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अन्ना हजारे भी किसानों के साथ, केन्द्र को अल्टीमेटम, मांगे नहीं मानीं तो करेंगे भूख हड़ताल

न्‍यूज टुडे नेटवर्क। किसान आंदोलन के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता अन्‍ना हजारे भी कूद पड़े हैं। अन्‍ना हजारे ने केन्‍द्र सरकार को साफ शब्‍दों में चेतावनी दी है कि अगर केन्‍द्र ने किसानों की मांगें नहीं मानी तो वे भूख हड़ताल शुरू कर देंगे। अन्‍ना ने कहा कि यह उनका आखिरी आंदोलन होगा। अपने गृहनगर अहमदनगरके रालेगण सिद्धी गांव में अन्‍ना हजारे पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। अन्‍ना ने कहा कि पिछले एक माह से ऊपर से किसान हक की लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन सरकार अपनी जिद पर अड़ी हुई है।जिद छोड़कर सरकार को किसानों से बात करनी चाहिए। यही नहीं पिछले तीन सालों से किसान कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। हजारे ने कहा कि सरकार केवल खोखले वादे करती है उन्‍हें सरकार पर विश्‍वास नहीं है।

हजारे ने केन्‍द्र सरकार को चेतावनी देते हुए एक माह का अल्‍टीमेटम दिया है। हजारे ने कहा कि सरकार को मैंने एक माह का समय दिया है। जनवरी अंत तक यदि किसानों की समस्‍याओं का पूर्ण रूप से समाधान नहीं किया गया तो वे फिर भूख हड़ताल शुरू करेंगे। इससे पहले अन्‍ना हजारे ने लोकपाल बिल पास कराने को लेकर आमरण अनशन किया था और निर्णायक लड़ाई लड़ी थी। उस समय दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविन्‍द केजरीवाल भी अन्‍ना के साथ आंदोलन का अहम हिस्‍सा थे। अन्‍ना के आंदोलन और उनके विचारों की बदौलत ही आम आदमी पार्टी दिल्‍ली में सत्‍ता पर काबिज हो पाई थी।

हजारे ने कहा कि देखते हैं कि सरकार उनके अल्‍टीमेटम पर कितना गंभीर होकर किसानों की समस्‍याओं का समाधान निकालती है। अन्‍ना ने कहा कि यह तय है कि किसानों के लिए यह उनका आखिरी आंदोलन होगा। अन्‍ना अभी 83 वर्ष के हैं। अन्ना हजारे ने 14 दिसम्बर को केन्द्रीय कृषि मंत्री तोमर को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि एम. एस. स्वामीनाथन समिति की अनुशंसाओं को लागू करने और कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) को स्वायत्तता प्रदान करने संबंधी उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया गया तो वह भूख हड़ताल करेंगे।

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हरिभाऊ बागाडे ने हाल ही में हजारे से मुलाकात भी की थी और उन्हें केन्द्र द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के बारे में अवगत कराया था। हजारे ने केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर आठ दिसम्बर को किसान संगठनों के भारत बंद के समर्थन में उपवास रखा था।

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