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बिचौलियों से निपटने के लिए किसान समूह और महिलाओं ने खोली राइस मिल, हो रही सुगंधित चावल की मिलिंग

छत्तीसगढ़- धान पैदा कर उसे सिर्फ बेचने तक सीमित छत्तीसगढ़ के किसान अब इसकी खुद ही मिलिंग कर चावल बनाने की इंडस्ट्री में भी दाखिल हो रहे है, ताकि बाजार और बिचौलियों की मुनाफाखोरी खत्म की जा सके। कोटा और लोरमी के तकरीबन सौ किसान समूहों ने मिलकर छोटी और मध्यम राइस मिलें खोली हैं। खास बात ये है कि यहां सिर्फ विष्णुभोग धान की मिलिंग हो रही है, जिसे समूह ही खरीद रहे हैं।

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ताकि बिचौलिए लाभ न उठा सकें

कुछ साल पहले कोटा, लोरमी व पेंड्रा में किसानों के ही समूह बनाए गए थे। उन्हीं समूहों ने अब छोटी-छोटी राइस मिलें खोल ली हैं। कोटा ब्लॉक में ही तीन जगह ऐसी राइस मिले हैं, जिनमें किसान सीधे ही अपना धान बेच रहे हैं। महिलाओं की समिति इस धान को छांटने और सुखाने के साथ-साथ मिलिंग के बाद पैकेजिंग में लगी है। इस प्रोडक्ट को सही मार्केट व कीमत दिलाने के लिए  एग्रीकॉन डॉट स्टोर नाम से ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट बनाई गई थी।

कई प्रदेशों में बेचा जा रहा है चावल

इसके जरिए चावल दिल्ली और मुंबई से लेकर ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और असम तक बेचा जा रहा है। इसे बेचने के लिए मंडियों का चक्कर तो खत्म हुआ ही है, मार्केट रेट भी सीधे किसानों को ही मिल रहा है। धान उत्पादन से पैकेजिंग तक होने वाले प्रोसेज में भी उन्हें रोजगार मिल रहा है। पिछले 2-3 साल के दौरान हर साल 25 लाख रुपए का तक का बिजनेस हुआ है, जो बढ़ रहा है।

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एक किलो में 15 रुपए मिल रहा मुनाफा

विष्णुभोग धान 30 रुपए किलो में खरीदकर मिलिंग के बाद पैकेजिंग कर रहे हैं। 100 किलो धान से 60 किलो चावल मिल रहा है। एक किलो विष्णुभोग चावल की लागत 65-70 रुपए पड़ रही है, जिसे 80-90 रुपए में बेच रहे हैं। खर्च वगैरह काटने के बाद 15 रुपए किलो के आसपास मुनाफा आ रहा है। इसमें 25 फीसदी राशि मिल मेंटेनेंस, 25 फीसदी इमरजेंसी फंड और 50 फीसदी बची राशि समूह से जुड़े किसानों में बंट रही है। किसानों के फेडरेशन में जमा पैसों से उन्हें ही खेती-किसानी के लिए 3 फीसदी ब्याज पर लोन दे रहे हैं।

सुगंधित चावल का रकबा 200 से 1000 एकड़ पहुंचा

कृषि वैज्ञानिको का कहना है कि कोटा-पेंड्रा में चल रहे इन छोटे राइस मिल से जुड़े किसानों से सिर्फ प्रदेश की पहचान रहे सुंगधित धान विष्णु भोग ही खरीदा जा रहा है। आज कोटा एरिया के 66 किसान समूह जुड़े हैं। हर समूह में करीब 10-10 सदस्य हैं, 700 के करीब किसान हैं। ये किसान ही महिला समूह द्वारा चलाए जा रहे राइस मिल पर धान बेचते हैं। उन्होंने बताया कि 3-4 साल पहले इन एरिया में विष्णु भोग धान की खेती सिर्फ 200 एकड़ में ही का जाती थी और यह सिमट रहा था। लेकिन इस राइस मिल व समूह के बनने से आज इन क्षेत्रों में 1000 एकड़ में विष्णु भोग का पैदावार किया जा रहा है। इस तरह के सुगंधित चावल प्रदेश की पहचान रहे हैं, जिसका उत्पादन दायरा बढ़ता जा रहा है।

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