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हल्द्वानी- बचपन में IAS और PCS की नेम प्लेट देखकर इस नौजवान ने साधा अपना लक्ष्य, पढ़िये संघर्ष से सफलता तक की कहानी

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हल्द्वानी- न्यूज टुडे नेटवर्क: जब आप किसी बड़े अधिकारी को अपने सामने से गुजरते देखते है, या फिर किसी अधिकारी के घर या दफ्तर के बाहर लगी नेम प्लेट देखते है, तो आप सब के मन में उसके इस रूतबे को देखकर कुछ ऐसी ही जिदंगी जिने का मन होता है। लेकिन हम में से कितने लोग असल में ऐसे मुकाम तक पहुंचने के लिए पूरी जी जान से मेहनत करते है। शायद एक या दो लोग, नहीं तो ज्यादातर इन्हें एक नजर देखकर अपनी रोजाना जिदंगी में खो जाते है। लेकिन ऐसे सपने को बचपन में स्कूली दिनों में देख के एक छात्र ने सच कर दिखाया। वह अपनी छोटी-सी उम्र में अपने सामने से देखे गये अधिकारी से इतना प्रेरित हुआ कि बड़ा होकर वही बनने की ठानी, फिर जुट गया इस सपने को साकार करने में। कड़ी मेहनत के बाद आखिर उसे अपनी मंजिल मिल गई। आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर पूरे देश में 218 रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। यह कारनामा करने वाला कोई और नहीं हल्द्वानी शहर के निवासी नमित पाठक है।

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आईएएस पीसीएस अफसर को देखकर तय किया लक्ष्य

आईएएस की परिक्षा उत्तीर्ण कर चुके नमित पाठक ने न्यूज टुडे नेटवर्क से बातचीत में बताया कि उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई नैनीताल के सेंट जोसेफ स्कूल से की। बचपन में जब वे स्कूल के लिए घर से निकलते थे तो रास्ते में उनको आइएएस पीसीएस अफसर अक्सर दिखाई देते थे। वह बताते है कि उनके दफ्तर के बाहर लगी नेम प्लेट उनका स्टाइल, रूतबा ये सब वे अक्सर देखते रहते थे। इतना ही नहीं स्कूल के किसी कार्यक्रम में भी अतिथि के तौर पर इन अधिकारियों को बुलाकर सम्मान दिया जाता था। जिसको नमित अपनी जिदंगी में भी उतारना चाहते थे। जिसके बाद अपनी आगे की पढ़ाई उन्होंने हल्द्वानी के सैंट थेरेसा स्कूल से पूरी की।

जहां से उन्होंने 12वीं कक्षा 86.6 प्रतिशत अंकों से पास की। जिसके बाद आइएएस अफसर बनने के लक्ष्य के साथ उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। जहां से आईएएस की तैयारी के साथ-साथ उन्होंने ऑनर जिओलॉजी से बीएससी और एमएससी पूरा किया। नमित ने बताया ये पहली बार नहीं था जब उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी। इससे पहले भी वे चार बार इस परीक्षा को दे चुके है। जबकि 2017 में वे इंटरव्यू में बाहर हो गए थे वही इससे पहले वर्ष 15 अंको से रह गए थे। लेकिन उनका लक्ष्य अफसर बनने का था। जिसको सभी कठिनाइयों के बाद भी उन्होंने पूरा किया।

अपने क्षेत्र की दिक्कतों को दूर करना चाहते है नमित

नमित ने बताया वह पहाड़ी इलाके में पले बड़े है। उनके पिताजी प्रकाश पाठक उत्तराखंड ग्रामीण बैंक से रिटायर्ड हो चुके है। जबकि उनकी माता हेमा पाठक कालाढूंगी जीजीआईसी में शिक्षिका है। उन्होंने बचपन से ही पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों को संघर्ष करते देखा है। उत्तराखंड के कई इलाके आज पूरी तरह से विकसित है। लेकिन कई इलाकों में अभी भी काफी कार्यों और उन कार्यों को पूरा करने वाले अधिकरियों की जरूरत है। उन्होंने बताया कि वे ऐसे ही लोगों का सहारा बनना पसंद करेंगे। वही उन्होंने बताया कि अपने पिता के बचपन के सपने को पूरा करके आज वे खुद पर बहुत ही गर्व महसूस कर रहे है। इतना ही नहीं इस जीत का श्रेय नमित ने अपने माता-पिता और बड़ी बहन हेमा पाठक को दिया। वही आई ए एस बनने पर शिक्षक मनमोहन जोशी ने भी बधाई दी है।