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सावधान : अगर आप खरीदने जा रहे हैं सेकेंड हैंड बाइक या कार तो हो सकता है ये भारी नुकसान

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नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क । भारतीय बाजार में सेकेंड हैंड कार और बाइक्स का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। सेकंड हैंड कार या बाइक लेने से पहले कई बातें ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। बाइक या कार का कलर या लुक देखना ही काफी नहीं होता है। उसकी कंडीशन भी चेक करनी चाहिए। इसे चेक करने के कई तरीके हैं, ताकि गाड़ी खरीदनी है या नहीं, यह डिसाइड किया जा सके। आज हम बताने जा रहा है कि पुरानी कार लेते समय क्या-क्या सावधानियां रखनी चाहिए।

बॉडी डैमेज चेकिंग

पुरानी बाइक या कार की जांच करना सबसे जरुरी काम होता है। इसलिए गाड़ी में किसी भी प्रकार के डैमेज यानी कि टूट फूट की बारीकी से जांच करें। विशेषकर बाइक के फाइबर वो पार्ट्स को चेक करें। इसके अलावा बाइक का फ्यूल टैंक, शॉकर, चेन कॅवर, फ्रेम, व्हील इत्यादि को चेक करें।

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पहियों के टे्रड

बाइक के पहियों की जांच करना न भूलें, इसके लिए पहियों के ट्रेड को ध्यान दे देखें यदि पहियों के डिजाइन के ब्लॉक घिस गए हैं तो इसका मतलब आपको नए टायर लेने होंगे। इस बात पर भी गौर करें कि बाइक में सही टायर लगे हैं या नहीं। कई बार कुछ फ्रॉड किस्म के लोग पुरानी बाइक में खराब टायर लगा कर बेच देते हैं।

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इंजन की आवाज

यदि आपको बाइक के इंजन या फिर तकनीक के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है। तो आप अपने साथ कोई जानकार या फिर मैकेनिक साथ में ले जा सकते हैं। यदि ऐसा संभव नहीं है तो आप बाइक को खड़ी कर के इंजन को स्टार्ट कर के उसे ध्यान से सुनें। यदि किसी तरह की एक्स्ट्रा आवाज सुनाई देती है तो इसका मतलब साफ है कि बाइक के इंजन में कुछ खराबी है। इसलिए बाइक को मैकेनिक को दिखना जरुरी होगा।

इंजन का आयल

बाइक के इंजन आयल की भी जांच करें। आयल कैप को निकाल कर तेल को देखें, यदि तेल पूरी तरह से काला हो गया है और उसमें से जलने की गंध आ रही है। तो इसका मतलब साफ है कि बाइक की सर्विसिंग लंबे समय से नहीं की गई है। इसके अलावा आयल की मात्रा की भी जांच करें।

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टेस्ट ड्राइव और माइलेज

बाइक की टेस्ट ड्राइव करें, इस दौरान बाइक के हर फीचर का पूरा प्रयोग करें। इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर में देखें कि स्पीडोमीटर और अन्य इंटीकेटर्स काम कर रहे हैं या नहीं। बाइक की हेडलाइट की भी जांच करें। इसके अलावा बाइक की माइलेज की जांच करना न भूलें।

गाड़ी के कागजात

बाइक की ठीक ढंग से जांच करने के बाद बाइक के दस्तावेज जैसे कि रजिस्ट्रेशन पेपर, इंश्योरेंस पेपर इत्यादि की बारीकी से जांच करें। इसके अलावा सेल लेटर की भी मांग करें। यदि बाइक कहीं नजदीक से ही खरीदी गई हो तो एक बार डीलरशिप से भी बाइक के बारे में जानकारी हासिल करें।