उत्तराखंड - सात साल बाद भी नैनीताल निवासी महिला को फ्लैट न देने पर बिल्डर पर गिरी गाज, 15 लाख और कब्जा देने के आदेश 

 

देहरादून - साढ़े 52 लाख रुपये का पूरा भुगतान करने के बावजूद सात वर्षों तक थ्री बीएचके फ्लैट का कब्जा न मिलने का मामला आखिरकार उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में घर खरीदार के पक्ष में गया। नैनीताल निवासी अनविता त्रिपाठी की शिकायत पर रेरा ने देहरादून स्थित श्री आरना एसोसिएट्स परियोजना के प्रमोटरों को कड़ी फटकार लगाते हुए 15 दिन के भीतर फ्लैट संख्या-601 का विधिवत कब्जा सौंपने का आदेश दिया है। रेरा के सदस्य नरेश सी. मठपाल द्वारा पारित आदेश में कहा गया है कि फ्लैट बुकिंग के सात साल बाद भी कब्जा न देना कानून का गंभीर उल्लंघन है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह मामला वर्ष 2017 में बालावाला स्थित अर्नव अपार्टमेंट परियोजना से जुड़ा है, जहां शिकायतकर्ता ने करीब 52.50 लाख रुपये का भुगतान किया था, लेकिन न तो फ्लैट मिला और न ही रजिस्ट्री कराई गई।

रेरा ने अपने फैसले में माना कि प्रमोटर परियोजना को समय पर पूरा करने में पूरी तरह विफल रहे। न तो पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया और न ही वैधानिक रूप से कब्जा सौंपा गया। प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रमोटर फर्म के सभी साझेदार संयुक्त और व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार हैं। किसी एक साझेदार पर जिम्मेदारी डालकर अन्य साझेदार अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकते।

पांच लाख रुपये का जुर्माना, भू-राजस्व की तरह होगी वसूली - 
रेरा ने आदेश की अवहेलना करने और सुनवाई के दौरान जानबूझकर अनुपस्थित रहने पर प्रमोटर विनोद रावत तथा उनके सहयोगियों संजय पांडे, विवेक उपाध्याय और देवाशीष रावत पर कुल पांच लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि समय पर जुर्माना जमा न करने की स्थिति में राशि की वसूली भू-राजस्व की तरह की जाएगी।

समझौता राशि से 7.96 लाख रुपये अधिक वसूले - 
शिकायतकर्ता अनविता त्रिपाठी ने वर्ष 2017 में विभिन्न तिथियों पर कुल 52.50 लाख रुपये का भुगतान किया था, जबकि फ्लैट की समझौता राशि 44.54 लाख रुपये तय की गई थी। इस प्रकार प्रमोटरों द्वारा 7.96 लाख रुपये अतिरिक्त वसूले गए। रेरा ने इस अतिरिक्त राशि सहित विलंब ब्याज के रूप में कुल 15,12,825 रुपये शिकायतकर्ता को भुगतान करने का भी आदेश दिया है।

पति की मृत्यु से मानसिक पीड़ा - 
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता के पति का 15 नवंबर 2020 को आकस्मिक निधन हो गया था, जिससे वह लंबे समय तक मानसिक रूप से व्यथित रहीं और मामले की प्रभावी पैरवी नहीं कर सकीं। इस दौरान प्रमोटर द्वारा केवल औपचारिक रूप से एक कब्जा पत्र जारी किया गया, जबकि न तो फ्लैट तैयार था और न ही रजिस्ट्री की गई।

रेरा की कड़ी टिप्पणी - 
रेरा ने अपने आदेश में कहा कि रियल एस्टेट अधिनियम का उद्देश्य केवल परियोजनाओं का पंजीकरण नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को समयबद्ध और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। वर्षों तक पैसा लेकर फ्लैट न देना न केवल अनुचित व्यापार व्यवहार है, बल्कि यह कानून की मंशा पर सीधा हमला है। नकद लेन-देन, टालमटोल और खरीदार को भ्रमित करने की प्रवृत्ति को किसी भी परिस्थिति में वैध नहीं माना जा सकता। रेरा के इस फैसले को राज्य के रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक कड़ा और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।