाई गोल्‍ड मेडल 

बरेली (Bareilly) के इज्जत नगर की रेनू बोरा को खेलों में कोई रुचि (Interest) नहीं थी। एक दिन उनके भाई संतोष सिंह बोरा ने कहा कि तुम दौड़ती बहुत तेज हो, स्कूल की प्रतियोगिताओं में भाग लिया करो। भाई ने दौड़ने के लिए प्रोत्साहित किया तो रेनू ने स्कूल की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। इसके बाद स्कूल से शुरू हुआ यह सफर राष्‍ट्रीय स्‍तर तक पहुंच गया। रेनू ने अब तक 5 गोल्ड मेडल (Gold Medal) समेत 7 पदक जीते हैं।

जिला स्तर (District Level) पर जीतने के बाद रेनू के कदम प्रदेश स्तर (State Level) तक पहुंच गए। इसके लिए उन्होंने बहुत ही कठिन परिश्रम किया। उनकी कड़ी मेहनत और जज्बा इतना पक्‍का था कि वह प्रदेश स्तर पर पहले ही प्रयास में 800 मीटर की दौड़ में गोल्ड मेडल जीत कर अपने परिवार का नाम रोशन किया। इसके बाद प्रदेश स्तर पर ही 10 मीटर की मैराथन दौड़ में गोल्ड जीतकर यह बता दिया कि वह और भी बेहतर कर सकती हैं। प्रदेश स्तर पर होने वाली क्रास कंट्री रेस में रेनू ने दो गोल्ड, 2 सिल्वर और दो कांस्य पदक जीते है।
रेनू में नेशनल लेवल पर ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी रेस (All India University Race) में 10,000 से अधिक प्रतिभागियों में टॉप-10 में जगह बनाते हुए सातवां स्थान पर आयी थी। इसके बाद इंजरी के कारण कुछ समय के लिए वह खेल से हट गई लेकिन बाद में उन्होंने फिर अभ्यास किया और इसे ही अपना करियर बना लिया। रेनू आज शहर के कॉलेज में खेल में स्टूडेंट को प्रशिक्षित करती हैं।
रेनू बोरा कहती हैं कि उनके पिता रेलवे में काम करते हैं। ऐसे में उनके सामने आर्थिक संकट तो नहीं था लेकिन साथ में अभ्‍यास करने वाले खिलाड़ियों को देखा तो उनमे अधिकतर लोग बहुत गरीब परिवार से थे। पर उनमें एक चाहत थी कि वे देश के लिए पदक जीते। जुनून और हौसले की कमी नहीं थी लेकिन आर्थिक समस्याओं की बेड़ियां उनके पैरों में पड़ी थी इसलिए उनकी प्रेक्टिस बंद हो गई। आज भी उनके पास डाइट का पैसा नहीं है ऐसे में वे बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं।सरकार को खिलाड़ियों के डाइट की व्‍यवस्‍था तो करनी ही चाहिए।

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बरेली में 18 से होगी राष्‍ट्रीय स्‍तर बैडमिंटन प्रतियोगता

Indian senior major ranking prize badminton rivalry

18 फरवरी से 23 फरवरी तक इंडियन सीनियर मेजर रैंकिग प्राइजमनी बैडमिंटन प्रतियोगता का आयोजन बरेली स्‍पोर्ट्स स्‍टेडियम में होगा। एसोसिएशन सचिव अनिल मेहरोत्रा ने बताया कि इस बार प्राइजमनी को 51 हजार से बढ़ाकर 5 लाख कर दिया गया है। करीब 650 वरीयता प्राप्‍त सीनियर खिलाड़ी इस प्रतियोगता में हिस्‍सा लेंगे।

सचिव अनिल मेहरोत्रा ने बताया कि प्रतियोगता में हिस्‍सा लेने वाले खिलाड़ी उत्‍तराखंड, आसाम, दिल्‍ली, हरियाण, पंजाब, कर्नाटक, चंडीगढ़, उत्‍तर प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, तमिलनाडू, महाराष्‍ट्र, बंगाल, आंध्रप्रदेश, केरल से होंगे।उन्‍होंने बताया कि आल इंडिया बैडमिंटन प्रतियोगताएं 1978 में प्रारंभ की गई थी।

 

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द्वाराहाट के गणेश ने पावर लिफ्टिंग में जीता गोल्ड मेडल, रूस में ऐसे लहराया तिरंगा

