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नैनीताल घूमने आएं तो ये हो सकती हैं आपकी पसंदीदा जगह, जानिए कहां से शुरू कर सकते हैं आप सैर सपाटा

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नैनीताल-न्यूज टुडे नेटवर्क : हिमालय के बीच बसी हुई झीलों की नगरी नैनीताल के बारे में कौन नहीं जानता। अगर कहीं घूमने-फिरने का छोटा सा प्लान बनाना हो तो उत्तराखंड के नैनीताल का नाम ही जेहन में सबसे पहले आता है।  हर साल लाखों पर्यटक इस खूबसूरत शहर का दीदार करने के लिए यहां आते हैं। देश के प्रमुख क्षेत्रों में नैनीताल की गणना की जाती है। यह नैनीताल जिले का मुख्यालय भी है। नैनीताल में सबसे अधिक ताल हैं, इसलिए इसे झीलों का शहर भी कहा जाता है। नैनीताल बेहद ख़ूबसूरत जगह है। कहा जाता है कि एक समय में नैनीताल जिले में 60 से ज्यादा झीलें हुआ करती थीं। यहां चारों ओर खूबसूरती बिखरी है। सैर-सपाटे के लिए दर्जनों जगहें हैं, जहां जाकर पर्यटक मंत्र-मुग्ध हो जाते हैं। यहां की यादें पर्यटक अपने मन में बसाकर सालों तक नैनीताल का गुणगान करते रहते हैं।


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कैसे पहुंचे नैनीताल

एनएच 87 नैनीताल को पूरे देश से जोड़ता है। नैनीताल में रेल और हवाई सेवाएं नहीं हैं, लेकिन यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन यहां से सिर्फ 34 किमी दूर काठगोदाम में है। काठगोदाम से नैनीताल के लिए राज्य परिवहन की गाडिय़ां दिन में हर समय उपलब्ध रहती हैं। इसके अलावा शेयर टैक्सी 100-150 रुपये प्रति व्यक्ति और बुक करने पर 500-600 रुपये में यहां रेलवे स्टेशन के बाहर ही मिल जाती हैं। अगर आप हवाई मार्ग से नैनीताल जाना चाहते हैं तो यहां का नजदीकी पंतनगर एयरपोर्ट करीब 55 किमी दूर है।

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देश के कुछ प्रमुख स्थानों से नैनीताल की दूरी

दिल्ली : 320 किमी
अल्मोड़ा : 68 किमी
हल्द्वानी : 38 किमी
जिम कॉर्बेट पार्क : 68 किमी
बरेली : 190 किमी
लखनऊ : 445 किमी
हरिद्वार : 234 किमी
मेरठ : 275 किमी

नैनीताल का धार्मिक महत्व

नैनीताल को 64 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि जब भगवान शिव माता सती के शव को लेकर पूरे ब्रह्मांड में भटक रहे थे तो यहां माता की आखें (नयन) गिर गए थे। माता की आखें यहां गिरी थी इसलिए इस जगह का नाम नैनी ताल पड़ा। माता को यहां नैयना देवी के रूप में पूजा जाता है।

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यहां पर है रुकने की है व्यवस्था…

नैनीताल जाने से पहले ही सबसे ज्यादा चिंता इस बात की होती है कि ठहरने की क्या व्यवस्था हो. यहां कई सरकारी गेस्ट और रेस्ट हाउस हैं, जिन्हें बुक करके आप चैन से सफर का प्लान बना सकते हैं। मल्लीताल में कुमाऊं गेस्ट हाउस में रुकने की अच्छी व्यवस्था है। यहां का फोन नंबर 05942-236350 है। इसके अलावा कुमाऊं मंडल विकास निगम के टूरिस्ट रेस्ट हाउस में भी कमरों की व्यवस्था है। इसके बारे में फोन नंबर 05942-236374 या www.kmvn.gov.in वेबसाइट से जानकारी मिल सकती है। तल्लीताल में भी टूरिस्ट रेस्ट हाउस है यहां के बारे में जानकारी फोन नंबर 05942-235570 से ली जा सकती है। इसके अलावा स्नो व्यू में टूरिस्ट रेस्ट हाउस का फोन नंबर 05942-238570 है और नैनीताल क्लब से संपर्क करने के लिए उनके फोन नंबर 05942-235875, 236212, 235420 हैं। इनके अलावा नैनीताल में प्राइवेट होटलों की भी अच्छी व्यवस्था है।

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नैनीताल में सैर-सपाटे की जगहें…

तल्लीताल और मल्लीताल : मल्लीताल से तल्लीताल को जोडऩे वाली सडक़ को माल रोड कहा जाता है। माल रोड पर जगह-जगह लोगों के बैठने और आराम करने के लिए लिए बेंच लगे हुए हैं। सैर-सपाटे के लिए यहां आने वाले सैलानी पैदल ही करीब डेढ़ किमी की इस दूरी को शॉपिंग करते हुए तय कर लेते हैं। वैसे दोनों ओर से रिक्शों की अच्छी व्यवस्था है। यहां भोटिया मार्केट में गर्म कपड़े, कैंडल और बेहतरीन गिफ्ट आइटम मिलते हैं। यहीं पर नैयना देवी मंदिर भी है।

