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बरेली- पंडित राधेश्याम कथावाचक स्मृति समारोह का आयोजन शुरू, श्रीराम-लक्ष्मण के प्रेम ने मोहा मन

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बरेली-पूरे देश और विदेश में अपनी काव्य शैली से रामायण की रचना करके बरेली शहर के नाम को आलोकित करने वाले पंडित राधेश्याम कथावाचक की जयंती पर बरेली के संजय कम्युनिटी हॉल में बरेली के साहित्य प्रेमी लोगों, समाज सेवी और आयोजन समिति के द्वारा पंडित राधेश्याम कथावाचक स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। सात दिवसीय आयोजन 25 नबंवर से 1 दिसंबर तक चलेगा। हर दिन सांयकाल 7 बजे से विभिन्न नाट्य संस्थाओं द्वारा पंडित जी के नाटकों का मंचन किया जायेगा। समारोह के प्रथम दिन जिलाधिकारी नीतीश कुमार ने शंकर पुस्तक भंडार द्वारा लगाई गई पंडित जी के साहित्य की प्रदर्शनी का फीता काटकर उद्घाटन किया। इसके बाद मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया। पहले पंडित अरविंद जी द्वारा पंडित जी की रचनाओं का गायन किया गया। उसके बाद लक्ष्मण रेखा नाटक का मंचन किया गया।

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स्व. पंडित राधेश्याम कथावाचक द्वारा रचित रामायण का प्रसंग सीता हरण से प्रस्तुत लक्ष्मण-रेखा बड़ा ही मार्मिक प्रसंग है। लक्ष्मण द्वारा सुपनखा की नाक काटे जाने पर। खर दूषण के पास जाती है, परंतु श्रीराम के द्वारा उन दोनों को मृत्यु प्राप्त होती है। तब भयभीत होकर अपने भाई रावण के पास पहुंचती है, अपनी नाक कटने की सारी व्यथा रावण को सुनाती है और यह भी बताती है कि खर दूषण का वध अकेले राम ने कर दिया।


यह सुनकर रावण सोचने लगा कि जब एक अकेले राम ने उन सब को मार दिया तो बह सोचना लगा कि शायद नारायण का अवतार हो गया है इस बात को समझ कर बह समस्त राक्षस जाति के उद्धार के लिये सीता हरण का संकल्प करता है। रावण वहां भेष बदलकर माता सीता से भिक्षा मांगता है। माता सीता जब उसे दीक्षा दे देती है जब रावण आगे बढ़ता है तभी लक्ष्मण द्वारा खींची रेखा से एकदम आग उत्पन्न हो जाती है और वो भयभीत होकर पीछे हटता है सीता जी से कहता है कि रेखा से बाहर आकर भिक्षा दी जाती हैं। सीता का हरण हो जाता है। प्रभु राम लक्ष्मण के साथ जब कुटिया पर पहुचे तो वहां पर देखा तो सीता जी नहीं थी। तभी दोनो भाई सीता जी की खोज में निकल पड़े और बोले ।
हे खग हे मर्ग है भृमर बंद तुमने वो मृगनैनी देखी।

इस नाटक का मंचन सुभाषनगर रामलीला कमेटी द्वारा किया गया। बड़ी संख्या में बरेली की साहित्य प्रेमी जनता ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर मंचन का आनंद लिया। आयोजन समिति के अध्यक्ष धनश्याम शर्मा एडवोकेट ने जिलाधिकारी का हार और शॉल पहनाकर सम्मान किया और सचिव कुलभूषण ने स्मृति चिन्ह भेंट किया। कुशल संचालन डीएन शर्मा द्वारा किया गया। इस मौके पर डॉ विमल भारद्वाज, समयून खान, विधान टंडन, आशीष गुप्ता, गिरधर गोपाल खंडेलवाल, पंडित काशीनाथ शर्मा, शारदा भार्गव, गौरव वर्मा, दानिश जमाल और दिनेश्वर दयाल सक्सेना आदि मौजूद रहे।