Almora News- गणेश चंद्र पाठक ने मॉस्को (रूस) में विश्व पावर लिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने फाइनल में कुल 490 किग्रा भार उठाकर 470 किलोग्राम भार उठाने वाले रूस के लुइस एलन को पराजित कर यह उपलब्धि हासिल की। जीत के बाद पूरे देशभर में जश्र का माहौल है। गणेश चंद्र पाठक मूलरूप से अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट तहसील के दूरस्थ गांव निरकोट के रहने वाले है। रूस में यह प्रतियोगिता 13 से 15 दिसंबर तक आयोजित हुई थी। जिसमें भारत से 40 सदस्यीय टीम ने भाग लिया। जबकि प्रतियोगिता में 39 देशों के खिलाडिय़ों ने प्रतिभाग किया।

Ganesh Pathak
40 वर्षीय गणेश चंद्र पाठक एमटीएनएल दिल्ली से पावर लिफ्टिंग खेलते हैं। इससे पहले भी गणेश कई प्रतियोगिताएं जीत चुके हैं। गत दिनों मॉस्को में वल्र्‍ड पावर लिफ्टिंग कांग्रेस रसिया द्वारा आयोजित विश्व चैंपियनशिप में गणेश ने शानदार प्रदर्शन कर मास्टर कैटेगरी (90 से 100 किग्रा) में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने बैंच प्रेस में 120 किग्रा] डेड लिफ्ट में 190 तथा स्क्वायड में 180 कुल 490 किग्रा भार उठाकर इतिहास रच दिया। गणेश दिल्ली से अकेले भारत्तोलक थे। एमटीएनएल में बतौर लिपिक कार्यरत गणेश बचपन से ही इस खेल से जुड़े हैं। विगत 15 वर्षों से एमटीएनएल के लिए ही खेल रहे हैं।

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रुद्रपुर पहुंचे कपिल देव ने बच्चों को सिखाया सफलता का गुरू मंत्र, BCCI से मिली मान्यता पर कही ये बात

Cricketer Kapil Dev In Rudrapur,  भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज खिलाड़ियों में गिने जाने वाले नायक कपिल देव आज रुद्रपुर पहुंचे। कपिल देव रुद्रपुर में एमेनिटी पब्लिक स्कूल के कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि जब कभी भी मैदान में उतरो तो पढ़ाई के बारे में बिल्कुल मत सोचो और जब पढ़ाई करो तो मैदान के बारे में नहीं सोचोगे तभी आगे बढ़ोगे। क्‍यों हर काम में कंसनट्रेशन होना बेहद जरूरी होता है। और यही बात सफलता की गांरटी बनती है। उन्होंने बच्चों को कहा कि उत्तराखंड हो या कोई और प्रदेश, खिलाड़ी इंडिया के लिए खेलें।

Cricketer kapil dev in rudrapur

अगले साल रीलीज होगी कपिल देव की बायोग्राभी पर फिल्म

बता दें कि वर्ष 1983 में भारतीय क्रिकेट टीम ने वर्ल्डकप कपिल देव की मौजूदगी में ही जीता था। लेकिन इन दिनों कपिल देव अपनी बायोग्राभी (Kapil Dev Biopic) पर बन रही फिल्म को लेकर भी चर्चाओं में है। कबीर खान के निर्देशन में बनने वाली इस फिल्‍म में कपिलदेव की भूमिका निभा रहे हैं मशहूर अभिनेता रणवीर सिंह।

Kapil Dev biopic 83

फिल्‍म का नाम 83 है और मूल पटकथा लार्डस के मैदान में वेस्‍टेंडीज को हराकर भारत के विश्‍वविजेता बनने के इर्दगिर्द बुनी गई है। उस समय कपिलदेव टीम इंडिया के कैप्‍टन थे। बताया जा रहा है फिल्‍म अगले साल रिलीज होगी।

धोनी से सीख लें प्रदेश के युवा

एमेनिटी पब्लिक स्कूल में ‘कपिल देव पवेलियन’ का लोकार्पण पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर कपिल देव ने किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय में मौजूद सभी विद्यार्थियों को खेल और पढ़ाई दोनों मन लगाकर करने के लिए प्रेरित किया। कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए कठिन परिश्रम बहुत जरूरी है। इसके अलावा क्रिकेटर कपिल देव ने हाल ही में उत्तराखंड को बीसीसीआई से मिली मान्यता पर बोलते हुआ कहा कि मान्यता मिलने से कुछ नहीं होता कठिन परिश्रम खेल और प्रतिभा से खिलाड़ी आगे बढ़ते हैं। साथ ही कहा कि महेंद्र सिंह धोनी अपनी प्रतिभा के कारण ही क्रिकेट जगत में छाए हुए हैं। जबकि उस समय उत्तराखंड को बीसीसीआई से मान्यता नहीं मिली थी। इससे साफ स्पष्ट होता है कि प्रतिभा ही सब कुछ है।