चाइना पीक या नैनापीक : नैनीताल की सात चोटियों में 2611 मीटर ऊंची चाइना पीक सबसे ऊंची चोटी है। चाइना पीक की दूरी नैनीताल से लगभग 6 किलोमीटर है। इस चोटी से हिमालय की ऊंची-ऊंची चोटियों के दर्शन होते हैं। यहां से नैनीताल झील और शहर के भी भव्य दर्शन होते हैं। यहां एक रेस्तरां भी है।

किलवरी : 2528 मीटर की ऊंचाई पर दूसरी पर्वत चोटी है और इसे किलवरी कहते हैं। यह पिकनिक मनाने के लिए शानदार जगह है। यहां पर वन विभाग का एक विश्रामगृह (रेस्ट हाउस) भी है। इसका आरक्षण डी.एफ.ओ. नैनीताल करते हैं।

लडिय़ाकांटा : इस पर्वत श्रेणी की ऊंचाई 2481 मीटर है और यह नैनीताल से लगभग साढ़े पांच किलोमीटर दूर है। यहां से नैनीताल के ताल को देखना अपने आप में एक अनूठा अनुभव है।

देवपाटा और केमल्स बैक : देवपाटा और केमल्स बैक नाम की ये दोनों चोटियां साथ-साथ हैं। देवपाटा की ऊंचाई 2435 मीटर है जबकि केमल्स बैक 2333 मीटर ऊंची है। इस चोटी से भी नैनीताल और उसके आसपास के इलाके के बेहद सुंदर नजारे दिखते हैं।

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डेरोथीसीट और टिफिन टॉप : एक अंग्रेज ने अपनी पत्नी डेरोथी की याद में इस पहाड़ की चोटी पर उसकी कब्र बनाई और उसका नाम डेरोथीसीट रख दिया। तभी से यह डेरोथीसीट के नाम से जाना जाता है। नैनीताल से चार किलोमीटर की दूरी पर 2290 मीटर की ऊंचाई पर यह चोटी है। टिफिन टॉप से हिमालय के खूबसूरत नजारे दिखते हैं।

स्नोव्यू और हनी-बनी : नैनीताल से केवल ढाई किलोमीटर और 2270 मीटर की ऊंचाई पर हवाई पर्वत चोटी है। मल्लीताल से रोपवे पर सवार होकर यहां आसानी से जाया जा सकता है। यहां से हिमालय का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। स्नोव्यू से लगी हुई दूसरी चोटी हनी-बनी है, जिसकी ऊंचाई 2179 मीटर है, यहां से भी हिमालय का सुंदर नजारा दिखता है।

नैनीताल चिडिय़ाघर  : नैनीताल का चिडिय़ाघर बस अड्डे से करीब 1 किमी दूर है। इसका नाम उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी गोविंद बल्लभ पंत के नाम पर रखा गया है। चिडिय़ाघर में बंदर से लेकर हिमालय का काला भालू, तेंदुए, साइबेरियाई बाघ, पाम सिवेट बिल्ली, भेडिय़ा, चमकीले तितर, गुलाबी गर्दन वाले प्रकील पक्षी, पहाड़ी लोमड़ी, घोरल, हिरण और सांभर जैसे जानवर हैं। यह जू हर सोमवार, राष्ट्रीय अवकाश और होली-दिवाली के मौके पर बंद रहता है।

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रोप-वे या ट्रॉली : मल्लीताल से स्नोव्यू तक रोपवे का आनंद लिया जा सकता है। एक ट्रॉली में 10 सवारियों के अलावा 1 ऑपरेटर के खड़े होने की जगह होती है। यह सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक सवारी के लिए तैयार रहती है और दोनों तरफ का किराया बड़ों के लिए 150 रुपये व बच्चों के लिए 100 रुपये है। फोन नंबर 05942-235772 से रोपवे के बारे में ज्यादा जानकारी ली जा सकती है।

घुड़सवारी : सैलानियों के लिए हॉर्स राइडिंग एक और आकर्षण है। यहां बारापत्थर से घोड़े किराए पर लेकर सैलानी नैनीताल की अलग-अलग चोटियों की सैर करते हैं। शहर के अंदर घुड़सवारी पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

राजभवन : इंग्लैंड के बकिंघम पैलेस की तर्ज पर बनाए गए राजभवन का निर्माण अंग्रेजों ने उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के गवर्नर के रहने के लिए किया था। अब यहां उत्तराखंड के राज्यपाल का निवास है और राज्य के अतिथि भी यहां आकर ठहरते हैं। दो मंजिला इमारत में 113 कमरे हैं। यहां शानदार गार्डन, गोल्फ लिंक, स्वीमिंग पुल, झंडीदार मोदी हाइट्स, मुंशी हाइट्स जैसी जगहें राजभवन में देखने योग्य हैं।