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हल्द्वानी- इन महिला बॉक्सर के पंच ने दिलाया उत्तराखंड को मान, लेकिन जानिए सरकार से क्यूं है परेशान

Uttarakhand Sports News, बॉक्सिंग में देश भर की खिलाड़ियों को धूल चटा चुकी देवभूमी की कई महिला बॉक्सर आज सरकार की लचर व्यवस्था से जूंझ रही है। हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान, गोआ की दिग्गज खिलाड़ियों को अपने एक मुक्के में गिरा देने वाली ये महिला बॉक्सर एक साल से अपनी जीत की राशी के इंतजार में है। खिलाड़ियों की माने तो 2018 में हरियाणा के रोहतक में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड जीतने के बाद भी सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि अभी तक नहीं दी गई, जिससे खिलाड़ियों को आगे की तैयारी करने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

hema danu boxer uttarakhand

हल्द्वानी में के शिवालिक स्कूल में आयोजित राज्यस्तरीय सीनियर वोमेन प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने पहुंची हेमा दानू निवासी बागेश्वर ने बताया कि कड़े परिश्रम व तमाम दिक्कतों का सामने करने के बाद वह बॉक्सिंग के आज इस मुकाम में पहुंची हैं। हेमा ने बताया कि वह अभी तक 6,7 राष्ट्रीय व 20 स्टेट बॉक्सिंग चैम्पियन्शिप खेल चुकी है। जिसमें 2018 में उन्होंने कर्नाटक और राजस्थान को हराया। इसके अलावा हरियाणा के रोहतक में हुई चैम्पियन्शिप में उन्होंने सिलवर मेडल अपने नाम किया। हेमा की माने तो उत्तराखंड सरकार ने मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रोत्साहन राशि का प्रावधान रखा है।

खिलाड़ियों ने सरकार से की शिकायत

जो कि मेडल मिलने के एक साल के बाद भी उनको नहीं मिली है। हेमा के अवाला ब्रॉन्ज मेडल विजेता कविता अधिकारी, सपना बिष्ट, नीमा कोश्यारी की भी सरकार से यही शिकायत है। इन सब की माने तो ऐसी कई स्टेट चैपिंशिप में अपना लोहा मनवाने के बाद भी सरकार का इनकी ओर कोई ध्यान नहीं है। सरकार कभी भी समय पर प्रोत्साहन राशि उपलब्ध नहीं कराती। इतना ही नहीं 2018 में जीते गए मेडल की राशी आज तक नहीं मिली है।

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राष्ट्रीय खिलाड़ी होने के नाते हेमा बताती है कि खिलाड़ियों को अपने खेल को और भी बेहतर बनाने के लिए निरंतर अभ्यास करना जरुरी है। लेकिन अभ्यास के लिए सही ट्रेनिंग व पर्याप्त उपकरणों की कमी के कारण कई खिलाड़ी आगे नहीं बड़ पाते। साथ ही पैसो की कमी के चलते सही डाईट उनके शरीर को नहीं मिलती। ऐसे में सरकार को ऐसे खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए सभी महत्वपूर्ण जरूरतों का ध्यान रखना चाहियें। जिससे वह आगे जाकर प्रदेश व देश का नाम रोशन कर सकें।

बजट की कमी के कारण नहीं मिली प्रोत्साहन राशी

वही खिलाड़ियों की शिकायत पर उत्तराखंड खेल के संयुक्त सचिव धर्मेंद्र भट्ट ने कहा कि 2018 में वीजय खिलाड़ियों की प्रोत्साहन राशि जल्द ही उन्हें मिल जाएगी। उनकी माने तो प्रोत्साहन राशि के प्रावधान रखने के बाद से प्रदेश में मेडल लाने वाले खिलाड़ियों की संख्या में भारी इजावा हुआ है। जिसके चलते सरकार के पास बजट की कमी होने के कारण खिलाड़ियों को समय पर राशि नहीं उपलब्ध हो रही।

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संयुक्त सचिव की माने तो प्रदेश में महिला बॉक्सर्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। जिसके लिए सरकार अलग-अगल ऐज ग्रुप के अनुसार विभिन्न बॉक्सिंग प्रतियोगितायें आयोजित कर रही है। जिसमें जीते हुए खिलाड़ियों को सरकार अपने कॉलेजों में ट्रेन करती है। उत्तराखंड में ऐसे तीन कॉलेज पिथौरागढ़, चम्पावत और टनकपुर में है। वही महिला खिलाड़ियों को बढ़ावा देने और उनके खेल में और सुधार के लिए सरकार महिला कोच की भर्ती कर रही है।

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पिथौरागढ़- उत्तराखंड की इस होनहार बेटी का सीनियर महिला क्रिकेट टीम में हुआ चयन, मेहनत ऐसे लाई रंग

Uttarakhand Cricket news (Pithoragarh), उत्तराखंड की सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के तल्ला घोरपट्टा गांव में उस वक्त खुशी की लहर दौड़ पड़ी, जब गांव की ही एक होनहार बेटी नेहा मेहता का उत्तराखंड सीनियर महिला क्रिकेट टीम में चयन हो गया। मुनस्यारी तहसील के तल्ला घोरपट्टा के रहने वाली नेहा बचपन से ही क्रिकेट की शौकीन रही। अपनी मेहनत और लगन के बल पर नेहा पहले से ही कई चैंपियनशिप में हिस्सा लेती आई है।

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16 सदस्य सीनियर महिला क्रिकेट टीम में बनाई जगह

2018 में देहरादून में आयोजित स्टेट चैंपियनशिप, 2019 में रायपुर छत्तीसगढ़ में T20 सीनियर महिला रणजी ट्रॉफी की 16 सदस्य टीम का हिस्सा रही नेहा अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर प्रदेश की 16 सदस्य सीनियर महिला क्रिकेट टीम में जगह बनाने में कामयाब रही। बता दें कि नेहा के पिता डॉक्टर हैं और माता ग्रहणी, जिन्होंने बेटी को उसके सपनों के मुकाम तक पहुंचाने में मदद की और आज उन्हें अपनी इस होनहार बेटी पर गर्व महसूस हो रहा है।

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हल्द्वानी में होने जा रही ‘Kathgodam Half Marathon 2019’, ऐसे करें आवेदन

Kathgodam Half Marathon 2019, देश के विभिन्न राज्यों में मेराथन दौड़ का आयोजन करने वाली संस्था ‘थ्रील जोन’ हल्द्वानी में भी आगामी 3 तारीख को ‘काठगोदाम हाफ मेराथान 2019’ ‘फन रन’ अयोजित करने जा रही है। जिसमें 21, 10 और 5 किमी की दौड़ रखी गई है। जोकि नगर निगम इण्टर कॉलेज काठगोदाम से शुरु होकर हल्द्वानी बाईपास रोड से होते हुए कुवंर पुर चौराहे तक पहुंच कर पुन इसी रास्ते से वापस होकर नगर निगम इण्टर कॉलेज के में साप्त होगी।

काठगोदाम हाफ मेराथान 2019

‘काठगोदाम हाफ मेराथान 2019’ के हल्द्वानी आयोजन थ्रील जोन संस्था और ‘पाल ग्रुप बृजलाल हॉस्पिटल एडं रिसर्च सेन्टर द्वारा मिलकर कराया जा रहा है। तृतीय हाफ मेराथन के मुख्य अतिथि पुलिस उपमहानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र होंगे। इस दौरान मैराथन में दौड़ने वाले सभी प्रतिभागियों पर टाईमिंग चिप व ड्रोन कैमरों के माध्यम से निगरानी की जाएगी। मेराथन में हिमालयन ओपरोडर ग्रुप व देव भूमि नव निर्माण मंच द्वारा अपनी विशेष उपस्थिति दर्ज कराई जाएगी।

kathgodam half marathon 2019

कार्यक्रम की अधिक जानकारी देते हुए आयोजक बासित खान मण्डल ने बताया कि नगर में इस तरह की हाफ मेराथन दौड़ का आयोजन करने के पीछे उनका मुख्य मकसद काठगोदाम का नाम विश्व पटल पर उजागर करने के साथ-साथ सर्वसमाज में लगातार बढ़ रही नशे की प्रवृति के खिलाफ जन जागरुकता करना है।

kathgodam half marathon 2019

उन्होंने बताया कि दौड़ के दौरान मार्ग पर जगह-जगह धवकों की सुविधा के लिए स्पोंजिंग प्वाइंट बनाये जायेंगे। साथ ही मेडिकल सुविधा का जिम्मा पाल ग्रुप बृजलाल हॉस्पिटल व रिसर्च सेन्टर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अजय पाल सिंह द्वारा संभाला जाएगा। जिसके लिए बृजलाल हॉस्पिटल के चिकित्सक, नर्सिंग स्टॉफ व एम्बुलेन्स की व्यवस्था की गई है।

दौड़ के लिए ऑनलाईन करें प्रतिभाग

मेराथन दौड़ में प्रतिभाग करने के इच्छुक धावक ऑनलाईन https://www.townscript.com/e/kathgodam halfmarathan-2019 पर पंजीकरण करा सकते है। आन लाईन पंजीकरण कराने के लिए धावक A2Z टूर एण्ड ट्रैवल्स काठगोदाम के ऑफिस में मोबाईल संख्या-8077836354 या 9412085347 संपर्क भी कर सकते है।