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केव गार्डन: नैनीताल आने वाले सैलानियों के लिए यह बिल्कुल नया फीचर है और यह ज्यादा पुराना भी नहीं है। यह मल्लीताल से करीब एक किमी दूर सूखाताल इलाके में कुमाऊं विश्वविद्यालय कैंपस के पास है।

हनुमान गढ़ी : नैनीताल बस अड्डे से करीब 3.5 किमी दूर समुद्र तल से 1951 मीटर की ऊंचाई पर है। इस जगह से डूबते सूर्य का खूबसूरत नजारा दिखता है और यह इसी के लिए मशहूर है। 1950 के आसपास नीम करोली बाबा ने ये मंदिर बनाए थे इनमें बजरंगबली हनुमान के अलावा राम-लक्ष्मण और सीता की मूर्तियां भी हैं। इसी पहाड़ की दूसरी तरफ शीतला माता का मंदिर और लीला शाह बापू का आश्रम भी है।

नैनीताल के आसपास सैरगाह…

भीमताल और नौकुचियाताल : भीमताल और नौकुचियाताल दोनों तालों की खूबसूरती जबरदस्त है। भीमताल की झील तो नैनीताल की झील से भी बड़ी है। जबकि नौकुचियाताल की खासियत इसके नौ कोने हंै। नैनीताल से मात्र 22 किमी दूर है भीमताल से 4 किमी दूर नौकुचियाताल है। नौकुचियाताल में आप रंग-बिरंगे पक्षियों के दर्शन कर सकते हैं। भीमताल में सैलानी बोटिंग का भरपूर लुत्फ उठाते हैं। भीमताल की झील के बीच एक टापू है, जहां बेहद सुंदर एक्वेरियम है और यह किनारे से 91 मीटर दूर है। इसके अलावा यहां 17वीं सदी का भीमेश्वर मंदिर है और 40 फिट ऊंचा बांध भी देखने लायक है।

खुर्पाताल और गिरीताल :  नैनीताल जिले में स्थित यह खूबसूरत स्थान मछली पकड़ने के शौकीन लोगों के लिए स्वर्ग है। खुर्पाताल नैनीताल से 10 किमी की दूरी पर स्थित है। नैनीताल में स्थित गिरीताल एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। इस ताल की विशेष महत्ता है, प्रत्येक पर्व पर यहाँ दूर-दूर से यात्री आते हैं।

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सात ताल : सात ताल में कई छोटी-छोटी झीलें हैं। यह नैनीताल से सिर्फ 23 किमी दूर है। यहां अमेरिकी मिशनरी स्टेनली जॉन का आश्रम भी है। अपने नाम के अनुसार ही यहां सात झीलें हैं। यहां जाने के बाद सबसे पहले ‘नल दमयंती झील’ दिखती है। इसके बाद ‘पन्ना’ और ‘गरूड़’ झीलें दिखाई देती हैं। इसके बाद तीन झीलें एक साथ दिखती हैं और इनका नाम ‘राम’, ‘लक्ष्मण’ और ‘सीता’ लेक है।

भवाली और घोड़ाखाल : नैनीताल से करीब 11 किमी दूर है भवाली जो उसकी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। भवाली को 1912 में अने अपने टीबी सेनेटोरियम के लिए भी जाना जाता है। भवाली से घोड़ाखाल करीब 3 किमी दूर है। घोड़ाखाल में ग्वेल (गोलू) देवता का विशाल मंदिर है। यहां भक्त आकर उनसे अपनी मनोकामना पूरी करने की अर्जी लगाते हैं। इसके अलावा घोड़ाखाल को सैनिक स्कूल के लिए भी जाना जाता है। घोड़ाखाल का सैनिक स्कूल देश के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक है।

मुक्तेश्वर : नैनीताल से करीब 51 किमी दूर बसे मुक्तेश्वर में खूबसूरत फलों के बगीचे हैं। यह शंकुधारी जंगलों से घिरा हुआ है। 1893 में अंग्रेजों ने मुक्तेश्वर में अनुसंधान और शिक्षा संस्थान (IVRI) की स्थापना की थी। यहां से हिमालय का विहंगम दृश्य आंखों के ठीक सामने दिखता है। यहां चट्टान के शिखर पर भोले भंडारी भगवान शिव का मंदिर भी दर्शनीय है।

कैची धाम : बाबा नीम करोली का यह आश्रम आधुनिक जमाने का धाम है। यहां पर मुख्य तौर पर बजरंगबली की पूजा होती है। इस जगह का नाम कैची यहां सडक़ पर दो बड़े जबरदस्त हेयरपिन बैंड (मोड़) के नाम पर पड़ा है। कैची नैनीताल से सिर्फ 17 किमी दूर भुवाली से आगे अल्मोड़ा रोड पर है। बजरंग बली का आशीर्वाद लेने और नीम करोली बाबा के बारे में जानने के लिए पर्यटक यहां आते हैं। इसके अलावा यहां मन की शांति भी खूब मिलती है। पास से गुजरती जलधारा इस जगह पर एक अलग ही आनंद और सौन्दर्य देती है।

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